पुलिस के खुफिया तंत्र को गच्चा देता रहा शातिर अपराधी हरेन्द्र
जावै बन में, निकळै छन में। यह कहावत जोधपुर पुलिस के लिए चुनौती बने हरेन्द्र उर्फ हीरा जाट पर सटीक नजर आती है। पुलिस व एसओजी पंजाब-हरियाणा के साथ राज्य के कई जिलों और उत्तराखण्ड तक में उसकी तलाश करती रही। जगह जगह छापे मारे गए, लेकिन हरेन्द्र पकड़ में नहीं आया। आखिरकार हीरा व लॉरेंस का भाई अनमोल गुजरात की राजधानी गांधी नगर में पुलिस के हाथ आए।
कई दिन से था गुजरात की राजधानी में
देश व दुनिया में सात महीने से किरकिरी करवा रही जोधपुर पुलिस के लिए हरेन्द्र चुनौती बना रहा। सात माह से अधिक समय तक पुलिस उसके पास तक नहीं पहुंच पाई और वह बार-बार गोलियां चलाकर दहशत फैलाता रहा। वह कई दिनों से गुजरात की राजधानी गांधीनगर व आस-पास के क्षेत्रों में छिपा हुआ था। इधर, जोधपुर पुलिस पंजाब-हरियाणा के साथ राजस्थान के कई जिलों खाक छानती रही। पुलिस को अंदेशा है कि वह गांधीनगर की आनंद विहार सोसायटी में किसी फ्लैट में रह रहा था। हालांकि उसे व उसके साथी अनमोल को सोसायटी के बाहर दबोचा गया।
शातिर इतना कि साथियों को भी नहीं थी भनक
अवैध वसूली के लिए फायरिंग करके दहशत फैलाने के मामले में पुलिस अब तक लॉरेंस विश्नोई व उसके कई गुर्गों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनसे हरेन्द्र व काली जाट के बारे में सख्त पूछताछ की गई, लेकिन कोई भी उसके बारे में सूचना नहीं दे पाया था।
मां के साथ कई महीने जोधपुर में रहा अनमोल
सूत्रों की मानें तो पंजाब में गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई के कारण उसके परिवार को जान का खतरा उत्पन्न होने लगा था। ऐसे में उसकी मां व भाई अनमोल जोधपुर आकर किराए के मकान में रहने लगे थे। दोनों कई दिन तक आबूरोड भी रहे थे। जोधपुर में रहने के दौरान ही लॉरेंस के कुछ गुर्गे जोधपुर जेल में बंद रहे थे। पुलिस को अंदेशा है कि रंगदारी के लिए गोलियां चलाने में अनमोल की भूमिका हो सकती है।
सहपाठी से कड़ी पूछताछ
पुलिस ने हरेन्द्र तक पहुंचने के लिए हर प्रकार से हाथ-पांव मारे। हरेन्द्र के पुराने मित्रों से लेकर उसके साथ पढऩे वालों तक से पूछताछ की। सेतरावा निवासी गोपाल सिंह भी हरेन्द्र का सहपाठी व मित्र रह चुका है। इसे पुलिस ने कई दिन से पकड़ रखा है। पुलिस उससे हरेन्द्र का सुराग उगलवाने के साथ ही हथियार बरामद करने का प्रयास में थी।