जोधपुर

Rajasthan News : संत ने दी थी बद्रीनाथ भगवान की प्रतिमा, फिर हो गए थे अदृश्य, आखा तीज के दिन खुलता है ये मंदिर

Badrinarayan Temple : बद्रीनाथ धाम में भगवान को तुलसी, पंचमेवा, मिश्री व चने की दाल का भोग लगाया जाता है। उसी परंपरानुसार यहां भी भगवान को तुलसी, पंचमेवा, मिश्री व चने का दाल का ही भोग लगाकर भक्तों को वितरित किया जाता है।
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May 10, 2024
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Rajasthan News : धार्मिक नगरी सूर्यनगरी में अक्षय तृतीया के दिन श्रद्धालुओं को भगवान बद्रीनारायण के दर्शन होंगे। चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम की तर्ज पर ही भीतरी शहर गूंदी मोहल्ला बद्रीनारायण गली में स्थित यह मंदिर खुलेगा व बद्रीनारायण भगवान के दर्शन होंगे। जोधपुर में पिछले करीब 400 सालों से यह मंदिर हर आखा तीज पर खुलता है। शुक्रवार को आखा तीज पर मंदिर खुलेगा व बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आएंगे।

साल में दो दिन ही खुलता है यह मंदिर

बद्रीनाथ धाम में अक्षय तृतीया के दिन मंदिर के कपाट खुलते है और 6 माह बाद दीपावली के दूसरे दिन रामा श्यामा के दिन कपाट मंगल होते हैं। जबकि जोधपुर बद्रीनारायण गली में एक घर में बना यह मंदिर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने और पट मंगल होने की तिथियों के दिन ही खोला जाता है । इस प्रकार जोधपुर में यह मंदिर केवल 2 दिन ही खुलता है।

7 पीढ़ियों से कर रहे परम्परा का निर्वाह

राघव शर्मा ने बताया कि करीब 400 सालों से बद्रीनाथ भगवान की पूजा की जा रही है। एक बार हमारे पूर्वज जब बद्रीनाथ गए और भगवान को अपनी व्यथा बताई, तो बीच राह में एक संत आए, उन्होंने उनको बद्रीनाथ भगवान की प्रतिमा देकर अपने घर में ही पूजा करने की बात कहकर अदृश्य हो गए। हमारे पूर्वज जोधपुर आए और प्रतिमा स्थापित कर बद्रीनाथ धाम की पूजा पद्धति की परंपरानुसार पूजा करने लगे। आज करीब 7 पीढ़ियों के बाद भी इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है।

Updated on:
10 May 2024 11:13 am
Published on:
10 May 2024 11:13 am