इंडिया बुलियन एण्ड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव ने ज्वैलर्स को दी जानकारी
वर्तमान में सरकार सोने पर 10800 करोड़ की सब्सिडी दे रही है, जो रेलवे को दी जा रही सब्सिडी से ज्यादा है। सरकार सोने की दरों पर नियंत्रण करना चाहती है, इसलिए हो सकता है आने वाले समय मे कस्टम ड्यूटी कम कर दे और जीएसटी की दर बढ़ा दे। यह बात इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेन्द्र मेहता ने कही। उन्होंने बताया कि सरकार सोच रही है और संभवत: आने वाले 6 माह में सोने पर कस्टम ड्यूटी को 10 की जगह 6 प्रतिशत और जीएसटी को 3 की जगह 5 प्रतिशत कर दे।
सरकार तक पहुंचा रहे समस्या
मेहता ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से देश के 6 लाख ज्वैलर्स और करीब 55 लाख कारीगरों की जीएसटी संबंधित समस्याएं सरकार तक पहुंचाई जा रही हैं और प्रयास किए जा रहे हैं कि जीएसटी प्रावधानों में सरलीकरण हो।
सेमिनार में दी जानकारी
जोधपुर ज्वैलर्स एसोसिएशन और एमसीएक्स की ओर से मंगलवार को एक होटल में जीएसटी व एमसीएक्स जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। एसोसिएशन सचिव नवीन सोनी ने बताया कि सेमिनार में मुख्य वक्ता इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेन्द्र मेहता ने जीएसटी के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी। मेहता ने बताया कि ज्वैलर्स को अब नये नियमों के तहत टेक्नोलॉजी अपनाते हुए आगे बढऩा होगा। उन्होंने ज्वैलरी बेचते समय ग्राहकों से किस प्रकार जीएसटी लेना है, मेकिंग चार्ज आदि के बारे में जानकारी दी। साथ ही, ज्वैलर्स की जिज्ञासा शांत की। सेमिनार में एमसीएक्स के नितिन केडिया ने विचार रखे। सेमिनार में एसोसिएशन के पदमचंद कांकरिया, सर्राफा एसोसिएशन के शिवनारायण अग्रवाल, रमेश दुधिया, चंद्रवीर सोनी, महावीर भण्डारी व दिलीप सोनी सहित कई ज्वैलर्स उपस्थित थे। अंत में एसोसिएशन सचिव नवीन सोनी ने आभार जताया।
वहीं जोधपुर के हैण्डी क्राफ्ट उद्योग के लिए नोटबंदी, सरकार की नीतियों और अब जीएसटी ने कोढ़ में खाज का काम किया है। इसका असर हैण्डीक्राफ्ट के निर्यात और विदेशी मुद्रा की आय पर भी पड़ा है। पिछले कुछ महीने में हर महीने औसतन पचास करोड़ की विदेशी आय का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात कम हो गया है। जीएसटी से पहले जहां जोधपुर से हैण्डीक्राफ्ट का 135 से 150 करोड़ का निर्यात हर महीने हो रहा था, वहीं अब यह 80 से 100 करोड़ प्रतिमाह पर आ गया है।