
जोधपुर. शिक्षा के प्रसार के साथ ही समाज की सोच में भी बदलाव आ रहा है। दहेज जैसी सामाजिक बुराई को दूर करने के मामले में भी कुछ एेसा ही हो रहा है। दहेज प्रथा उन्मूलन के प्रति जागरूकता आ रही है। परिजन सहित खुद दूल्हे भी आगे बढ़कर इस दिशा में पहल करने लगे हैं।
शहर में सोमवार शाम राजपूत समाज के विवाह समारोह में अनुकरणीय उदाहरण सामने आया। बीजेएस क्षेत्र के नृसिंहनगर में विवाह समारोह के दौरान टीके की रस्म के समय दूल्हे व उसके पिता ने 11 लाख रुपए का चेक लौटा दिया। बारात फलोदी तहसील के टेपू गांव से मारवाड़ राजपूत सभा भवन पहुंची थी। टीके की रस्म वधू पक्ष के निवास नृसिंह नगर में शाम को हुई। इसमें दूल्हे के पिता पूंजराजसिंह भाटी ने टीके की रस्म के समय सौंपे गए 11 लाख रुपए काचेक वधू पूनमकंवर के पिता अचलसिंह इंदा को लौटा दिया। दूल्हा प्रतापसिंह भाटी नगर पालिका देवगढ़ में अधिशासी अधिकारी हैं।
विवाह समारोह में टेपू सरपंच चंद्रसिंह, टेकरा सरपंच शैतानसिंह, देवराज समाज उपाध्यक्ष विजयसिंह लोड़ता, समाजसेवी जालमसिंह, सांवलसिंह और विंग कमाण्डर दलपतसिंह नाथडाऊ सहित राजपूत समाज के वरिष्ठ लोगों ने वर पक्ष की अनूठी पहल का स्वागत किया। दूल्हे प्रतापसिंह ने कहा कि केवल राजपूत समाज ही नहीं, सभी समाजों के सभ्य नागरिक को हर स्तर पर दहेज या टीका प्रथा का विरोध करना चाहिए।
पहले पुत्र का विवाह भी एेसे
दूल्हे के पिता पूंजराजसिंह भाटी ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि उनके दो पुत्र व दो पुत्रियां है। दूल्हे के बड़े भाई जसवंत सिंह का विवाह भी बिना दहेज ही किया था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में शिक्षा के साथ बच्चों को भी संस्कार देना आवश्यक है। केवल किताबी शिक्षा से समाज में व्याप्त कुरीतियां खत्म नहीं होगी। सदियों से चली आ रही कुरीतियों को समाप्त करने के लिए बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारों का भी बीजारोपण करना होगा। इसके लिए युवाओं को ही पहल करने की जरूरत है। खास तौर पर राजपूत समाज में टीका प्रचलन लंबे अर्से से चला आ रहा है। इसके लिए समन्वित प्रयास करने की जरूरत है। भाटी की इस अनूठी पहल की चर्चा राजपूत समाज के लोगों में भी है।