
कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करप्शन पर नकेल कसने के लिए 365 दिन पहले यानि 1 जुलाई 2017 करे वस्तु एवं सेवाकर अधिकनियम (जीएसटी) पूरे देश में लागू कर दिया था। जिसका व्यापारियों ने जमकर विरोध किया और इसका चुनाव के दौरान भी देखने को मिला। छोटे व्यापारियों ने इसे अपातकाल की संज्ञा देकर सरकार के खिलाफ पूरे साल हल्ला बोलते रहे। व्यपारी उमंग अग्रवाल कहते हैं कि मोदी सरकार ने पिछले चार सालों में नोटबंदी, जीएसटी और एफडीआई लाकर व्यापारियों की कमर तांड़ दी। हां इसमें बड़े उद्योगपतियों को जबरदस्ु फाएदा हुआ है, जबकि छोटे दुकानदार जीएसटी की बारीकियों को नहीं जान पाने के चलते अधिकारियों का शिकार होते रहे।
क्या है जीएसटी, इसके फाएदे ?
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा। जीएसटी के जानकार मनोज गुप्ता कहते हैं कि संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं।अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी। मनोज बताते हैं कि 2014 में पास संविधान के 122वें संशोधन के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा। सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी।
कई फाएदे हुए
मनोज गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लागू होने से कई फाएदे हुए है। .अब पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना पड़ता है।यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। जैसे कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते हैं तो उसकी कीमत अलग होती है, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा। जीएसटी के लागू होने से कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिला। इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना पूरी तरह से खत्म हो गई। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे।
छोटे व्यापारी दुखी, बंद हो गई फैक्ट्री
कारोबारी नेता उमंग अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी की व्यवस्था इस एक साल में ही धड़ाम हो गई। एक ही प्रोडक्ट में दो सलैब कर चोरी और हाफ बिलिंग को बढ़ावा दे रही है। कर चोरों ने चोरी के नए रास्ते ढूंढ लिए हैं, एक साल का समय पूरा हो जाने के बाद भी पोर्टल ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। टेक्निकल जानकारी रखने वाले लोगों को जीएसटी से लाभ हुआ है लेकिन छोटे दुकानदारों के खर्चे बढ़ गए हैं। उमंग अग्रवाल ं के मुताबिक एक साल गुजर गया लेकिन अभी तक पूरे रिटर्न ही लागू नहीं हो सके हैं। कहते हैं, विक्रेता रिटर्न में कोई गलत इंट्री कर रहे हैं तो खरीदार उसे ठीक नहीं कर पा रहे हैं। उमंग ने बताया कि एक साल के अंदर पांच सौ से ज्यादा छोटे कारखाने और फैक्ट्रियों में ताले पड़ गए। व्यापारियों ने अपनी पीणा सरकार के पास पहुंचाई पर किसी ने मर्ज का इलाज नहीं किया। जीएसटी का सबसे ज्यादा लाभ इंस्पेक्टरों को हुआ है। जिसका सबसे बड़ा सबूत जीएसटी कमिश्नर का पकड़ा जाना।
...तो खत्म हो जाएंगी सारी समस्याएं
एक प्राईवेट कंपनी में सीए पद पर तैनात सौरभ श्रीवास्त्व ने बताया कि बिक्री के सभी इनवाइस अगर पोर्टल पर ही रियल टाइम में जारी किए जाने लगें तो सभी तरह के विवाद खत्म हो जाएंगे। उनके मुताबिक चूंकि जीएसटी पोर्टल पर बिक्री के सभी इनवाइस होंगे तो इसका मतलब साफ है कि सभी के खरीदारी के इनवाइस भी वही होंगे। ऐसे में सिस्टम अपने आप यह देख ले कि किसी कारोबारी ने कितनी खरीद की और कितनी बिक्री। उसके हिसाब से हर माह की एक तारीख को टैक्स जेनरेट कर कारोबारी को बता दिया जाए। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों में लगातार नेट पर काम नहीं हो सकता तो जीएसटी उन्हें पोर्टल पर दिन भर इनवाइस जारी करने का कोई प्लेटफार्म दे और रात में काम खत्म करने से पहले उसे नेट से जोड़कर पोर्टल पर अपलोड कर दे। उनके मुताबिक इससे कारोबारियों को एक भी रिटर्न नहीं भरना होगा।
ग्राहकों ने कहा नहीं मिला लाभ
जीएसटी लाने का मुख्य उद्देश्य था जनता को चीजें एक दर और कम दामों पर उपलब्ध हों, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कर की दरें कम होने के बाद भी जनता को सभी चीजें उतने ही दामों पर मिल रही हैं और इस पर ध्यान देने की जरूरत है। प्राईवेट नौकरी कर रहे अभय सिंह ने बताया कि जीएसटी लागू करने की रफ्तार बहुत सुस्त है। इस वजह से आम जनता को इसकी राहत नहीं मिल रही। इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की आधी अधूरी तैयारी भी जिम्मेदार है। अब तक के सबसे बड़े कर सुधार के बावजूद व्यापारियों, उद्यमियों, वकीलों और अफसरों ने टैक्स चोरी के रास्ते निकाल लिए हैं। इसके कई उदाहरण हमारे सामने हैं। वहीं नवाबगंज निवासी विशाल गुप्ता कहते हैं कि दुकानदार जीएसटी का वर्जिनल बिल के बजाए फर्जी बिल दे रहे हैं। एक साल बीता पर ग्राहकों को जीएसटी का अठन्नी भर का फाएदा नहीं हुआ।