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Kanpur News:स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर ब्रेक: 7.70 लाख उपभोक्ताओं को राहत, लोगों ने कहा—अब मिली असली सुकून की सांस

Smart Prepaid Meter Ban:कानपुर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था पर रोक से 7.70 लाख उपभोक्ताओं को राहत मिली। अनियमित बिलिंग और तकनीकी दिक्कतों से परेशान लोग लंबे समय से विरोध कर रहे थे। अब पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

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सांकेतिक फोटो

कानपुर में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर चल रहा विवाद अब थमता नजर आ रहा है। सरकार ने इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है, जिससे करीब 7.70 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से अनियमित बिलिंग, तकनीकी खामियों और बार-बार रिचार्ज की झंझट से परेशान लोग लगातार विरोध कर रहे थे। शहर के कई इलाकों में उपभोक्ताओं ने प्रदर्शन भी किए थे। इस फैसले के बाद अब लोगों में संतोष का माहौल है और वे इसे अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं।

कितने उपभोक्ता और क्या थी समस्या

कानपुर में अब तक लगभग 1.41 लाख घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके थे। इसके अलावा 6.44 लाख से अधिक घरेलू और 98 हजार से ज्यादा कमर्शियल कनेक्शन इस व्यवस्था से जुड़े थे। उपभोक्ताओं का कहना था कि मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी रहती थी और वास्तविक खपत से अधिक बिल बनता था। कई लोगों ने यह भी शिकायत की कि अचानक बैलेंस खत्म होने से बिजली कट जाती थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी और आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा था।

विरोध के बाद सरकार का फैसला

स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते विरोध ने सरकार को बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया। कई जगहों पर उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव किया और ज्ञापन सौंपे। यह मुद्दा यूपी विद्युत नियामक आयोग की बैठक में भी जोर-शोर से उठा, जहां उपभोक्ताओं और व्यापारियों ने अपनी समस्याएं रखीं। लगातार मिल रही शिकायतों और जनदबाव के चलते सरकार ने फिलहाल इस व्यवस्था पर रोक लगाने का निर्णय लिया, जिसे लोगों ने राहत भरा कदम बताया।

करोड़ों खर्च के बावजूद उठे सवाल

स्मार्ट मीटर परियोजना को लागू करने के लिए कानपुर में करीब 328.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके तहत बड़े स्तर पर मीटर लगाने का काम किया गया। लेकिन तकनीकी खामियों और उपभोक्ताओं की असंतुष्टि ने इस योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का कहना था कि इतनी बड़ी लागत के बावजूद अगर व्यवस्था सही से काम नहीं कर रही है, तो यह आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। अब सरकार के फैसले के बाद इस खर्च पर भी बहस तेज हो गई है।

अब आगे क्या होगा

सरकार के फैसले के बाद जिन घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं, उन्हें फिलहाल पोस्टपेड सिस्टम की तरह संचालित किया जाएगा। यानी उपभोक्ताओं को अब पहले की तरह मासिक बिल मिलेगा और उन्हें बार-बार रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं होगी। इससे लोगों को तत्काल राहत मिलेगी। साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में तकनीकी सुधार के बाद इस योजना को फिर से लागू किया जा सकता है, ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर और पारदर्शी सेवा मिल सके।

क्या कहते हैं लोग

इस फैसले के बाद शहर के अलग-अलग इलाकों के लोगों ने राहत जताई है। काकादेव निवासी राजेश ने कहा, “स्मार्ट मीटर के बाद हर महीने बिल समझ से बाहर हो गया था, अब जाकर राहत मिली है।” गोविंद नगर की सुनीता देवी बोलीं, “कम बिजली इस्तेमाल करने के बावजूद ज्यादा पैसे कट रहे थे, यह फैसला सही है।” बर्रा के अमित गुप्ता ने कहा, “बार-बार रिचार्ज कराने से बहुत परेशानी होती थी, अब सिस्टम आसान होगा।” कल्याणपुर के इमरान का कहना है, “तकनीकी दिक्कतों की वजह से कई बार बिना वजह बिजली कट जाती थी।” वहीं रावतपुर के व्यापारी संजय तिवारी बोले, “अनिश्चित बिलिंग से कारोबार प्रभावित हो रहा था, अब स्थिति सुधरेगी। लोगों का मानना है कि यह फैसला आम उपभोक्ताओं के हित में है और इससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।