
कानपुर । आजादी के बाद अधिकतर समय देश की सत्ता पर एक ही परिवार को कब्जा रहा। 2014 में एक चायवाले ने इन्हें चुनावी अखाड़े में पटखनी दे दी, जिसके कारण परिवार पीएम मोदी से रार कर बैठा। इसी के कारण उप पर आएदिन नए-नए आरोप लगाते रहते हैं, पर जनता उनकी बातों पर आने के बजाए पीएम के साथ खड़ी रही। अब राजनीतिक दलों के नेता संवैधानिक संस्थायों पर सवालिया निशान लगाते हुए मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जो सरासर गलत है। ईवीएम के बाद अब देश की दूसरी बड़ी संस्था न्यायपालिका को राजनेता बदनाम करने पर तुले हैं और सुपी्रमकोर्ट के मुख्यन्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाकर षणयंच रचा है। यह बात पत्रिका डॉट कॉम के साथ खास बातचीत के दौरान यूपी के सीएम व कानपुर की मेयर प्रमिला पांडेय ने कही। कहा कि राजनेताओं को संवैधानिक संसथानों को सियासत से दूर रखना चाहिए, जिससे लोगों का विश्वास इन पर बना रहे।
इन दलों ने महाभियोग लाए जाने की मांग
कांग्रेस के नेतृत्व में सात विपक्षी दलों ने गुरुवार (20 अप्रैल) को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर ‘गलत आचरण’ का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग का नोटिस दिया और कहा कि ‘संविधान और न्यायपालिका की रक्षा’ के लिए उनको ‘भारी मन से’ यह कदम उठाना पड़ा है। महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 71 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं जिनमें सात सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। महाभियोग के नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कांग्रेस, राकांपा, माकपा, भाकपा, सपा, बसपा और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सदस्य शामिल हैं। सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर 71 सांसदों ने हस्ताक्षर किया है, लेकिन उनमें से 7 रिटायर हो गए हैं, जिसकी वजह से यह संख्या घटकर अब 64 हो गई है। कांग्रेस के नेताओं ने उपराष्ट्रपति से मिलकर बताया है कि महाभियोग लाने के लिए जितनी संख्या चाहिए होती है, हमारे पास उससे ज्यादा। लेकिन सोमवार को उपराष्ट्रपति ने विपक्ष के महाभियोग को रिटेक्ट कर दिया। जिससे सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरिप्राकश अग्निहोत्रीने कहा कि विपक्ष की मांग जायज थी और उपराष्ट्रपति को अपने विवके से इस पर मंथन करना चाहिए, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।
मुख्यन्यायाधीश पर यह आरोप लगाए
विपक्षी दलों का पहला आरोप प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट से संबंधित हैं। दूसरा आरोप उस रिट याचिका को प्रधान न्यायाधीश द्वारा देखे जाने के प्रशासनिक और न्यायिक पहलू के संदर्भ में है जो प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के मामले में जांच की मांग करते हुए दायर की गई थी। कांग्रेस और दूसरे दलों का तीसरा आरोप भी इसी मामले से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि यह परंपरा रही है कि जब प्रधान न्यायाधीश संविधान पीठ में होते हैं तो किसी मामले को शीर्ष अदालत के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश के पास भेजा जाता है। इस मामले में ऐसा नहीं करने दिया गया। प्रधान न्यायाधीश पर चौथा आरोप गलत हलफनामा देकर जमीन हासिल करने का लगाया है। पांचवा आरोप है कि प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय में कुछ महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मामलों को विभिन्न पीठ को आवंटित करने में अपने पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग किया। विपक्ष के प्रधान न्यायाधीश पर लगे आरोप पर मेयर प्रमिला पांडेय ने इसे कांग्रेस की हताशा भरा कदम बताया। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का अस्तित्व देश की जनता ने खत्म कर दिया और 2019 में भी उन्हें करारी हार उठानी पड़ेगी। इसी के कारण वह अब संवधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं, जो निदंनीय है।
उपराष्ट्रपति ने नोटिस को ठुकराया
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ दिए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार (23 अप्रैल) को ठुकरा दिया है। इसी के बाद दिल्ली से लेकर कानुपर तक सियायत गर्म हो गई है। कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरिप्राकश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश पर महाभियोग लाना ठीक था। क्योंकि ऐसे कई निर्णय उन्होंने दिए जिन पर लोगों को संदेह है। नगर अध्यक्ष के आरोप पर कारार वार कर करती हुई मेयर प्रमिला पांडेय ने कहा कि कांग्रेस ने देश के गर्त में धकेल दिया। पीएम मोदी देश को विकास के पथ पर ले जा रहे हैं और उनके हर फैसले के साथ जनता-जर्नादन कदम से कदम मिलाकर चल रही है। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए, ईवीएम पर सवाल खड़े किए, जो सारे गलत निकले। कांग्रेस को सत्ता चाहिए, इसी के चलते वह हर हथकंडा अपना रही है, जो संविधान के विपरीत है। कांग्रेस चाहे जितने हाथ पैर मार ले, लेकिन 2019 में पीएम मोदी फिर से देश की सत्ता संभालेंगे। मेयर ने बताया कि संसद से लेकर कानपुर सदन तक में कांग्रेस और उनके साथी दल जनता के विकास के कार्य में आएदिन बाधा डालते रहते हैं। न तो वह कार्य करते और न ही हमें काम करने देते।