
जोधपुर.
दूर-दूर से आए लोग कह रहे थे-बापजी सबर करो सा। बाईसा धीरज राखो सा। ऊपर वाळे रे आगे किनी नी चालै। बाईजीलाल रोणो नीं। कंवर बाई सा रोवो नीं। राजमातात सा ताउम्र कित्ती हिमत राखी, वा छब्बीस साल री ही जदै महाराजा सा दुनिया सूं पर्दो लियो।
यह दुख की घड़ी थी। हर आंख नम और सभी को गम था। उदास- मायूस चेहरों पर छाया था दुख का साया, जिसने सुना पढ़ा दौड़ा चला आया। क्या छोटा क्या बड़ा, पुरुष सभी जुटे थे दुख जताने के लिए। पूर्व राजघराने के परिवार पूर्व सांसद गजसिंह, हेमलता राज्ये, शिवराजसिंह और शिवरंजिनी सहित सरदारों का आलम यह था कि पार्थिव देह को देख-देख कर आंखों में रात काटी। मासूम वारा और सिराजदेवसिंह रोते हुए चेहरे देख रहे थे। बोझिल चेहरों के हावभाव एेसे थे कि अपनों के मुंह से तो मुंह से बोल ही नहीं फूट रहे थे और सब गमजदा नजर आ रहे थे।
नौ कोठी मारवाड़ के बुजुर्ग अपनी पूर्व राजमाता के निधन पर जोधपुर एयरपोर्ट, उम्मेद भवन पैलेस, जसवंत थड़ा और मेहरानगढ़ दुर्ग हर जगह से लोग दुख की घड़ी में पूर्व राजपरिवार को दिलासा दे रहे थे। कोई बुजुर्ग गजसिंह के कांधे पर हाथ रख रहा था तो कोई महिला चंद्रेशकुमारी, शैलजाकुमारी, हेमलता राज्ये और शिवरंजनी को दिलासा दे रहा था। सरदारों की तो रुलाई फूट रही थी।
गले रुंधे हुए थे, लेकिन होंठ निशब्द थे। मानो पूर्व महाराजा हनवंतसिंह के इस वाक्य की तरह उनसे कह रहे हों- म्हें थांसू दूर नीं। आजादी के बाद जब लोकसभा चुनाव हुए थे तो पहले महाराजा हनवंतसिंह और बाद में पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी ने जनता से यह वाक्य कह कर अपनी अपणायत का सुबूत दिया था। आज वही जनता इस परिवार के दुख में शरीक नजर आई।
दुख की घड़ी में हर हस्ती नजर आई
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे,केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत, केंंद्रीय सूचना व प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री पीपी चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी की छोटी पुत्री शैलेशकुमारी दिल्ली से जोधपुर पहुंची। सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास, जोधपुर के प्रथम नागरिक महापौर घनश्याम ओझा और राजसिको के अध्यक्ष मेघराज लोहिया सहित कई नेता कार्यकर्ता श्रद्धांजलि देने के लिए उम्मेद भवन पहुंची। बड़ी हस्तियों के आगमन के कारण भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता अपने नेताओं की अगवानी के लिए जोधपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे। उम्मेद भवन पैलेस और जसवंत थड़ा के कम्पाउंड में भी लोगों की कतारें लगी थीं।