जोधपुर

केवल जयपुर के लिए ही पर्यटन बढ़ा, निवेश बढ़ा, कमाई बढ़ी… शहर वहीं का वहीं रह गया

Jul 21, 2026
Rajasthan

- करीब 15 लाख पर्यटक और अनुमानित 1800 करोड़ का कारोबार, फिर भी व्यवस्थाएं सीजनल


-छह महीने हाई-अलर्ट सिस्टम, बाकी समय नागरिक सुविधाओं की रफ्तार कमजोर



- पानी, बिजली, सफाई, रखरखाव और मॉनिटरिंग में सुधार अब भी अधूरा



- पर्यटन अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन 365 दिन शहरी प्रबंधन मॉडल की दरकार



- दीपक व्यास





जैसलमेर. स्वर्णनगरी ने पर्यटन की दुनिया में विशिष्ट पहचान बनाई है। कभी सीमावर्ती और दूरस्थ शहर के रूप में पहचाने जाने वाला यह शहर आज देश-दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। हर वर्ष करीब 15 लाख पर्यटक, लगभग 1800 करोड़ रुपए का पर्यटन कारोबार, तेजी से बढ़ते होटल-रिसॉर्ट और लगातार बढ़ता निवेश इसकी आर्थिक ताकत को दर्शाते हैं। इसी चमक के पीछे एक दूसरा सच भी मौजूद है। जिस गति से पर्यटन बढ़ा, उसी अनुपात में शहर की स्थायी बुनियादी व्यवस्थाएं विकसित नहीं हो सकीं। यही अंतर अब जैसलमेर के विकास मॉडल की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। जैसलमेर में पर्यटन सीजन के दौरान शहर की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। सडक़ें संवरती हैं, पर्यटन स्थलों का रख-रखाव तेज होता है, सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है, पानी की अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है और बिजली आपूर्ति की निगरानी बढ़ जाती है। प्रशासनिक सक्रियता भी स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन मार्च से अगस्त तक जैसे ही पर्यटकों की संख्या घटती है, व्यवस्थाओं की यही गति भी धीमी पड़ती महसूस होती है। स्थानीय स्तर पर पानी, बिजली, सफाई, रख-रखाव और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आने लगती हैं। यानी जैसलमेर की अर्थव्यवस्था तो 365 दिन चल रही है, लेकिन कई व्यवस्थाएं अभी भी सीजन के हिसाब से संचालित होती दिखाई देती हैं।



आंकड़े से समझिए विकास का अंतर





- वार्षिक पर्यटक : करीब 15 लाख

- पर्यटन कारोबार: लगभग 1800 करोड़ रुपए

-पर्यटन सीजन: सितंबर से फरवरी (लगभग 180 दिन)

-ऑफ सीजन: मार्च से अगस्त (लगभग 185 दिन)

-दैनिक जल आवश्यकता: 18 से 20 मिलियन लीटर

- पर्यटन सीजन के अलावा जलापूर्ति: 8 से 12 मिलियन लीटर







ऑफ सीजन में इन सेवाओं पर सर्वाधिक असर

-जलापूर्ति में असंतुलन

-बिजली फॉल्ट समाधान में देरी

-सार्वजनिक स्थलों के रख-रखाव में कमी

-सफाई व्यवस्था की धीमी गति

-नियमित फील्ड निरीक्षण की कमी

-छोटी समस्याओं के समाधान में बढ़ता समय









करोड़ों का कारोबार, स्थायी सुविधाओं की चुनौती

1800 करोड़ रुपए की पर्यटन अर्थव्यवस्था केवल होटल और रिसॉर्ट तक सीमित नहीं है। इससे टैक्सी संचालक, गाइड, ऊंट सफारी व्यवसाय, हस्तशिल्प कारोबारी, रेस्तरां, लोक कलाकार और हजारों स्थानीय परिवार जुड़े हैं। ऐसे में पर्यटन से मिलने वाले आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा शहर की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने में दिखाई देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सडक़, पानी, बिजली, ड्रेनेज, ट्रैफिक प्रबंधन और डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाएं मजबूत होंगी, तभी पर्यटन विकास लंबे समय तक टिकाऊ रह सकेगा।



पत्रिका व्यू: व्यवस्थाओं से बनेगी बेहतर पहचान

जैसलमेर ने दुनिया को अपना इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य दिखाने में सफलता हासिल कर ली है। अब अगला लक्ष्य ऐसा शहर बनाना है, जहां पर्यटक ही नहीं, स्थानीय नागरिक भी बारहों महीने बेहतर सुविधाओं का अनुभव करें। हकीकत यह है कि आधुनिक पर्यटन केवल खूबसूरत इमारतों और आकर्षक स्थलों से नहीं बनता। उसकी असली नींव मजबूत शहरी व्यवस्थाओं पर टिकती है। जैसलमेर के सामने अब सबसे बड़ा अवसर यही है कि पर्यटन से मिली आर्थिक ताकत को स्थायी विकास में बदला जाए। आने वाले समय में शहर की पहचान केवल इस बात से नहीं होगी कि यहां कितने पर्यटक आए, बल्कि इस बात से होगी कि यहां रहने वाले लोगों को पूरे वर्ष कैसी सुविधाएं मिलीं।



एक्सपर्ट व्यू: 365-डे सिटी मैनेजमेंट मॉडल अपनाने की जरूरत



सीजन आधारित प्रशासन से आगे बढकऱ "365-डे सिटी मैनेजमेंट मॉडल अपनाने की जरूरत है। जरूरत इस बात की है कि पूरे वर्ष समान सेवा गुणवत्ता के मानक तय किए जाएं, जल और बिजली नेटवर्क की रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग हो, पर्यटन राजस्व का निश्चित हिस्सा शहरी आधारभूत ढांचे में निवेश किया जाए, सभी विभागों की नियमित परफॉर्मेंस ऑडिट हो और नागरिक संतुष्टि को प्रशासनिक प्रदर्शन का प्रमुख आधार बनाया जाए।

-सुमेरसिंह राजपुरोहित, पर्यटन विशेषज्ञ

फोटो कैप्शन- पर्यटकों से गुलजार जैसलमेर की तस्वीर, बढ़ते कारोबार के बीच व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत।-

पत्रिका

Updated on:
21 Jul 2026 06:00 am
Published on:
21 Jul 2026 06:00 am