बंगाल की खाड़ी में 9 से 15 मई दौरान मोचा नामक चक्रवाती तूफान पैदा हुआ थो जो अति गंभीर श्रेणी का था। इसका थार प्रदेश में विपरित असर पड़ा और तापमान में बढ़ोतरी हुई
जोधपुर। इस साल गर्मियों के मौसम में मरुस्थल के प्रवेश द्वार जोधपुर में लू की स्थिति नहीं रही। केवल छह दिन तापमान 42 डिग्री से अधिक रहा। इस साल सर्वाधिक तापमान 13 मई को 44.4 डिग्री रहा था यानी पारा 45 डिग्री को भी पार नहीं कर पाया। अब मानसून सीजन शुरू होने वाला है।
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सिंचाई विभाग की ओर से दो दिन बाद 15 जून से बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जाएगी। पश्चिमी विक्षोभों के कारण इस साल गर्मियों के मौसम में तापमान औसत से कम अथवा आसपास ही रहा। मार्च से लेकर मई तक 17 विक्षोभ आए, जिन्होंने पारे को उछलने से रोका। लू में दो परिस्थितियां होती है। पहला तापमान 45 डिग्री से अधिक हो और दूसरा तापमान 40 डिग्री से अधिक व साथ में पारा सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक हो। दोनों ही परिस्थितियां इस बार नहीं रही।
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मोचा नहीं होता तो और कम रहती गर्मी
बंगाल की खाड़ी में 9 से 15 मई दौरान मोचा नामक चक्रवाती तूफान पैदा हुआ थो जो अति गंभीर श्रेणी का था। इसका थार प्रदेश में विपरित असर पड़ा और तापमान में बढ़ोतरी हुई। इस साल सर्वाधिक तापमान वाले दिन भी मोर्चा के दरम्यान ही रिकॉर्ड हुए। जोधपुर में छह दिन तापमान 42 डिग्री के ऊपर रहा, जिसमें चार दिन मोचा चक्रवात के समय के है। जोधपुर में इस साल अब तक 14 दिन तापमान चालीस डिग्री के ऊपर रहा। उसमें भी 12 दिन मई महीने के थे। मार्च और अप्रेल में एक दिन भी पारा चालीस डिग्री से ऊपर नहीं गया। जून में केवल दो दिन तापमान चालीस डिग्री से ऊपर रहा।
इस साल पश्चिमी विक्षोभ औसत से अधिक आए और वे भी एक के बाद एक पीछे-पीछे आ गए, जिससे तापमान में अधिक बढ़ोतरी नहीं हो सकी।
राधेश्याम शर्मा, निदेशक, भारतीय मौसम विभाग जयपुर