कुंभ मेले के चलते तीन माह तक बंद रहेंगी टेनरी, नाराज कारोबारियों ने बांगलदेश सरकार से की बात, जल्द कानपुर से ढाका की तरफ बढ़ाएंगे कदम
कानपुर। कुंभ मेले के चलते प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गंगा के किनारे स्थित सभी टेनरियों को तीन माह तक बंद करने के आदेश दिए थे। जिसके कारण जिलाप्रशासन हरकत में आया और टेनरी संचालकों को नोटिस के जरिए तालेबंदी की जानकारी दी। टेनरी संचालकों ने सीएम से मिलकर आदेश पर दोबरा अमल करने का अनुरोध किया, पर बात नहीं बनी। इसी के कारण अब शहर की लगभग चार सौ टेनरियां बांग्लादेश में जाकर कारोबार करेंगी। इस सम्बंध में बांग्लादेश सरकार से उनकी कई बार की वार्ता भी हो चुकी है। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पूर्व चेयरमैन आरके जालान ने बताया कि नोटबंदी, बूचड़खानाबंदी और जीएसटी ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी। अब सीएम के नए आदेश के चलते आर्डर मिलने बंद हो गए हैं। साथ ही तीन साल में टेनरी का निर्यात कारोबार 12 फीसद घट गया है जबकि प्रति वर्ष इतनी ही ग्रोथ होनी चाहिए। जालान ने बताया कि टेनरी उद्य़ोग के यहां से चले जाने के बाद करीब पांच लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे तो वहीं छोटे कारोबारी फुटपाथ पर जीने को मजबूर होंगे।
कुंभ के चलते लिया निणर्य
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने इलाहबाद में लगने वाले कुम्भ मेले को देखते हुए 15 दिसम्बर से 15 मार्च तक कानपुर के गंगा किनारे बसी टेनरियों को बंद का फरमान जारी किया है। सीएम के के इस आदेश के बाद टेनरी मालिकों को विदेशों से बड़े आर्डर कैंसिल करने पड़ रहे हैं। 90 दिन तक टेनरियां बंद रहने के चलते मालिकों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी के चलते अब टेनरी कारोबारी यूपी से बजाए अन्य देशों में कारोबार ले जाने का लगभग-लगभग मन चुके हैं। कुछ दिन पहले आधा दर्जन टेनरी मालिक बांग्लादेश गए थे और वहां की सरकार से टेनरी उद्य़ोग लगाने की मांग की थी, जिसे पर सरकार ने हामी भर दी है। टेनरी मालिकों का कहना है कि सौ साल के इस व्यवसाय में पहली बार तीन महीने की बंदी के पीछे सरकार की सोची समझी रणनीति है। वो इस उद्योग को किसी भी हालत में चलने नहीं देना चाहती।
60 बड़ी टेनरियां
जाजमऊ में छोटी और बड़ी मिलाकर करीब साढे तीन व चार सौ टेनरियां हैं। जिनमें लगभग 60 बड़ी टेनरियां हैं। एक दर्जन टेनरी मालिकों ने बांग्लादेश में शिफ्ट होने की योजना तैयार की है। अन्य बड़ी टेनरी मालिकों से भी संपर्क जारी है। टेनरी मालिकों का कहना है कि तीन महीने की बंदी के आदेश के बाद से निर्यात में बाधा उत्पन्न हुई है जिससे वह परेशान हैं और हर साल की इस समस्या से निजात पाने के लिये दूसरा रास्ता तलाशना बेहतर होगा। बताया तो यहां तक जा रहा है कि कुछ टेनरी संचालकों ने पिछले दिनों श्रीलंका और बांग्लादेश जाकर भविष्य के रास्ते तलाशे थे। चर्चा यह भी है कि बड़ी संख्या में टेनरी संचालक अपना कारोबार बांग्लादेश शिफ्ट करने की तैयारी में हैं और बंदी के बाद वो सीधे यहां से बांग्लादेश की तरफ कूच कर जाएंगे।
ममता मनर्जी से नहीं बन पाई बात
उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों की बंदी के बाद कानपुर का चमड़ा उद्योग बुरे दौर से गुजरने लगा था, जिसको देखते हुए कानपुर के टेनरी मालिकों ने पश्चिम बंगाल में टेनरियों को शिफ्ट करने की रणनीति बनाई। इसके लिए कई बार टेनरी मालिकों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से वार्ता भी की लेकिन बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी से बात नहीं बन पायी। इसी के चलते अब टेनरी मालिकों ने बांग्लादेश का रूख किया है। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के पूर्व चेयरमैन आरके जालान ने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद टेनरी उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो गया। हमलोग ममता बनर्जी से भी मिले, लेकिन जहां पर हम जमीन की मांग कर रहे थे, वो देने को तैयार नहीं हुई। जालान ने बताया कि टेनरी उद्योग के बंद हो जाने से जहां करोड़ों का नुकसान होगा तो वहीं लाखों लोग भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे।
इसके चलते रमईपुर से हटे कारोबारी
टेनरी को संचालित करने के लिए किसी बड़ी नदी का होना बहुत जरूरी है। प्रदेश सरकार ने गंगा के किनारे बसी टेनरियों को रमईपुर में शिफ्ट करने का आदेश दिया था, जिसके बाद लगभग एक दर्जन बड़ी टेनरी मालिकों ने रमईपुर में 450 एकड़ जमीन खरीदी है। लेकिन रमईपुर के आसपास कोई बड़ी नदी व नहर नहीं होने के चलते अब कारेबारी रमईपुर की जमीन को बेचने की प्लानिंग कर रहे हैं। असद ईराकी ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील से हमारा मुकाबला है। हमारा कारोबार उनके हाथों में जा रहा है। असद ईराकी बताते हैं, कहने को यह तीन महीने की बंदी होगी, लेकिन टेनरी की प्रक्रिया ऐसी है कि 15 दिन पहले और 15 दिन बाद प्रभावित होना तय है। ऐसे में यह बंदी चार महीने की होगी। कहा, हम ट्रीट करके ही डिस्चार्ज को बहाते हैं। तीन स्तर पर ट्रीटमेंट होता है, फिर भी कार्रवाई हम लोगों पर होती रही है, उससे हम विश्व बाजार में गैर भरोसेमंद और अस्थायी सप्लायर की छवि बना चुके हैं।
20 हजार करोड़ का है कारोबार
अकेले कानपुर में चमड़े का कारोबार लगभग 20000 करोड़ रुपये का होता है। लगभग पांच हजार करोड़ रुपये का चमड़े का निर्यात होता है और करीब 15000 करोड़ का घरेलू व्यापार होता है। वहीं चमड़ा उद्योग से लगभग पांच लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के चेयरमैन मुख्तारूल अमीन ने कहा कि सरकार का फैसला नदी और श्रद्धालुओं की फिक्र में है लेकिन इसका बड़ा असर टेनरी उद्योग पर पड़ना तय है। ऐसा पहली दफा नहीं है। कहा, पिछले तीन वर्षों में सख्ती, बंदिशें और बंदी का आलम यह रहा कि विश्व बाजार में हमारी साख गिर गई। हमारे खरीदार अब दूसरे देशों का रुख कर गए हैं। अगर यही स्थिति रही तो फिर तीन महीने की बंदी की भरपाई संभव ही नहीं हो सकेगी। कहा, टेनरी बंदी से बेहतर है कि सरकार आधारभूत ढांचा सुधारे और प्रदूषण के सटीक कारणों पर काम करे। यह सिर्फ उद्यमी नहीं, लाखों गरीब परिवारों के भविष्य का सवाल है।