जोधपुर

जोधपुर व्यवसायी का मर्डर था सोचा समझा षड्यंत्र, यूं पुलिस के हाथ लगी सूचना

रंगदारी के लिए मोबाइल व्यवसायी की गोली मारकर हत्या प्रकरण  
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Updated: 1 Oct 2017, 5:33 PM IST
2 more accused arrested in business murder case
2 more accused arrested in business murder case

रंगदारी वसूलने के लिए मोबाइल व्यवसायी की सरदारपुरा सी रोड पर शोरूम के बाहर गोली मारना सोचा समझा षड्यंत्र था। गोली मारने वाला युवक चौदह दिन बाद भी गिरफ्त से दूर है। हालांकि पुलिस ने वारदात से पहले रैकी व वारदात के बाद फरारी के दौरान आरोपियों को शरण देने वाले दो युवकों को शनिवार को गिरफ्तार किया। शरण देने वाला युवक मुख्य शूटर का भाई है और गांव में निजी स्कूल संचालक है।

पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ ने बताया कि व्यवसायी वासुदेव इसरानी की हत्या के प्रकरण में सूरसागर भोजावतों का बास निवासी हरीश (24) पुत्र मदनलाल प्रजापत और लोहावट थानान्तर्गत भीमसागर गांव निवासी पूनमचंद (28) पुत्र हजारीराम विश्नोई को गिरफ्तार किया गया है। वारदात के बाद से फरार हरीश के शनिवार को सूरसागर चोपड़ आने की सूचना मिली थी। जिस पर सरदारपुरा थानाधिकारी भूपेन्द्र सिंह व सूरसागर थानाधिकारी प्रदीप डांगा की टीम ने उसे दबोच लिया। जबकि भीमसागर गांव में निजी विद्यालय संचालक पूनमचंद को गांव से हिरासत में लिया गया था। इससे पूर्व विनोद प्रजापत के अलावा शरण देने वाला पवन सोलंकी गिरफ्तार हो चुके हैं।

हेलमेट व बाइक देकर भेजा गोली मारने


पुलिस का कहना है कि गत 17 सितम्बर की रात आठ बजे हरीश प्रजापत खुद की मोटरसाइकिल पर शूटर भोमाराम को लेकर वासुदेव के घर व दुकान के आस-पास रैकी करने पहुंचा था। घर की रैकी करने के बाद वे शोरूम आ पहुंचे, जहां ठीक सामने इंतजार करने लगे। रात 10.54 बजे जब वासु दुकान ड्योढ़ी करवा रहा था। तब मौका पाकर हरीश ने अपना हेलमेट विनोद प्रजापत को दिया अैर भोमाराम को फायर करने के लिए भेज दिया। विनोद ने मोटरसाइकिल चलाई थी। वासु को गोली मारने के बाद दोनों निकल गए थे। रैकी करने वाले दोनों के पीछे-पीछे रवाना हो गए थे। विनोद प्रजापत को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

गांव में शूटर के भाई ने ठहराया था घर

हत्याकाण्ड के चौदह दिन बाद भी मुख्य शूटर भोमाराम विश्नोई गिरफ्तार नहीं हुआ है। जबकि उसके भाई पूनमचंद पुत्र हजारीराम विश्नोई को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वारदात की रात भोमाराम व अन्य आरोपी भीमसागर गए थे, जहां उसके भाई पूनमचंद ने उनको रात रुकवाया था। दूसरे दिन सुबह सभी को जोधपुर से बाहर भेज दिया था। वह गांव में स्कूल चलाता है।

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