आसाराम मामलें की अंतिम बहस में बचाव पक्ष की दलीलें अभी भी अधूरी,16 नवम्बर से होगी फिर शुरू
नाबालिग से यौन दुराचार से जुड़े आसाराम प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से शुक्रवार को हुई छठी अंतिम बहस भी अधूरी रही। अनुसूचित जाति जनजाति मामलों की अदालत के विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा की अदालत में चल रहे इस मामले में बचाव पक्ष 26 अक्टूबर से अंतिम बहस कर रहा है। सभी छह बहसों में आसाराम के अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा की बहस मुख्य रूप से एफआईआर, आश्रम के कर्मचारियों व पीडि़ता की सहेली सहित विभिन्न गवाहों के दिए गए बयानों के इर्दगिर्द रही।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में बचाव पक्ष ने अभियोजन की ओर से बनाई गई एक महत्वपूर्ण गवाह मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा़ स्थित आश्रम की रजिस्ट्रार नेहा तोतवानी ने पूर्व में दर्ज बयानों पर बहस की। साथ ही बचाव पक्ष के एक अन्य गवाह विवेक शर्मा के उस बयान का जिक्र किया। अभियोजन पक्ष के ये दो गवाह, जो छिंदवाड़ा के स्कूल प्रिसिंपल व रजिस्ट्रार हैं, उनसे सम्बंधित बयानों को बताते हुए कहा कि कहीं पर भी भूत प्रेत के साये जैसी बात नहीं थी, लेकिन अभियोजन की कहानी में भूत प्रेत का साया बताया गया, जिसके उपचार के लिए वे जोधपुर आए थे। एफआईआर में भी यह बात नही थी। यही नहीं, 164 के बयानो में भी ऐसा कुछ नही था, इसलिए पूरी कहानी ही मैनेज है।
करीब डेढ़ घंटे तक चली अंतिम बहस समय अभाव के कारण अधूरी रही। वहीं 16 नवम्बर को इस मामले की फिर सुनवाई होगी। वहीं आसाराम के खिलाफ आईटी एक्ट मामले में शुक्रवार को अपर महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन मदनसिंह चौधरी के समक्ष सुनवाई होनी थी, लेकिन उनके अवकाश के चलते सुनवाई टाल दी गई। अब आईटी एक्ट मामले में 24 नवम्बर को सुनवाई होगी।
दिया लव जिहाद पर बयान
आसाराम ने गुरुवार को कोर्ट में अंतिम बहस की सुनवाई के लिए जाते समय मीडिया ने उनकी लव जिहाद व धर्म परिवर्तन के मामलों के बारे में राय जाननी चाही तो उसने कहा कि मेरे को यहां पहुंचाने में भी उनका ही हाथ है। उन लोगों की वजह से ही आज मैं जेल में हूं। हालांकि सम्प्रदाय विशेष के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, मैं किसी का नाम नहीं लेता हूं। सब जानते हैं। ये लोग खूब पैसा लुटाते हैं। मेरा तो यह कहना है कि सबका भला सबका मंगल हो।