शहर की हर गली हर सड़क पर मौजूद अतिक्रमण विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से पूरी तरह से फल-फूल रहे हैं. इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री संदर्भ में भी आने वाली अतिक्रमण की शिकायतें अधिकारियों के ढुलमुल रवैये की वजह से महीनों से पेंडिंग पड़ी हैं.
कानपुर। शहर की हर गली हर सड़क पर मौजूद अतिक्रमण विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से पूरी तरह से फल-फूल रहे हैं. इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री संदर्भ में भी आने वाली अतिक्रमण की शिकायतें अधिकारियों के ढुलमुल रवैये की वजह से महीनों से पेंडिंग पड़ी हैं. इससे शहर में अतिक्रमण अपने पांव पसारता जा रहा है. पिछले दिनों नगर आयुक्त ने भी जोनल अधिकारियों की इस लापरवाही से खफ़ा होकर शिकायतों के निस्तारण तक लापरवाह अधिकारियों का वेतन रोक दिया था, लेकिन अब फिर से वही हालात बन गए हैं. ऐसी 52 शिकायतें या तो पेंडिंग हैं या फिर डिफॉल्टर हो चुकी हैं, जबकि आईजीआरएस पोर्टल में 534 शिकायतें लंबित पड़ी हैं.
ये हैं जिम्मेदार
नगर निगम नियमों की मानें तो जोनल अधिकारी ही अतिक्रमण हटाने के लिए जिम्मेदार हैं. उनकी अध्यक्षता में ही स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण तोड़ने का कार्य होना चाहिए. वहीं नियमों की अनदेखी कर शिकायत निस्तारण में अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं और एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं. बता दें कि शहर में लगभग 5 लाख से ज्यादा अस्थाई और स्थाई अतिक्रमण होंगे.
ऐसा है अधिकार
शहर में ऐसे अतिक्रमण जो अस्थाई हैं और कॉमर्शियल एक्टिविटी करते हैं. उनको हटाने का अधिकार रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पास है, लेकिन एक भी कार्रवाई नहीं की जाती है. विजय नगर चौराहे पर फल मंडी और सब्जी मंडी पिछले कई सालों से चल रही है, लेकिन खानापूर्ति के लिए छुटपुट कार्यवाही कर दी जाती है. यही नहीं अवैध पार्किंग, अवैध गुमटी को भी हटाने का अधिकार इनके पास है.
किया गया था संशोधन
अतिक्रमण को लेकर 2012 और 2015 में नगर निगम अधिनियम में संसोधन किया गया था. इसके मुताबिक नगर निगम की ओर से संबंधित क्षेत्र में एक बार अस्थाई व स्थाई अवैध अतिक्रमण तोड़े जाने के बाद क्षेत्र के थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी बनती है. दोबारा वहां अतिक्रमण होता है तो एसओ को वहां से अतिक्रमण साफ कराना होगा, लेकिन न तो नगर निगम और न ही पुलिस इस मामले में कोई कार्यवाही करती है.