
जोधपुर। हाईकोर्ट ने फिल्म पद्मावत पर चल रहे विवाद में मंगलवार को तीखी टिप्पणी की। न्यायाधीश संदीप मेहता कहा कि फिल्म से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं हो रहीं, ना ही कोई ऐसा संवाद है जिससे कोई वैमनस्य उत्पन्न हो रहा है। न्यायाधीश मेहता ने शिकायतकर्ता के वकील से पूछा कि आपने याचिकाकर्ताओं पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। यह फिल्म पद्मावती पर बनाई गई है, अब आप ही बताइए पद्मावती एेतिहासिक आइडल अर्थात महारानी थी या किसी धर्म की देवी। यदि देवी नहीं थी तो उसके चरित्र चित्रण से धार्मिक भावनाएं कहां आहत हुई?
शिकायतकर्ताओं के आरोपों को आधारहीन बताया
इसके साथ ही कोर्ट ने निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली, अभिनेत्री दीपिका पादुकोण और अभिनेता रणवीर सिंह के खिलाफ डीडवाना में दायर एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिए। याचिका के निस्तारण के लिए फिल्म का विशेष शो देखने के बाद जस्टिस संदीप मेहता ने याचिकाकर्ताओं पर लगाए गए शिकायतकर्ताओं के आरोपों को आधारहीन बताया। कहा, फिल्म के आरंभ में ही डिस्क्लेमर दिखाते हुए किसी तरह के विवाद से नहीं जुडऩे का प्रयास किया है।
पूर्वानुमान पर आरोप लगाने से अपराध कैसे?
जस्टिस मेहता ने यह भी कहा कि किसी भी घटना का पूर्वानुमान लगा कर किसी पर आरोप लगाने से अपराध कैसे बन सकता है। शिकायतकर्ताओं ने एक साल पहले ही अनुमान लगा लिया कि फिल्म में क्या होगा, जबकि बचाव पक्ष ने भी कहा था कि अभी फिल्म बनी नहीं है, बनने के बाद सेंसर भी होगी, यदि किसी तरह की गलत बात होगी तो हटा दी जाएगी।
कोर्ट की सख्ती, कहा
पद्मावत फिल्म का राज्य में प्रदर्शन करने, फिल्म के निर्माताओं, कलाकारों और दर्शकों की हिफाजत करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी। फिल्म को सेंसर बोर्ड का प्रमाण पत्र मिल चुका है तथा सुप्रीम कोर्ट ने भी देशभर में फिल्म प्रदर्शित करने के आदेश दिए हैं।