मतदान शांतिपूर्ण ढंग से सपन्न कराने के बाद देर रात वो अपने पैतृक गांव मोहम्मदपुर जनपद जौनपुर के लिए निकल गये.
विनोद निगम.
कानपुर. देश में पुलिस की क्षवि पर लोगों की राय अच्छी नहीं रहती। कोई उन्हें खलनायक तो कोई घूसखोर समझता है, लेकिन आज भी ऐसे कई खाकीधारी हैं जो देश व समाज के लिए अपने काम के बल पर मिसाल कायम कर रहे हैं। ऐसे ही एक आईपीएस अफसर रमाकांत पांडेय हैं, जो कानपुर बतौर एसपी के पद पर तैनात हैं। जिनके पिता की बीमारी के चलते मौत हो गई। एसपी को परिजनों ने घटना की जानकारी फोन के जरिए दी, लेकिन 29 नवंबर को जिले में मतदान हो रहा था, ऐसे में उन्होंने पिता के शव को कंधा देने के बजाय ड्यूटी को चुना। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से सपन्न कराने के बाद देर रात वो अपने पैतृक गांव मोहम्मदपुर जनपद जौनपुर के लिए निकल गये। कप्तान के इस निर्णय से जहां पुलिस-प्रशासन के अफसर काम की सराहना कर रहे हैं, वहीं आम पब्लिक ने अपने अफसर के फर्ज को सलाम कर उन्हें सांत्वना दी।
सुबह मौत की मिली खबर, रात को निकलें कप्तान
नगर निकाय चुनाव के तीसरे चरण के तहत बुधवार को कानपुर देहात में मतदान हो रहा था। मतदान को शांतिपूर्ण कराने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला एक पैर पर खड़ा रहा। इसी दौरान पुलिस अधीक्षक रमाकांत पाण्डेय के फोन पर एक काल परिजनों की ओर से आई और बताया गया कि पिता जी इस दुनिया में नहीं रहे। इस दौरान पुलिस अधीक्षक एडीजी अविनाश चन्द्र के साथ पुखरायां के वार्ड 10 का भ्रमण कर रहे थे, लेकिन इसकी भनक किसी को नहीं होने दी और आईपीएस का धर्म निभाते हुए दिन भर घूम-घूमकर मतदान का जायजा लेते रहे। मतदान सकुशल संपन्न होने के बाद कप्तान ने अपने अधीनस्थों को पूरी जानकारी दी।
कप्तान के इस फैसले को सुन अधीनस्थ कर्मचारी सन्न रह गये। जिसके बाद कप्तान ने डीएम राकेश कुमार सिंह को जानकारी देकर रात करीब नौ बजे पत्नी के साथ पिता के शव को कंधा देने के लिए अपने पैतृक गांव मोहम्मदपुर जनपद जौनपुर के लिए निकल गये।
मतदान शातिंपूर्ण कराने की थी जिम्मेदार-
एसपी ने फोन पर बताया कि पिता पारसनाथ पाण्डेय (86) काफी समय से बीमार चल रहे थे। जिनका इलाज बनारस के एक निजी नर्सिंग होम में चल रहा था। दोपहर बारह बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। परिजनों, रिश्तेदारों व चाहने वालों के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जब पूछा गया कि दोपहर में खबर मिलने के बाद भी आप शाम तक ड्यूटी करते रहें तो कहा कि सरदार पटेल एकेडमी हैदराबाद में हमें ट्रेनिंग के बाद शपथ दिलाई गई थी जिसका मैंने पालन किया है। जिले का कप्तान होने के नाते मेरी ये ड्यूटी बनती थी कि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से निपटे। हमने जब वर्दी पहनी थी तब हमें बताया गया था कि समाज की सेवा करना पहला कर्तव्य है और इसी के चलते हमने अपनी ड्यूटी निभाई और आज बेटे का धर्म निभाया।
बेटे को देखना चाहते थे एसपी के पिता
एसपी के पिता कई दिनों से बीमार चल रहे थे। वो अपने एसपी बेटे को देखना चाहते थे, लेकिन कानुपर में चुनाव प्रचार चल रहा था और वोटिंग की जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर थी। एसपी ने पिता से बुधवार की सुबह बात की, जिस पर उन्होंने गुरूवार को उन्हें देखने के लिए कहा था। चंद मिनट बात करने के बाद एडीजे के आने की उन्हें जानकारी हुई तो फोन काट कर उन्हें रिसीव करने के लिए चले गए। इसी दौरान पिता इस दुनिया को अलविदा कर गए। बहन का फोन आया और पिता के गुजर जाने की बात एसपी को बताई। आंख में आंसू तो आए, लेकिन उन्हें कोई देख नहीं पाया। मतदान सम्पन्न होने के बाद उन्होंने डीएम को घटना की जानकारी दी और फिर अपने पिता के शव को कंधा देने के लिए चले गए।