मांगों को लेकर आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और अखिल भारतीय उधोग व्यपार मंडल सड़क पर उतरा, केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की
कानपुर। संसद भवन में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर जमकर राजनेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं तो वहीं देश के व्यापारी व ट्रांसपोर्टर सड़क पर उतर कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और अखिल भारतीय उधोग व्यपार मंडल के तत्वावधान में सैकड़ों कारोबारियों ने रेलवे ट्रैक में लेटकर जाम ट्रेन रोक दी। ट्रेन रोके जाने की सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कम्प मच गया। सूचना पर पुलिस पहुंची और व्यापारियों को समझा बुझाकर ट्रैक से हटवाया गया। लगभग बीस मिनट बाद ट्रेन वहां से रवाना हो सकी। वहीं ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल के चलते ट्रांसपोर्ट नगर में पांच हजार से ज्यादा ट्रक खड़े हो गए हैं।
पांच हजार ट्रकों के पहिए थमे
ट्रांसपोर्टरों की तरफ से हड़ताल की शुरूआत कर दी गई है। कुछ दिन पहले तमाम व्यापार मंडलों ने भी इसके समर्थन में आने का ऐलान कर दिया था। उसी के मद्देनजर शुक्रवार सुबह ट्रांसपोर्टरों के साथ मिलकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी और ट्रांसपोर्टरों समेत लगभग 200 से अधिक व्यापारी लखनऊ फाटक रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। सुबह 10 बजे वहां से अनन्या एक्सप्रेस के गुजरने का समय होता है। व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने मिलकर ट्रेन को रोक लिया। जीएसटी और राष्ट्रव्यापी सामान्य मूल्यों को लेकर उन्होंने सरकार विरोधी नारेबाजी की। ट्रेन रोके जाने की सूचना पर प्रशासन और पुलिस के अफसर भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने व्यापारियों को समझा बुझाकर ट्रैक से हटवाया।
किचन पर पड़ेगा भार
ट्रक हड़ताल का सीधा असर आम आदमी पर होता हैं, क्योंकि ट्रक हड़ताल से दूध-सब्जी और बाकी सामानों की सप्लाई बंद हो जाएगी। ऐसे में डिमांड बनी रहेगी और सप्लाई घट जाएगी. लिहाजा आम आदमी को इन चीजों के लिए ज्यादा दाम चुकाने होंगे। आमशहरी का कहना है कि मोदी सरकार को व्यापारियों और ट्रांसपोटर्स से बात कर रास्ता निकालना होगा। यदि हड़ताल ऐसे ही जारी रही तो खाने-पीने की वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी हो जाएगी। पहल से ही हरी-सब्जी के साथ ही रसोई की तड़का फींका पड़ा है। गृहणी सुशीला देवी ने कहा कि आज टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं और कल पता नहीं वह कितने रूपए महंगा न हो जाए। सरकार को जल्द से जल्द इस बड़े मुद्दे पर गंभीरता से प्रयास कर उसका निराकरण करना ही होगा।
व्यापारियों की मांगे
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडर के महामंत्री ज्ञानेश मिश्रा ने केंद्र सरकार से मांग की, डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए या फिर मौजूदा समय में इनपर केन्द्रीय व राज्यों की तरफ से लगने वाले टैक्स को कम किया जाए। टोल कलेक्शन सिस्टम को भी बदला जाए क्योंकि टोल प्लाजा पर र्इंधन और समय के नुकसान से सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है। थर्ड पार्टी बीमा प्रिमियम पर जीएसटी की छूट मिले और इससे एजेंट्स को मिलने वाले अतिरिक्त कमिशन को भी खत्म किया जाए। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44 ए में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत लगने वाले टीडीएस को बंद किया जाए और र्इ-वे बिल में संशोधन हो। ,
तभी चलेंगे ट्रक
यूपी मोटर्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गांधी ने बताया कि ट्रकों को आएदिन पुलिस-प्रशासन से जूझना पड़ता है। सरकार भ्रष्टाचार कम करना चाहती है पर उनके अफसर हमसें जबरन वसूली करते हैं। नए-नए कानून बता कर ट्रकों को सीज किया जाता है। इन सभी मुद्दों का हल सरकार को करना होगा, तभी ट्रक ऑपरेटर्स अपनी हड़ताल वापस लेंगे। गांधी ने बताया कि कानपुर से इलाहाबाद तक जाने में अनगिनत ट्रोल खुले हैं जहां पर पैसे लिए जाते हैं। डीजल के दाम कानपुर में अगर 68 रूपए है तो बंगाल में इसकी कीमत 78 रूपए हो जाती है। जब सरकार एक कर प्रणाली लागू किया है तो डीजल और पेट्रोल में भी जीएसटी को लाना चाहिए।