
उन्होंने अदालत को बताया कि चश्मदीद गवाह पूनमचंद के बताने पर स्थानीय निवासी भैराराम ने 1 व 2 अक्टूबर 1998 की रात्रि में शिकारी सलमान और अन्य को जिप्सी तेज रफ्तार से दौड़ते हुए देखा था। शिकारी जिप्सी को कच्चे रास्ते से चलाकर हाईवे की ओर ले गया। गवाह ने यह भी बताया था कि जिप्सी में सलमान के पास अभिनेता सैफ अली खान तथा पीछे की सीट पर अभिनेत्री नीलम, सोनाली तथा तब्बू तथा एक अन्य व्यक्ति बैठा था।
समय आभाव के कारण बहस अधूरी रही। सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत, सैफ, नीलम तथा सोनाली के अधिवक्ता केके व्यास तथा तब्बू के अधिवक्ता मनीष सिसोदिया आदि न्यायालय में उपस्थित रहे। मामले की मंगलवार को फिर सुनवाई होगी।
इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला देवकुमार खत्री की अदालत में पिछले सोमवार को कांकाणी हिरण शिकार मामले के मुख्य आरोपी अभिनेता सलमान खान तथा सह अभियुक्त सेफ अली खान, सोनाली बेंद्रे, नीलम तथा तब्बू के विरुद्ध अंतिम सुनवाई जारी रही। इस दौरान अभियोजन अधिकारी भवानी सिंह ने अपनी अधूरी रही बहस को आगे बढ़ाया।
उन्होंने 19 वर्ष पूर्व हुए इस मामले के चश्मदीद गवाह पूनमचंद तथा छोगालाल के सभी बयानों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों गवाहों के अलावा मांगीलाल तथा शेराराम के मुख्य परीक्षण के बयान अब तक खण्डित नहीं हुए हैं। चारों चश्मदीद गवाहों ने सलमान तथा अन्य आरोपियो को जिप्सी नम्बर आरजे 19 पी 2201 में भागते हुए देखा था। अभियोजन अधिकारी ने घटना से सम्बधित अन्य साक्ष्य पर भी बहस की। करीब दो घंटे चली बहस समय अभाव के कारण अधूरी रही। अभियोजन की ओर से मंगलवार को बहस जारी रहेगी। बहस के दौरान सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत समेत अन्य आरोपियों के अधिवक्ता एवं विश्नोई समाज की ओर से अधिवक्ता महिपालसिंह विश्नोई उपस्थित थे।
हिरण के पैर में लगी थी गोली
अभियोजन अधिकारी भवानीसिंह ने अपनी बहस के दौरान कहा कि अनुसंधान अधिकारी ने सूचना मिलने पर एक वनकर्मी व डॉ. नेपालिया को लेकर मौके पर पहुंचे तो वहां एक हिरण के पैर में गोली लगी थी । वहीं दूसरे हिरण के गले में गोली लगी हुई थी। मौके पर फर्द तैयार कर दोनों हिरण कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद दोनों हिरणों को गड्ढा खोद कर वहीं पर दफन किया गया और निगरानी के लिए प्रहलादराम को नियुक्त किया गया। मौके पर उस वक्त गवाह पूनमचंद व छोगाराम, सागरराम भी मौजूद थे, जिनके फर्द व जब्ती पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। उसके बाद गवाहों की बताई गई जिप्सी के नम्बर की जांच के लिए आरटीओ को पत्र लिखा गया था। वहां से यह पता चला कि इस जिप्सी का मालिक अरुण यादव है।