महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए आगे आया यह संगठन, अगस्त में खुल जाएगा कोर्ट
कानपुर। महिलाओं को उनके अधिकारों को दिलाने के लिए कानपुर में पहली महिला शरियत अदालत खोलने का निर्णय लिया गया है। ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल और मुस्लिम ख्वातीन बोर्ड ने इस पर मुंहर लगा दी है। इसमें महिला मुफ्ती मशविरा और फतवें देंगी। ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने बताया कि महिला उत्पीड़न रोकने के लिए हमसब ने इस कोर्ट के बनाए जाने के लिए बैठक की और सर्वसम्मपति से तय किया गया कि महिलाओं के जो भी मामले होंगे, उस पर महिला शरियत कोर्ट सुनवाई करेगा।
इस संगठन ने की पहल
मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन माना जाने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने देशभर में शरियत कोर्ट के गठन का फैसला किया है, जिसकी अहम बैठक 15 जुलाई को दिल्ली में होगी। बैठक के दौरान हर जिले में शरीयत कोर्ट का गठन करने की रूपरेखा तय की जाएगी। वहीं कानपुर में महिला ’शरई कोर्ट’ खोलने का निर्णय महिला शहरकाजियों को बनाने वाली संस्था ख्वॉतीन बोर्ड ने मंगलवार को किया। इस कोर्ट में निकाह-तलाक और विरासत के मामलों पर सुनवाई होगी। इस कोर्ट में सिर्फ महिलाएं ही आवेदन कर सकेंगी। आमतौर पर माना जाता है कि मुस्लिम महिलाएं अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाती हैं। मर्द काजी और मुफ्ती होने की वजह से उनकी बात आधी-अधूरी रह जाती है। महिला शरई कोर्ट में ये महिलाएं अपना पक्ष ठीक ढंग से रख सकेंगी और उन्हें बिना भेदभाव के न्याय मिलेगा।
ख्वातीनों को पैनल में किया जाएगा शामिल
ऑल इंडिया सुन्नी उलमा काउंसिल के महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने बताया कि अगले सप्ताह तक महिला ’शरई कोर्ट’ का पूरा खाका तैयार हो जाएगा। इसमें पहली महिला शहर काजी और शरीयत में अच्छा दखल रखने वाली ख्वातीनों को भी पैनल में शामिल किया जाएगा। वहीं इसकी नींव रखने वाले इसे लेकर किसी भी तरह के विवाद को बेवजह बताते हैं। महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ देशभर की मुस्लिम महिलाओं ने विरोध दर्ज कराया था। त्रिपल तलाक, हलाला सहित अन्य मुददों को लेकर वो कोर्ट में गई। अगर बोर्ड सही तरीके से कार्य करता तो सरकार व अन्य संस्थाओं को आगे नहीं आना पड़ता। महिला शरियत कोर्ट के गठन के बाद महिलाएं ही महिलाओं का न्याय करेंगी और आरोपी पुरूष को सजा देंगी। अगर मामला यहां हल नहीं हुआ तो पीड़ित महिला पुलिस, कोर्ट जा कसती है।
महिलाओं ने कहा सराहनीय कदम
शहर में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं ने भी ऐसी महिला शरई अदालत के बनाए जाने का स्वागत किया है..उनका कहना है कि इससे इन लोगों के अधिकार में बढ़ोत्तरी ही होगी। नवाबगंज निवासी सलमा जो पेशे से टीचर हैं और पतिओं से पीड़ित महिलाओं के पक्ष में खड़ी रहती हैं ने कहा कि यह कदम स्वागत योग्य है। महिला शरियत कोर्ट में पीड़ित महिलाएं जाएंगी और उन्हें सही न्याय मिलगा। फिलहाल महिला शरई अदालत का खाका तैयार है..लेकिन इसके अस्तित्व में आने के बाद विवाद भी संभव है। कुछ मौलवियों ने दबी जबान इसकी अभी से खिलाफत भी शुरू कर दी है। मौलमी असनम खां कहते हैं कि भाजपा के सत्ता में आने से अब शरियत में दखल बड़ा है तो सरासर गलत है। वहीं इससे जुड़े लोगों का मानना है ऐसी अदालतें मुस्लिम महिलाओं के मसलों को लेकर ज्यादा निष्पक्षता आएगी।
एआईएमपीएलबी भी खोलेगा शरियत कोर्ट
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अहम बैठक 15 जुलाई को होगी। इस बैठक में वकीलों, न्यायाधीशों और आम लोगों को शरीयत क़ानून के फलसफ़े और तर्कों के बारे में बताए जाने वाले कार्यक्रमों का सिलसिला तेज़ करने पर विचार होगा। साथ ही हर ज़िले में शरीयत कोर्ट (दारुल-कजा) का गठन करने पर निर्णय लिया जा सकता है। इस वक्त उत्तर प्रदेश में करीब 40 दारुल-कजा हैं। कोशिश है कि हर जिले में कम से कम एक ऐसी अदालत जरूर हो। एक अदालत पर हर महीने कम से कम 50 हजार रुपये खर्च होते हैं। अब हर जिले में दारुल-कजा खोलने के लिये संसाधन जुटाने पर विचार-विमर्श होगा। कहा कि कमेटी की कई कार्यशालाओं में न्यायाधीशों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें मीडिया को भी इनमें आमंत्रित किया जाता है, ताकि वे शरीयत के मामलों को सही तरीके से जनता के बीच ला सकें। इन कार्यशालाओं में मुख्य रूप से तलाक, विरासत समेत विभिन्न मसलों के समाधान के बारे में बताया जाता है।