
Photo: AI generated
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में किए गए 2216 अतिक्रमणों को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानते हुए राज्य सरकार को दो माह में इन्हें हटाने या नियमानुसार स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अतिक्रमण केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले लोगों के जीवन के अधिकार से जुड़े हैं।
न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी व न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने जोधपुर निवासी हिम्मत सिंह गहलोत (32) की याचिका पर सुनवाई करते हुए विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूर्व में एक धर्मकांटा के पास हुए हादसे का भी संज्ञान लिया, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी।
कोर्ट ने माना कि हाईवे के प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण या गतिविधि से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। धर्मकांटा को स्वैच्छिक हटाने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए अंतिम तिथि 6 फरवरी की बजाय 6 मार्च, 2026 कर दी। कोर्ट ने इस मामले को एक स्थान तक सीमित नहीं मानते हुए राज्यभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में हो रहे अतिक्रमणों को गंभीर समस्या बताया।
खंडपीठ के समक्ष रखे गए प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में नेशनल हाईवे के राइट ऑफ वे में 2216 अतिक्रमण सामने आए हैं। इनमें 103 धार्मिक, 881 आवासीय और 1232 व्यावसायिक अतिक्रमण (होटल-ढाबे आदि) शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अतिक्रमण सड़क पर दृश्यता बाधित करते हैं।
Published on:
13 Feb 2026 09:44 am
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
