
कानपुर देहात के चर्चित 400 करोड़ रुपये के पावर प्लांट जमीन घोटाले में अब जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। पुलिस अधीक्षक की ओर से गठित पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी। टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय ग्रामीणों और किसानों से पूछताछ की तथा जमीन अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, चपरघटा क्षेत्र में वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्लांट लगाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए हरियाणा के गुरुग्राम स्थित हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी लैंको अनपरा पावर लिमिटेड ने करीब 2332 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। इस परियोजना के नाम पर कंपनियों ने बैंकों से लगभग 1500 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
हालांकि बाद में परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी और कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया। इसके बाद बैंकों ने अधिग्रहित जमीन की नीलामी कर लगभग 1100 करोड़ रुपये की वसूली कर ली। आरोप है कि शेष करीब 400 करोड़ रुपये की रकम कंपनियों द्वारा हड़प ली गई।
मामले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि ऋण राशि लेने के बाद परियोजना पर कोई ठोस कार्य नहीं किया गया। साथ ही कंपनियों के कार्यालय बाद में हैदराबाद और सोनभद्र शिफ्ट किए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप यह भी है कि शुरुआत से ही नियमों की अनदेखी की गई, लेकिन संबंधित विभागों और अधिकारियों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया।
भोगनीपुर तहसीलदार प्रिया सिंह की ओर से इस मामले में पहले ही मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। मुकदमे में तत्कालीन एडीएम भूमि अध्याप्ति कानपुर नगर ओक सिंह, दोनों कंपनियों के अधिकारी और कर्मचारी, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक तथा आईडीबीआई बैंक की गुरुग्राम शाखाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों को नामजद किया गया था। यह मुकदमा मुसानगर थाने में दर्ज है।
एसआईटी अब पूरे जमीन अधिग्रहण, बैंक ऋण, नीलामी प्रक्रिया और दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। जांच टीम ने उन किसानों से भी बातचीत की है जिनकी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।