Broken Piggy Bank Story:कानपुर में जनता दर्शन के दौरान 11 वर्षीय बच्ची की टूटी गुल्लक की कहानी सुन डीएम भावुक हो गए। उन्होंने बच्चियों को नई गुल्लक, स्कूल बैग और 1000 रुपये देकर उनके टूटे सपनों में फिर से उम्मीद जगा दी।
कानपुर नगर के कलेक्ट्रेट में बुधवार को आयोजित जनता दर्शन उस समय भावनाओं से भर उठा, जब भीड़ के बीच एक मासूम बच्ची अपनी मां का हाथ थामे जिलाधिकारी के सामने पहुंची। सामान्य शिकायतों के बीच यह फरियाद अलग थी, क्योंकि इसमें पैसों से ज्यादा एक बच्ची के सपनों का दर्द छिपा था। वहां मौजूद हर व्यक्ति की नजरें उस बच्ची पर टिक गईं। उसकी खामोशी और मासूम चेहरा बहुत कुछ बयां कर रहा था। माहौल ऐसा हो गया कि कुछ देर के लिए लोग अपनी-अपनी समस्याएं भूलकर सिर्फ उस बच्ची की कहानी सुनने लगे।
जाजमऊ की रहने वाली 11 वर्षीय इस्वा खां अपनी मां शन्नो और बहन मरियम फातिमा के साथ जनता दर्शन में पहुंची थी। इस्वा कोई बड़ी मांग नहीं कर रही थी, बल्कि अपने छोटे-छोटे सपनों की बात कह रही थी। वह रोज थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाकर अपनी मिट्टी की गुल्लक में डालती थी। कभी रिश्तेदारों से मिले रुपये, तो कभी घर में बचे सिक्के—सब वह संभालकर रखती थी। उसका सपना था कि गुल्लक भरने पर वह अपने लिए नया स्कूल बैग और जरूरी किताबें खरीदेगी। उसके लिए हर सिक्का एक उम्मीद था।
मां शन्नो ने जिलाधिकारी को बताया कि पारिवारिक विवाद के चलते घर में तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान बच्ची की मिट्टी की गुल्लक भी नहीं बच सकी। आरोप है कि घरेलू झगड़े के बीच गुल्लक को तोड़ दिया गया और उसमें जमा पैसे निकाल लिए गए। यह सुनते ही माहौल में सन्नाटा छा गया। इस्वा चुपचाप खड़ी रही, लेकिन उसकी आंखों में मायूसी साफ झलक रही थी। जिस गुल्लक में उसने अपने सपनों को सहेजा था, उसके टूटने से जैसे उसके अरमान भी बिखर गए थे।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने जब बच्ची से पूछा कि वह गुल्लक में पैसे क्यों जमा करती थी, तो उसका मासूम जवाब हर किसी के दिल को छू गया। बच्ची ने कहा कि वह अपने लिए स्कूल का सामान खरीदना चाहती थी। यह सुनकर जिलाधिकारी भी कुछ पल के लिए भावुक हो गए। उन्होंने तुरंत संबंधित थाना प्रभारी को मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने बच्ची के चेहरे पर मुस्कान लौटाने का फैसला भी किया, ताकि उसका भरोसा और हिम्मत बनी रहे।
जिलाधिकारी ने दोनों बच्चियों को अपने पास बुलाया और स्नेहपूर्वक उनसे बातचीत की। इसके बाद उन्होंने उन्हें नया मिट्टी का गुल्लक और स्कूल बैग भेंट किया। इतना ही नहीं, उन्होंने बच्चियों के हाथों से नए गुल्लक में 1000 रुपये भी डलवाए। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। कुछ देर पहले तक उदास नजर आ रही इस्वा के चेहरे पर अचानक मुस्कान लौट आई। उसकी आंखों में फिर से वही चमक दिखने लगी, जो उसके सपनों की पहचान थी।
कलेक्ट्रेट में मौजूद लोगों ने इस पूरे दृश्य को चुपचाप देखा, लेकिन हर किसी के मन में यह घटना गहरी छाप छोड़ गई। जनता दर्शन में रोज सैकड़ों शिकायतें आती हैं, मगर इस दिन एक छोटी बच्ची की गुल्लक ने सबको भावुक कर दिया।