भोपालगढ़. ग्रामीण इलाकों के इन किसानों के सामने इस बार अजीब सा संकट पैदा हो गया है और वे अपनी ऋण राशि लेने के लिए गांवों से भोपालगढ़ के कॉ-ओपरेटिव बैं
भोपालगढ़. "साब, म्हां तो अणपढ़ लोग हां अर बैंक म्हांने एटीएम पकड़ाय दिया। लोन रा पईसा ई इण भिनां निकळे कोनी। केई वांर म्हांणे गांव सूं गोता खायन पईसा लेवणने भोपाळगढ़ आवां, तो बाळे आ मशीन खराब मिळे। कदैई जे मशीनड़ी ठीक वे, तो रोज रा १० हजार सूं हाला रिपियां कोनी निकळे। इण वास्तै लोन रा पूरा पईसा लेवण वास्ते चार-चार, पांच-पांच वांर अठे रा गोता खाणा पड़े। म्हांने अणपढ़ लोगां रे हाथां में एटीएम पकड़ायन ऐड़ा दौरा करिया है, जकां री भळेन भात री है। पैलां ऐड़ा होरा हा, आपरे बैंक जावता अर पर्ची भरन पईसा लियावता। अबे तो ऐड़ा गोता पड़े है, जका री पूछण री ई भात नी है।" यह कहना है इन दिनों ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण लेने वाले किसानों का। ग्रामीण इलाकों के इन किसानों के सामने इस बार अजीब सा संकट पैदा हो गया है और वे अपनी ऋण राशि लेने के लिए गांवों से भोपालगढ़ के कॉ-ओपरेटिव बैंक स्थित एटीएम के चक्कर काट रहे हैं। जबकि कई बार एटीएम में तकनीकी खराबी की वजह से इन किसानों को पैसे नहीं मिल पाते हैं और वे हाथों में एटीएम थामे दिन भर यहां इंतजार करते रहते हैं। तो कई बार एटीएम ठीक होने की जानकारी मिलने पर किसानों की कतारें लग जाती है।
गौरतलब है कि ग्रामीण इलाकों में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण प्रदान किया जाता है और जिन किसानों ने हाल ही में ब्याज लगने के डर से पूर्व में लिया गया ऋण जमा करवाकर फिर से नया ऋण लिया है, उन्हें इस बार सहकारी बैंकों के नए नियम-कायदों की वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि इस बार सहकारी समितियों से जिन किसानों ने ऋण लिया है, उन्हें ऋण राशि सीधे कॉ-ओपरेटिव बैंक से नहीं मिल कर एटीएम के माध्यम से दी जा रही है। जबकि पहले किसान सीधे बैंक आकर पर्ची भरकर अपने पैसे ले जा सकता था। जबकि इस बार एटीएम से ही पैसे निकालने की बाध्यता के कारण ग्रामीण सहकारी समितियों से ऋण स्वीकृति के बाद भी ये किसान अपने एटीएम लेकर भोपालगढ़ स्थित कॉ-ओपरेटिव बैंक के एटीएम पर तो पहुंच रहे हैं, लेकिन कई बार एटीएम मशीन खराब होने की वजह से उन्हें यह राशि नहीं मिल पाती है। जिसकी वजह से किसानों को कई-कई दिन एटीएम ठीक होने का इंतजार करना पड़ता है। तो कई बार यहां आकर दिनभर भूखे-प्यासे यहां पर एटीएम ठीक होने का इंतजार करते नजर आते हैं। क्योंकि किसान यह राशि दूसरी बैंकों के एटीएम से भी नहीं निकाल सकते हैं और केवल कॉ-ओपरेटिव बैंक के एटीएम से ही यह राशि मिल सकेगी। ऐसे में परेशान किसानों का कहना है कि कई बार वे एटीएम लेकर भोपालगढ़ पहुंचते हैं, तो यहां एटीएम मशीन खराब होने की वजह से उन्हें समय पर ऋण राशि नहीं मिल पाती है। जबकि मशीन ठीक होने पर किसानों की भीड़ लग जाती है और उनकी बारी बड़ी मुश्किल से आती है। गुरुवार को भी इस एटीएम के बाहर दिनभर क्षेत्र के गांवों से आए दर्जनों किसान पैसे लेने के लिए अपने एटीएम लिए एटीएम मशीन पर बारी आने का इंतजार करते नजर आए।
लघु किसानों की हालत खराब
एक ओर जहां किसानों को अपनी ऋण राशि एटीएम के माध्यम से निकालने के लिए खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर लघु श्रेणी के किसानों को तो इससे भी अधिक परेशानियां झेलनी पड़ रही है। क्योंकि इस श्रेणी के किसानों को एटीएम से रोजाना अधिकतम 10 हजार की राशि निकालने की ही छूट है। ऐसे में औसतन 50 हजार का ऋण लेने वाले किसानों को अपनी पूरी ऋण राशि प्राप्त करने के लिए 5 बार अपने गांव से भोपालगढ़ स्थित एटीएम तक के चक्कर काटने पड़ेंगें। उसके बाद भी इन किसानों को एटीएम सही स्थिति में मिल जाए, इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है।
अनपढ़ हाथों में थमाए एटीएम
ग्रामीण इलाकों में सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण लेने वाले अधिकांश किसान अनपढ़ हैं और उन्हें कॉ-ओपरेटिव बैंक ने एटीएम तो थमा दिए हैं, लेकिन ज्यादातर किसानों को एटीएम से पैसे निकालने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। जिसके चलते किसानों को यहां पैसे निकालने के लिए दूसरे लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है और इस वजह से उन्हें किसी जालसाजी का शिकार होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। वहीं कई किसान यहां पहुंचते ही अपना कार्ड एटीएम मशीन में फंसाकर इधर-उधर बटन लगाने लग जाते हैं और कई बार जब उन्हें पता चलता है, कि एटीएम मशीन खराब है, तब वे अपना माथा पीट कर रह जाते हैं।
शीघ्र ठीक करवाएंगे
विभागीय आदेशानुसार किसानों के ऋण राशि का भुगतान इस बार एटीएम से ही किया जा रहा है। इसके लिए कॉ-ओपरेटिव बैंक के एटीएम में कई बार तकनीकी खराबी आने पर इसे ठीक करने के लिए हाथोंहाथ उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया जाता है। हमारा प्रयास रहता है, कि किसानों को कोई तकलीफ नहीं हो और यहां आने वाले किसान समय पर राशि निकाल सके। - सीताराम जलवानिया, व्यवस्थापक, कॉपरेटिव बैंक भोपालगढ़