
कानपुर। टीम इंडिया तीन -20, तीन एक दिवसीय और पांच टेस्ट की श्रृंखला खेलने के लिए इंग्लैंड के दौरे पर गई हुई है। जहां मंगलवार को विराट की सेना ने अंग्रेजों को उन्हीं की धरती पर हरा कर पहला टी-20 मैच आठ विकेट से जीत लिया। इस जीत में अहम रोल कानपुर के छोरे कुलदीप यादव ने निभाया। विराट ने जब कुलदीप को गेंद सौंपी तो उस वक्त अंग्रेज अच्छी पोजीशन में थे, लेकिन कुलदीप ने अपनी फिरकी में उन्हें ऐसा फंसाया कि वो 159 रन ही बना सके। कुलदीप ने इस मैच में पांच विकेट लिए और मैन-ऑफ-मैच घोषित किए। कुलदीप के प्रदर्शन से पूरे शहर में जश्न मनाया गया। कुलदीप के लालबंगला घर के बाहर जमकर आतिशबाजी के साथ लोग जमकर नाचे। कुलदीप के पिता ने बताया कि टीम इिंडया की जीत से वो बहुत खुश है। बेटा ऐसे ही खेले और टीम को जीत दिलाने में अहम रोल अदा करता रहे।
159 में अंग्रेजों को समेंटा
भारत व इंग्लैंड के बीच तीन टी-20 मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम को 8 विकेट से करारी शिकस्त दे दी है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 159 रन बनाए जिसके जवाब में भारतीय टीम ने 18.2 ओवर में 2 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। भारत की ओर से केएल राहुल ने नाबाद 101 रनों की पारी खेली और रोहित शर्मा ने 32 रन बनाए। टीम इंडिया की जीत में कुलदीप यादव ने अहम रोल निभाया। चार ओवर में 24 रन देकर पांच विकेट चटकाए। उनके कॅरियर में पहला मौका है जो उन्होंने विदेश में जाकर पांच विकेट झटके। बेटे को मैन-आफ-दा मैन चुने जाने पर उनके माता-पिता बहुत खुश हैं और आगे भी ऐसे ही प्र्रदर्शन करें उसके लिए भगवान के दर पर जाकर माथा टेका।
कुलदीप ने चटकाए पांच विकेट
कुलदीप यादव ने पहला शिकार एलेक्स हेल्स को बनाया। कुलदीप ने उन्हें मात्र 8 रन पर क्लीन बोल्ड कर दिया। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए कप्तान इयॉन मोर्गन भी कुलदीप यादव के शिकार बने वो 7 रन बनाकर कप्तान कोहली को कैच दे बैठे। इसी ओवर की तीसरी और चौथी गेंद पर कुलदीप ने जॉनी बेयरिस्टो और जे रूट को भी पवेलियन का रास्ता दिखाकर मैच में टीम इंडिया की वापसी करवाई। कुलदीप यादव ने शानदार बल्लेबाजी कर रहे जोस बटलर को अपना पांचवां शिकार बनाया। उन्होंने बटलर को 69 रन पर विराट के हाथों कैच करवाया। कुलदीप की कातिलाना गेंदबाजी के आगे अंग्रेजो ंने घुटने टेक दिए। जहां एक वक्त लग रहा था कि इंग्लैड का स्कोर दो सौ के आसपास होगा, लेकिन कुलदीप की फिरगी में अंग्रेज फंस गए और 159 रन बना सके
2017 रहा लकी
टीम इंडिया के लिए जहां 2017 खासा लकी रहा, वहीं कानपुर के लालबंगला निवासी चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने इसी वर्ष अनेक बुलंदियों को छुआ। 22 गज की पिच पर बड़े से बड़े बल्लेबाज को अपनी फिरगी में फंसाया और भारत को कई यादगार जीत दिलाई। कुलदीप कानपुर के ऐसे इकलौते क्रिकेटर हैं, जिन्होंने टेस्ट, एक दिवसीय और टी-20 मैच खेले। कुलदीप ने इंग्लैंड के साथ चल रही श्रृंखला में दमदार प्रदर्शन कर विरोधी टीम के अंदर खलबली मचाई हुई है। इसके पहले कुलदीप न्यूजीलैंड के लिए सिलेक्ट हुए पर चोट लग जाने के चलते वो मैच नहीं खेल पाए। इसके बाद इनका चयन टेस्ट के लिए हुआ, लेकिन अंमित ग्यारह में इन्हें जगह नहीं मिली।
धर्मशाला से टेस्ट करियर की शुरुआत
कुलदीप यादव का वैसे टेस्ट टीम में सिलेक्शन 2014 मं हो गया, लेकिन इस दौरान उन्हें मैच खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन ने धर्मशाला टेस्ट से अमित मिश्रा के चुटहिल हो जाने से कुलदीप को अपने टेस्ट करियर का आगाज करने का मौका मिला। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर सीरीज का आखरी मैच के लिए कुलदीप मैदान पर उतरे। कुलदीप ने अपनी फिरकी पर कंगारुओं को जमकर छकाया और 4 कंगारू बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर करियर की शानदार शुरुआत की है। इसके पहले कुलदीप ने घरेलू मैचों में शानदार प्रदर्शन किया। 22 प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच खेलते हुए कुल 723 रन बनाए हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 117 है, वहीं गेंदबाजी करते हुए कुलदीप यादव ने 81 विकेट लिए हैं।ं उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन 79 रन देकर 6 विकेट है।
विश्वकप में जगह नहीं मिलने से हुए थे निराश
विश्व कप क्रिकेट के अंतिम 15 खिलाड़ियों में जगह न बना पाने से ‘चाइनामैन’ गेंदबाज कुलदीप यादव निराश हुए थे, लेकिन नाउम्मीद बिल्कुल नहीं हुए। कुलदीप के पिता राम सिंह यादव ने बताया कि जब इनका चयन विश्वकप टीम में नहीं हुआ तो इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत करते रहे। कुलदीप के लिए 2017 का साल बेहद लकी रहा। इस साल इन्हें वन-डे, टेस्ट और टी-20 मैचों में खेलने का मौका मिला और टीम इंडिया ने कई एतिहासिक मैच जीते। राम सिंह कहते हैं कि कुलदीप बचपन से बहुत मेहनती थे और जो ठान लेते वह कर के ही छोड़ते थे। कुलदीप की मां उषा यादव के मुताबिक जब जब कुलदीप पहली बार टेस्ट मैच खेलने के लिए स्टेडियम में उतरे उस दिन हमें बहुत खुशी हुई। क्योंकि कुलदीप अक्सर सफेद जर्सी की का जिक्र किया करते थे और अक्सर टेस्ट टीम में सलेक्शन नहीं होने की बात किया करते थे।