कानपुर

इस तरह कहर बनकर टूट पड़ा इंद्रदेव का प्रकोप, तो किसानों के चेहरे पर छाए चिंता के बादल

इस तरह कहर बनकर टूट पड़ा इंद्रदेव का प्रकोप, तो किसानों के चेहरे पर छाए चिंता के बादल

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Apr 13, 2018

कानपुर देहात. एक बार फिर अन्नदाताओं पर दैवीय आपदा आने से किसानों पर गाज गिर पड़ी है। जिससे किसानों के चेहरे मुरझाए हुए है। बताते चले कि बुधवार की रात आंधी व तेज बारिश ने लोगों को भले ही गर्मी से राहत दी हो लेकिन किसानों के लिए मुसीबत लेकर आई है। खेतों में खड़ी एवं कटी पड़ी फसल भीगने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। तेज हवाओं के चलते खेतों में खड़ी गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। वही फसल में पानी भरने से कटाई मड़ाई का काम भी रुक गया है। तेज आंधी में खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल उड़ने से किसान मायूस दिख रहे है। किसानों से वार्ता में किसानों ने अपना दुखड़ा रोते हुए बताया कि हमलोग बर्बादी की कगार पर आ गए है।

बीते कई साल से दैवीय आपदा का दंश झेल रहे किसानों के अरमानों पर एक बार फिर इंद्रदेव ने पानी फेरना शुरू कर दिया है। चार दिन पहले बारिश के साथ छिटपुट ओलावृष्टि से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल को जल्द से जल्द घर लाने की कवायद में जुटे थे और कटाई मड़ाई का काम युद्ध स्तर पर था, लेकिन मंगलवार रात एक बार फिर आंधी के साथ बारिश ने किसानों को झटका दे दिया। रात करीब 12 बजे आंधी में घरों में रखे छप्पर, टिन शेड उड़ गए और पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गई। फसलों की कटाई-मड़ाई का कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। इसके बाद फिर बीती बुधवार की रात आंधी के साथ पानी ने किसानों के अरमान समेट कर राकेह दिए है। और गुरुवार सुबह भी रुक रुककर हल्की बारिश अभी भी जारी है।


सिठमरा के किसान पप्पू यादव का कहना है कि बेमौसम बारिश से पकी खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। फसल की कटाई-मड़ाई का कार्य रुकने से किसानों के चेहरे मुरझा गए है।


महेरा के सौरभ सिंह का कहना है कि चार दिन पहले बारिश व ओले गिरने से आम की फसल को नुकसान पहुंचा था। इधर मंगलवार की रात आंधी व बारिश ने आम की बची फसल को भी चौपट कर दिया है।


झींझक के शिवनंदन सिंह ने बताया कि तेज आंधी के कारण गेहूं की मड़ाई के बाद खेतों में पड़ा भूसा उड़ गया। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिरने से नुकसान हुआ है। साथ ही अरहर की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है।


दया का पुरवा के अनिल कुशवाहा का कहना है कि बारिश से गेहूं की पकी फसल को नुकसान हुआ है। जबकि जायद की फसलों के लिए पानी अमृत समान है। सप्ताह भीतर दो बार आंधी आने से आम की फसल 80 फीसद से अधिक चौपट होने की संभावना है।

Published on:
13 Apr 2018 05:56 pm
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