
बांडी नदी में फैल रहा प्रदूषण। फाइल फोटो- पत्रिका
पाली। पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदी में बढ़ रहा प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई हाई-लेवल कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि औद्योगिक इकाइयों से निकले प्रदूषित पानी और सीवरेज के जहरीले मिश्रण ने न केवल बरसाती नदियों को नाला बना दिया है, बल्कि आमजन, पशुधन और पारिस्थितिकी को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
रिपोर्ट के तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश विक्रम नाथ व न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्थिति को अत्यंत गंभीर माना है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 तय करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह कमेटी को सभी आवश्यक संसाधन और सहयोग तुरंत उपलब्ध करवाए।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी, जिसने अपनी पहली स्थिति रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में नदियों को बचाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तथा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थिति में सुधार की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश ट्रीटमेंट प्लांट या तो अपनी क्षमता से कम काम कर रहे हैं या फिर मानकों का उल्लंघन करते हुए बिना ट्रीट किया गया पानी सीधे नदियों में छोड़ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित हाई लेवल कमेटी ने पहली 200 पेज की स्टेटस रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए और कई गंभीर सवाल खड़े किए गए।
Published on:
13 Mar 2026 03:55 pm
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