
जेएनवीयू और अन्य विवि के शोधार्थी (पत्रिका फोटो)
Jodhpur Jojari River: जोजरी नदी में वर्षों से प्रदूषण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब वैज्ञानिक अध्ययन ने इस संकट की गंभीरता को प्रमाणित कर दिया है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग तथा अन्य विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के संयुक्त अध्ययन में सामने आया है कि जोजरी नदी का पानी न केवल पीने योग्य रहा, बल्कि सिंचाई के लिए भी असुरक्षित श्रेणी में पहुंच चुका है।
जोजरी नदी के 6 स्थानों से हर सप्ताह लिए गए पानी के नमूनों की जांच में अधिकांश भौतिक एवं रासायनिक मानक भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की निर्धारित सीमा से कहीं अधिक मिले। अध्ययन में वॉटर क्वालिटी इंडेक्स अत्यधिक खराब श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि कैडमियम, लेड, क्रोमियम, निकल, जिंक और कॉपर जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी ने मानव स्वास्थ्य और कृषि पर संभावित खतरे की चेतावनी दी है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्टील और टैक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट इस स्थिति के प्रमुख कारण है। उनका मानना है कि यदि प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण और जल शोधन के उपाय तुरंत नहीं किए गए तो जोजरी नदी से जुड़े गांवों की खेती, भूजल, पशुधन और जैव विविधता पर इसका असर और गंभीर हो सकता है।
जोजरी नदी के छह स्थानों से हर सप्ताह पानी के नमूने एकत्र कर जांच की गई। पीएच, टीडीएस, ईसी, क्लोराइड, अल्केलिनिटी, डाइऑक्साइड, फ्री कार्बन फ्लोराइड, अमोनियाकल नाइट्रोजन और फॉस्फेट की जांच की गई। केवल पीएच और अमोनियाकल नाइट्रोजन वॉटर ही बीआइएस व सीपीसीबी की स्वीकार्य सीमा में मिले। क्वालिटी इंडेक्स 4872.29 से 7076.49 के बीच दर्ज हुआ, जिससे पानी को पीने योग्य नहीं माना गया। 2019-21 के नमूनों में डब्ल्यूक्यूआइ 62.64 से 164.29 के बीच मिला, जिसे सिंचाई के लिए भी अनुपयुक्त बताया गया।
शोध के अनुसार, प्रभावित गांवों में 80 प्रतिशत कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। 200 कुओं का पानी प्रदूषित हो चुका है। जहरीले पानी के कारण गाय, भैंस तथा भेड़-बकरियों में करीब 25 प्रतिशत गर्भपात की समस्या सामने आने का दावा किया गया है। वन्यजीवों की मौत और कुछ दुर्लभ प्रजातियों के पलायन की भी बात अध्ययन में कही गई है। स्थानीय लोगों में त्वचा रोगों के मामलों में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है।
हेवी मेटल पॉल्यूशन इंडेक्स (एचपीआइ) 26,074.41 से 84,547.49 के बीच दर्ज किया गया, जो डब्ल्यूएचओ और बीआइएस मानकों से कई गुना अधिक है। जांच में कैडमियम, लेड, क्रोमियम, निकल, जिंक, और कॉपर की मात्रा तय सीमा से अधिक मिली। शोधकर्ताओं के अनुसार इसी पानी से सिंचित सब्जियां, दालें, अनाज और मसाले खाद्य श्रृंखला के माध्यम से लोगों तक पहुंच रहे हैं। अध्ययन में लंबे समय तक संपर्क रहने पर कैंसर और तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।
जोजरी पर पिछले एक साल से विभिन्न विवि के शोधार्थियों के साथ शोध किया जा रहा है। अभी तक के आंकड़ें चिंताजनक है जो पर्यावरण, वन्य जीव और मानव पर भयावह स्थिति होने के संकेत दे रहे हैं।
-डॉ. हेम सिंह गहलोत, निदेशक, वाइल्ड लाइफ रिसर्च सेंटर (प्राणी शास्त्र विभाग), जेएनवीयू जोधपुर
Updated on:
21 Jul 2026 12:19 pm
Published on:
21 Jul 2026 12:02 pm
