लोग भूत प्रेत से पीड़ित रोगी को बालाजी मंदिर में लाते हैं और सवामनी हवन में अर्जी लगाते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां सभी भूत प्रेत की छाया क्षण में दूर होती है।
अरविंद वर्मा
कानपुर देहात-कहा जाता है कि असाध्य पीड़ित लोग सिर हिलाते हुए आते हैं और मंदिर के हाल में प्रवेश करते ही बालाजी की जय जयकार बोलते हैं, यहां बालाजी की ऐसी अनूठी कृपा है। दरअसल लोग आज भी देश मे लोग भूत प्रेत एवं मायावी छाया से पीड़ित रहते हैं। हिंदू धर्म में इन भूत प्रेत से छुटकारा दिलाने के लिए अधिकांश लोग आराध्य बालाजी की शरण मे जाते हैं और इन असाध्य बाधाओं से मुक्ति पाते हैं। ऐसा ही कुछ नजारा जिले के एक बालाजी मंदिर में देखने को मिलता है, जहां लोग भूत प्रेत से पीड़ित असाध्य रोगी को इस बालाजी मंदिर में लाते हैं और सवामनी हवन में अर्जी लगाते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां सभी भूत प्रेत की छाया क्षण में दूर होती है। यह प्राचीन बालाजी मंदिर सन 1996 में यमुना नदी किनारे करीब 15 बीघा भूमि पर विधि विधान से स्थापित किया गया था, जहां प्रतिवर्ष वार्षिकोत्सव आयोजित किया जाता है। इस दौरान भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
कानपुर देहात के यमुना नदी किनारे स्थापित इस प्राचीन में बालाजी की अलौकिक प्रतिमा स्थापित है। सबसे अजीब बात यह है कि उस समय से लेकर आज तक इस मंदिर में निर्माण कार्य चलता ही रहता है। बताया गया कि सन 2001 में मंदिर भूमि पर एक विशाल हाल का निर्माण कराया गया। इसके एक तरफ प्रेतराज महाराज की स्थापना की गई है, वहीं दूसरी तरफ बटुक भैरव जी महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई है। मान्यता है कि बालाजी महाराज के दर्शन के बाद पर्वतराज और बटुक जी महाराज के दर्शन के बिना पूजा अर्चना अधूरी रहती है। इसलिए यहां आकर भक्तों पर पूर्ण अनुकंपा बरसती है। इस धाम में प्रतिवर्ष वार्षिकोत्सव भी मनाया जाता है, जहां सवामनी हवन सम्पन्न किया जाता है, इसमें प्रेत बाधाओं वाले रोगियों की अर्जी लगाई जाती है और उन्हें छुटकारा दिलाने के लिए प्रार्थना की जाती है। इस मौके पर भारी जनसैलाब उमड़ता है। हवन के दौरान मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठता है।