
एआई तस्वीर
कोटा। राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य से 732 हैक्टेयर भूमि मुक्त ( डी- नोटिफाइड) करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से इस क्षेत्र के 40 हजार से अधिक परिवारों के पट्टे फिर अटक गए हैं। राज्य सरकार ने 2 जनवरी को चम्बल नदी से एक हजार मीटर (एक किलोमीटर) के क्षेत्र में बसे 6 राजस्व गांवों को राष्ट्रीय चम्बल घडियाल अभयारण्य से मुक्त कर दिया था। इससे यहां लंबे समय से बसी एक लाख से अधिक आबादी को आवासीय व व्यावसायिक पट्टे समेत अन्य दस्तावेज मिलने का रास्ता साफ हो गया था।
यह वीडियो भी देखें
किशोरपुरा निवासी दिनेश शर्मा ने कहा, चंबल घड़ियाल अभयारण्य की 732 हैक्टेयर भूमि में पिछले कई वर्षाें से घडि़याल नहीं है। इन इलाकों में पक्के निर्माण और चट्टानी क्षेत्रों के चलते घडियाल प्रजनन की संभावना भी नहीं है। इसी क्षेत्र में लंबे समय से बसे संजय साहनी का कहना है कि दशकों से यहां बसे परिवारों और कारोबारियों को आवासीय व व्यावसायिक पट्टे नहीं मिले। इससे बैंक ऋण भी नहीं मिलता।
राजस्व गांव - क्षेत्रफल (हैक्टेयर में)
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हम पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन कोटा की 732 हैक्टेयर भूमि अभयारण्य में होने के बावजूद यहां घडि़याल नहीं है। यह दशकों से घनी आबादी वाला राजस्व क्षेत्र है। लोगों को आवासीय व व्यावसायिक सम्पत्ति के पट़्टे नहीं मिलने से काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हमें उम्मीद है कि न्यायालय जनहित में इस दिशा में सकारात्मक निर्णय करेगा।
आबादी क्षेत्र को चंबल घडि़याल सेन्चुरी से मुक्त करने के लिए डी-नोटिफाइड किया गया था। इस मामले में अब न्यायालय के आदेश की पालना की जाएगी।
आमजन के हितों का ध्यान रखना सही है, लेकिन चंबल के सुरक्षा घेरे को कमजोर करना उचित नहीं है। सरकार को वैकल्पिक योजना पर काम करना चाहिए।
Updated on:
19 Apr 2026, 4:56 PM IST
Published on:
19 Apr 2026, 4:56 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.