गरीबी के हालात से इस कदर टूट गया कि फिर लिंग- परिवर्तन करा युवक बन गया किन्नर
कानपुर देहात. ऐसे तो सूबे की सत्ता बदलती रहती है और नई-नई सरकार गरीबों को लाभान्वित करने की तमाम योजनाओं का गुणगान करते रहते है। जिससे गरीबों के स्तर में सुधार हो सके और देश गरीबी से निकलकर उत्थान कर सके लेकिन आज भी देश में जहां गरीबी से जूझते कई लोग दिन भर मजदूरी करके परिवार का गुजर बसर करते है। लेकिन कानपुर देहात में एक ऐसा मामला सामने आया। जहां एक युवक ने बूढ़ी मां और अपने बीवी बच्चों का पेट पालने के लिए लिंग- परिवर्तन करा लिया। किन्नरों की समिति के साथ सम्मिलित होकर कार्यक्रमों में जाकर मांगकर अपना गुजारा करने लगा। क्योकि बचपन में ही पिता की मौत के बाद युवक के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ पड़ी। आखिर मजदूरी करके उस दिहाड़ी से परिवार का गुजारा होता भी तो कैसे थक हारकर उसने-लिंग परिवर्तन करा लिया और आज किन्नर समिति के साथ सम्मिलित हो गया।
पिता ने भी उठाई मुसीबत और ठगी का शिकार हुए
हरजीत ने बताया कि उस समय पिता सीमांत किसान के रूप में खेती बाड़ी करके परिवार पाल रहे थे। हम लोग भी छोटे छोटे थे। घर कच्चा और छोटा भी था। गांव के ही एक शिक्षक मेहंदी हसन ने पिता को आवास व सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने का प्रलोभन देकर अपने झांसे में ले लिया। अपने परिवार व बच्चों को सुख सुविधाएं देने की लालसा में पिता शिक्षक से आनस लगाते रहे। फिर एक दिन शिक्षक ने धोखाधड़ी कर पिता की उस जमीन का बैनामा करा अपने नाम कर ली। अब पिता के हाथ खाली थे। एक तरफ हाथ से गयी जमीन और दूसरी तरफ परिवार का भार देख पिताजी टूट चुके थे।
बचपन में हो गया पिता का निधन
मामला विकास खंड रसूलाबाद के असालतगंज के चौबेपुर का है, जहां गरीबी से कराह रहा किन्नर हरजीत का परिवार रहता है। पिता की मौत होने के बाद मां जगरानी ने जैसे तैसे मजदूरी कर नन्हे मुन्ने बच्चों का पालन पोषण तो किया लेकिन हालात कुछ यूं थे कि कभी मां भूखी सोई तो कभी बच्चे। फिर भी उसने दोगुनी मेहनत करके बच्चों को पाल पोसकर बड़ा किया। जब पुत्र हरजीत बड़ा हुआ तो बड़ा परिवार देख उसने भी मजदूरी का दामन थाम लिया, लेकिन उसकी शादी के बाद जब बच्चे जन्मे तो परिवार का बोझ उसके कंधे पर बढ़ गया। एक तरफ मां की खुशी की चाहत तो दूसरी तरफ बीवी बच्चों के पेट पालने का बोझ उसके कंधे को कमजोर करने लगा। धन का अभाव और कमाई के संसाधन न होने से उसने ठान लिया।
फिर करा लिया लिंग-परिवर्तन और बन गया किन्नर
भूंखे पेट की सिलवटें मां और बच्चों के चेहरे पर देख हरजीत अब किन्नर बनने का फैसला ले चुका था। हालांकि मां को जब जानकारी हुई तो रोकने का प्रयास किया लेकिन हरजीत को बार-बार भूखे पेट की कर्राहट सुनाई देती थी। अब उसका अगला कदम बढ़ चुका था। उसने असालतगंज किन्नर समिति के साथ उठना बैठना शुरू किया और फिर हरजीत लिंग- परिवर्तन कराकर किन्नर समिति में शामिल हो गया और शादी, विवाह व अन्य कार्यक्रमों में अपनी टीम के साथ जाकर कमाने खाने लगा और परिवार का गुजारा करने लगा। आज हरजीत किन्नर दाने दाने को मोहताज तो नहीं है लेकिन गरीबी के भंवर से अभी तक उबर नही पाया है।
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