शहर में प्रदूषण और गंदगी से लड़ने के लिए नगर निगम ने फिर कवायद शुरू की है. अब उन सफाई कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी जो कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं. इसके लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने वाट्सएप नंबर जारी किया है.
कानपुर। शहर में प्रदूषण और गंदगी से लड़ने के लिए नगर निगम ने फिर कवायद शुरू की है. अब उन सफाई कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी जो कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं. इसके लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने वाट्सएप नंबर जारी किया है. ये नंबर है 8601805555. इस नंबर पर कोई भी व्यक्ति कूड़े के ढेर में आग लगने की फोटो खींचकर वाट्सएप कर सकते हैं. इसके अलावा मेनहोल के ढक्कन, सफाई, जलभराव आदि की शिकायत भी की जा सकेगी.
ऐसी मिली है जानकारी
पिछले दिनों कानपुर आई एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी ने शहर में गंदगी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी. इसके बाद हरकत में आए नगर निगम ने मुख्य मार्गों पर स्थित बड़े कूड़ाघरों से दिन-रात कूड़ा उठाने का फैसला किया है. नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि कूड़ाघरों को साफ करने के बाद वहां टी-पार्टी भी की जा रही है. इसे ट्रायल के तौर पर शुरू किया जा चुका है.
ऐसा लिया है फैसला
शहर के ओडीएफ होने का तमगा अब छिन जाएगा. नगर निगम ने ओडीएफ सर्टिफिकेट के रिन्यूवल के लिए अप्लाई भी नहीं किया है. इस पर डॉ. अमित ने बताया कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) ने प्रति व्यक्ति ट्वॉयलेट 90 प्रतिशत होने पर ही ओडीएफ घोषित करने का फैसला लिया है. नगर निगम 65 प्रतिशत तक इंडीविजुअल ट्वॉयलेट शहर में बना चुका है. 90 प्रतिशत पूरा होने पर फिर से ओडीएफ के लिए अप्लाई किया जाएगा.
ऐसी जताई जा सकती है उम्मींद
ऐसी कवायदों के साथ कुल मिलाकर ये उम्मींद जताई सा सकती है कि अब शहर में प्रदूषण का स्तर कुछ कम जरूर होगा. इसी के साथ लोगों के रहन-सहन का स्तर भी सुधर सकेगा. इतना ही नहीं, एक के बाद एक शहर में फैल रही बीमारियां भी कम जरूर हो सकेंगी. ऐसी कवायदों के सामने आने के बाद फिलहाल शहरवासी एक बार चैन की सांस ले सकते हैं.
एक नजर पिछले पन्नों पर
यहां एक बार फिर से याद दिला दें कि पिछले दिनों जज अरुण टंडन सीसामऊ नाले को टैप करने के बनाए गए, तो पंपिंग स्टेशन में सॉलिड वेस्ट न आने पर उन्होंने गहरी आपत्ति जताई और कहा कि शहर कूड़े से पटा हुआ है और ऐसा कैसे हो सकता है कि नालों में सॉलिड वेस्ट न आए. इसके बाद उन्होंने बकरमंडी नाले का निरीक्षण किया था. वहां भी सॉलिड वेस्ट नहीं पाया गया. इस पर अधिकारी बगले झांकते नजर आए थे. इसपर उन्होंने कहा था कि एनजीटी की ओर से दी गई गाइडलाइन पर कोई कार्य नहीं किया गया.