क से कबूतर नहीं सीखा, अ से अलिफ गया
जोधपुर . आंगणवा क्षेत्र में पथरीली पहाड़ी पर करीब 150 पाकिस्तानी विस्थापत परिवार सुविधाओं से महरूम हैं। घासफूस के तिनकों से आशियाना बना जिंदगी बसर कर रहे लोगों के करीब 300 बच्चों को शिक्षा तक की सुविधा नहीं है। उन बच्चों को एक कच्चे झोंपड़े में एक दस वर्षीय बालिका पढ़ा रही है। बारिश में उनके मकान टपकते हैं, तो आंधियों में पूरा आशियाना ही उजड़ जाता है। सर्द हवाओं को रोकने के लिए इंतजाम तक नहीं हैं। पिछले दिनों राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव धीरज शर्मा ने जब उनकी ये हालत देखी तो भावुक हो गए। मेंटल अपलिफ्टमेंट सोसायटी के सचिव योगेश लोहिया, दिनेश जैन, केवल कोठारी ने अपने स्तर पर ही सर्दी से बचाव के लिए कुछ इंतजाम किए जो नाकाफी है। नागरिकता के अभाव में रोजगार से वंचित क्षेत्र के लोग कपड़े सीने का काम कर रहे हैं। उन्हें एक शर्ट की सिलाई मात्र १२ रूपए दी जा रही है।
नागरिकता के लिए आवेदन
बार-बार आवेदन लिए जा रहे हैं, परन्तु नागिरकता मिल नहीं पा रही है। केंद्र सरकार ने विस्थापतों के लिए नोटिफि केशन निकाला था जिस में बैंक खाते खोलना, सम्पति रखने का अधिकार, पारिवारिक आजीविका के लिए छोटा व्यापार और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने सहित अन्य सुविधाएं मिलने की जो घोषणा की गई थीं, इनमें कई की तो पालना नहीं हो पाई है। धार्मिक उत्पीडऩ के सताए इन पाक विस्थापितों को विकास तथा पुनर्वास प्रबन्ध की घोषणा का इंतजार है।
बांध के पास रहकर भी पानी की किल्लत
सुरपुरा बांध का निर्माण करने के बाद लोकार्पण भी किया गया, लेकिन पाक विस्थापितों को एक बूंद नसीब नहीं हो पाई है। क्षेत्र में रहने वाले लोगों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है। चिकित्सा, शिक्षा, पानी, बिजली का अभाव झेल ही रहे हैं। विषम परिस्थितियों के बावजूद पर्यावरण प्रेम बरकरार है। आशियाना बनाने के लिए उनके पास कोई साधन भले ही ना हो लेकिन सभी कच्चे घरों में एक मंदिर जरूर है।