कानपुर

नाले के चलते लंदन में किरकिरी, 128 साल के बाद मिली मुक्ति

1892 में अंग्रेजों ने करवाया था निर्माण, सैकड़ों लीटर गंदा पानी गंगा को कर रहा था मैला, बुधवार को सीसमऊ नाले की हो गई टैपिंग।  
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Updated: 28 Nov 2018, 6:05 PM IST
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नाले के चलते लंदन में किरकिरी, 128 साल बाद मिली मुक्ति

कानपुर। सीसामऊ नाला, पतितपावनी गंगा का सबसे बड़ा गुनहगार था और पूरे गुरूर से हर-हराकर बह रहा था। वर्ष 1892 से अनवरत गंगा में सीवर का जहर घोल रहा था। आबादी बढ़ने के साथ ही नाले का प्रवाह भी बढ़ता गया। अफसरों के रहमोकरम से लगभग रोजना रोजाना 13.6 करोड़ लीटर सीवर का गंदा पानी बेरोक-टोक गंगा में जा रहा था। लेकिन अब अंग्रेजों के जमाने ये नाला इतिहास के पन्नों में गुम हो गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मंत्रालय संभालते ही इसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई और बुधवार को नगर आयुक्त सन्तोष कुमार शर्मा ने निरीक्षण के बाद कह दिया कि नाले को पूरी तरह टैपिंग कर दिया गया है। इसी के बाद मां गंगा को 128 साल प्रदूषण के दंक्ष से मुक्ति मिल सकी।

तब लिया था प्रण
शहर के बीचोंबीच बजरिया थाने के पास स्थित सीसामऊ नाले का निर्माण अंग्रेजों ने 1892 में करवाया था। पूरे शहर का गंदा पानी इसी के जरिए पिछले 128 सालों से गंगा में गिर रहा था। जिसके टैपिंग के अनगिनत बार प्रयास हुए, लेकिन सफलता नहीं मिली। लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से वहां के लोगों ने नाले के बारे में पूछा तो उसी वक्त उन्होंने इसके खात्में का प्रण कर लिया। नमामि गंगे योजना के तहत नाले के टैपिंग के निर्देश दिए और पिछले 40 दिन से लगातार इस पर दिल्ली से नजर रख हुए थे। बुधवार को नगर आयुक्त सन्तोष कुमार शर्मा ने निरीक्षण के बाद नाले के टैपिंग किए जाने की जानकारी दी।

8 नालों का हुई टैपिंग
कानपुर में 16 नाले हैं, जो गंगा में सीधे गिरते हैं जिनमें 8 नालों की टैपिंग की जा चुकी है बाकी बचे नालों की भी टैपिंग का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। नगर आयुक्त सन्तोष कुमार शर्मा ने निरीक्षण के दौरान बताया कि शहर के सभी नालों का निरीक्षण किया जा चुका है। 8 नाले गंगा में जाने से पूरी तरह रोक लिए गए हैं, जबकि अन्य नालों को 15 दिसंबर तक टैप कर दिया जाएगा या इस दूषित पानी को ट्रीट किया जाएगा ताकि महाकुंभ में श्रद्धालुओं को गंगा का पानी शुद्ध व निर्मल मिल सके।

नितिन गडकरी के चलते मिली सफलता
गंगा पहरी देवधर मिश्र कहते हैं पिछली कई दशक से इसे बंद कराए जाने के वो किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। खुद विश्वबैंक के अध्यक्ष, जल संसाधन मंत्री, जापान की टीम और केंद्र व प्रदेश के आला अफसर गंगा में गिरते सीसामऊ नाले को देख चुके हैं लेकिन आज तक गंगा में गिर रहे नाले को रोका नहीं जा सका है। अब तक गंगा सफाई के नाम पर आठ अरब रुपये खर्च हो चुके है लेकिन 125 साल पुराना सीसामऊ नाला जस का तस गिर रहा था। लेकिन मं?ी नितिन गडकरी के चलते इस राक्षस से मां गंगा का मुक्ति मिल गई।

इतना पानी हररोज गंगा में गिरता था
देवधर मिश्रा कहते हैं कि 128 साल से सीसामऊ नाला का गंदा पानी लगातार गिरता जा रहा था। तीन दर्जन से ज्यादा मोहल्लों का 13.6 करोड़ लीटर गंदा पानी सीधे गंगा में जाता था। जबकि बारिश में बीस करोड़ लीटर पानी रोज गंगा में गिरता था। बताया, जलसंसाधन मंत्री उमा भारती ने सितंबर 2014 में सीसामऊ नाले का निरीक्षण किया था और 45 दिन में बंद करने का फरमान दे गईं थी, पर उनके आदेश का असर नहीं हुआ। पर आज जब इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

कुछ इस तरह से बोले कमिश्नर
नगर आयुक्त सन्तोष कुमार शर्मा ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नाला सीसामऊ नाले को टैपिंग करने का कार्य पूरा तो कर लिया गया है, लेकिन अभी इस कार्य की मॉनिटरिंग लगातार की जाएगी ताकि कहीं किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर उसे तत्काल दुरुस्त किया जा सके। अगर कोई नाला रह जाता है तो उसकी व्यवस्था की जाएगी कि उसका गंदा पानी गंगा में न जाकर उस दूषित पानी को बायो रेमिडीएशन के माध्यम से ट्रीट करते हुए भेजा जाएगा। वहीं नमामि गंगे के प्रोजेक्ट इंचार्ज घनश्याम तिवारी ने बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्रोजेक्ट बनाकर प्रयास किया गया और दो भागों में इसे मोड़ा गया। इस नाले से निकलने वाले 140 एमएलडी गंदे पानी में से 80 एमएलडी बिनगवां और 70 एमएलडी पानी जाजमऊ ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जा रहा है। यह 9 किलोमीटर तक का सीवर लाइन है, जिसे एसटीपी किया जा रहा है।

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