शहर में तेजी से गिर रहे जलस्तर को लेकर केडीए अलर्ट हो गया है. उसने एडवांस रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने की तैयारी कर ली है. इसके लिए केडीए कर्नाटक के सीनियर साइंटिस्ट एआर शिवकुमार की मदद लेने जा रहा है.
कानपुर। शहर में तेजी से गिर रहे जलस्तर को लेकर केडीए अलर्ट हो गया है. उसने एडवांस रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने की तैयारी कर ली है. इसके लिए केडीए कर्नाटक के सीनियर साइंटिस्ट एआर शिवकुमार की मदद लेने जा रहा है. रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की एडवांस तकनीक के सफल होने से मशहूर हुए वैज्ञानिक 15 व 16 को केडीए आएंगे. इनकी देखरेख में एक पायलट प्रोजेक्ट लाने की योजना है. ऐसे में अगर ये प्रोजेक्ट सफल रहा तो केडीए गवर्नमेंट बिल्डिंग्स, शताब्दी नगर, जवाहरपुरम आादि हाउसिंग स्कीम्स में बने फ्लैट्स में भी यह तकनीक इस्तेमाल करेगा.
ऐसी है जानकारी
गौरतलब है कि ग्राउंड वॉटर के अधाधुंध इस्तेमाल और ग्राउंड वाटर की रिचार्जिंग में लापरवाही के कारण शहर का भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है. दो साल पहले तक जहां सामान्य औसत 45 सेंटीमीटर प्रति वर्ष के हिसाब से ग्राउंड वाटर लेवल गिर रहा था. वहीं अब ये बढ़कर 60 सेंटीमीटर तक पहुंच गया है. इसके बावजूद रेन वाटर हार्वेस्टिंग में लापरवाही बरती जा रही है.
पायलट प्रोजेक्ट होंगे तैयार
इधर, केडीए शताब्दी नगर, जवाहरपुरम में बने फ्लैट्स में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के इंतजाम किए जाने की तैयारी कर रहा है, उधर केडीए इन हाउसिंग स्कीम में 10 हजार से अधिक फ्लैट बना रहा है. हजारों की संख्या में फ्लैट बन भी चुके हैं. केडीए वीसी किंजल सिंह ने बताया कि एआर शिवकुमार 15 और 16 नवंबर को केडीए आएंगे और रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर बातचीत करेंगे. कोशिश होगी कि उनकी निगरानी में एक पायलेट प्रोजेक्ट तैयार किया जाए. इसे राज्य सरकार की इजाजत के बाद सभी सरकारी और गैर सरकारी इमारतों में लगाया जाए. ताकि पानी की समस्या हल करने में मदद मिल सके. उनके प्रोजेक्ट का फायदा भूटान सहित कई देश उठा रहे हैं.
22 साल से नहीं है कनेक्शन
कर्नाटक स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी बंगलुरू के सीनियर एआर शिवकुमार को पिछले 22 वर्षों में कभी पानी का कनेक्शन लेने या बिल भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ी. वह वर्षा जल का संचयन कर अपनी व परिवार की जरूरत को पूरा कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने घर की छत पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगा रखा है. इसके अलावा वह किचन और वाशिंग मशीन से निकले पानी को रिसाइकिल कर टॉयलेट में इस्तेमाल कर रहे हैं. दाल, चावल, सब्जी, फल आदि धोने के बाद उस पानी का इस्तेमाल लॉन की सिंचाई में कर रहे हैं.