
कानपुर। ड्रिपेशन के चलते आएदिन सरकारी कर्मचारी व अधिकारी खुदकुशी कर रहे हैं। आईपीएस सुरेंद्र दास के बाद छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के रिटायर्ड कुलपति ने जहर खाकर जान दे दी। रीजेंसी अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और उनके शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज पूरे प्रकरण की जांच शुरू की। परिजनों ने बताया कि पत्नी की मौत के बाद कुलपति खासे परेशान रहते थे और 18 सितंबर की शाम उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। उन्हें रीजेंसी लाया गया, जहां देररात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं अब पुलिस इस मामले को दबाए रखने के चलते उनके परिजनों के साथ पूछताछ कर सकती है।
21 दिन पहले खाया था जहर
स्वरूपनगर थानाक्षेत्र स्थित आर्यनगर निवासी व छत्रपति शाहूजी महाराजू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉक्टर एसएस कटियार कीरीजेंसी अस्पताल में मौत हो गई। उन्होंने 21 दिन पहले जहर खाकर सुसाइड की कोशिश की थी। परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर आए, जहां सोमवार की शाम से उनके शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया और देररात उन्होंने आंखरी सांस ली। डॉक्टर कटियार मूलरूप सये फतेहगढ़ के रहने वाले थे। वर्ष 1994 से लेकर 2007 तक वह छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में तीन बार कुलपति रहे। भतीजे रितेश ने बताया कि चाची की मौत के बाद चाचा जी ड्रिपेशन में रहने लगे। उनका इलाज भी चल रहा था। पर 18 सितंबर को उन्होंने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर हमलोग उन्हें रीजेंसी लेकर आए, पर लाख कोशिशों के बाद भी उनकी जांन डॉक्टर्स नहीं बचा पाए।
पिछले साल पत्नी की हुई थी मौत
डॉक्टर कटियार की पत्नी इवा मैसी का पिछले साल जनवरी माह में बीमारी के चलते निधन हो गया था। इसके बाद वह भी डिप्रेशन (मानसिक अवसाद) में आने के कारण काफी बीमार रहने लगे थे। डॉक्टर कटियार के कोई औलाद नहीं थी। उनकी देखभाल भतीजा रीतेश करता था। वहीं डॉक्टर कटियार के ***** के बेटे ज्योतिन मैसी ने उनकी मौत पर संदेह जताया है। कहा कि कटियार को लूज मोशन व पेट की बीमारी की शिकायत रहती थी। इसलिए पहले परिजन इसी बीमारी से तबीयत बिगडऩा समझते रहे। ज्योतिन ने बताया कि 18 सितंबर को जब डॉक्टर कटियार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो इलाज करने वाले डॉक्टरों ने उनके जहर खाने का संदेह जताया था।
घर के अंदर मिली थी शीशी
ज्योतिन मैसी ने बताया कि डॉक्टर्स ने जैसे ही हमें उनके जहर खाने के बाद में बताया तो हम उनके आर्यनगर स्थित घर में जाकर छानबीन की तो कमरे के अंदर एक छोटी सी शीशी पड़ी मिली थी, जो अस्पताल लाकर डॉक्टर को दे दी थी। वहीं उनकी एक डायरी में अंग्रेजी में लिखा सुसाइड नोट मिला था। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होने लगा था लेकिन सोमवार रात उनकी मौत होने की जानकारी मिली। वहीं हैलट अस्पताल के पोस्टमार्टम ने डॉम्क्टरों के पैनल ने उनके शव का पोस्टमार्टम किया। लेकिन शाम चार बजे तक रिपोर्ट नहीं आई। पूरे प्रकरण पर स्वरूप नगर सीओ अभय नरायन राय ने कहा कि परिजनों अभी कोई सुसाइड नोट मिलने की जानकारी नहीं दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मामले की छानबीन के बाद ही कुछ कहा सकता है।
पद्मश्री से सम्मानित
डॉक्टर सर्वज्ञ सिंह कटियार ने एंजाइमोलॉजी (पाचक रस विज्ञान) में विशेषज्ञता प्राप्त की थी। वह लखनऊ के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के संस्थापक निदेशक थे। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। वह भारतीय विश्वविद्यालयों के एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके थे। चंद्र शेखर आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भी अध्यक्ष रह चुके थे। भारत सरकार ने वर्ष 2003 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। इसके बाद वर्ष 2009 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया था। उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में विज्ञान गौरव भी प्रदान किया गया था। वहीं रीजेंसी अस्पताल के डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि देरशाम से ही डॉक्टर कटियार के अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनके शरीर में जहर की मात्रा अधिक थी। रात को उन्होंने आखरी सांस ली।