कानपुर

दारोगा की बीवी ने एक तीर से साधे थे तीन निशाने, पेंशन… नौकरी और इश्क

सजेती थाने के दारोगा पच्चालाल की कहानी में आया नया मोड़
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Updated: 7 Jul 2018, 6:47 PM IST
pachhalal murder case
दारोगा की बीवी ने एक तीर से साधे थे तीन निशाने, पेंशन... नौकरी और इश्क

कानपुर. सनसनीखेज खुलासा। पत्रिका.कॉम ने पहले ही दिन जताया था अंदेशा। सजेती थाने के बंद कमरे में दारोगा पच्चालाल की कहानी में जबरदस्त सस्पेंस आया है। सेक्स, थ्रिल और सस्पेंस की कहानी में खलनायक एक खूबसूरत औरत है। इस औरत ने पहले अपनी अदाओंं से दारोगा को इश्क के जाल में फंसाया। दारोगा का जिस्म बूढ़ा होने लगा तो उसके दोस्त को अपना हमबिस्तर बना लिया। फिर एक कहानी रची गई। मौत की दास्तां... दारोगा की हत्या के जरिए सरकारी पेंशन, मृतक आश्रित में नौकरी और नए मर्द के साथ बेझिझक इश्क। अफसोस.... मोबाइल फोन की सीडीआर ने खूबसूरत औरत की इच्छा का कत्ल कर दिया।


रोडवेज के ड्राइवर से इश्क करने लगी थी किरन

सीतापुर के पच्चालाल ने हरदोई में तैनाती के दौरान वर्ष 2003 में पड़ोसन किरन से दूसरा ब्याह रचा लिया था। पहली बीवी को पैतृक गांव में रखने वाले पच्चालाल दूसरी बीवी यानी किरन की अदाओं और खूबसूरती पर फिदा थे, इसलिए उसे साथ ही रखते थे। किरन और पच्चालाल की उम्र में ज्यादा अंतर है। इसी कारण पच्चालाल पर बुढ़ापा सवार होने लगा तो किरन का दिल डोलने लगा। पच्चालाल का नौजवान मित्र महेंद्र यादव उर्फ जितेंद्र का घर आना-जाना था। महेंद्र यादव भी सरकारी नौकरी में है, यानी रोडवेज की बस चलाता है। पच्चालाल ने किरन को सरकारी बस अड्डे के निकट के मोहल्ले रेलबाजार में रखा था, जबकि खुद की तैनात शहर से 40 किलोमीटर दूर सजेती थाने में थी। इसी कारण पच्चालाल सप्ताह में दो दिन ही घर आते थे। उधर, महेंद्र अक्सर ही आता-जाता रहता था। मित्र की पत्नी को भाभी के संबोधन से पुकारने वाला महेंद्र अक्सर ही अश्लील मजाक भी करता रहता था। इन्हीं मजाक ने दोनों के बीच नई कहानी को शुरू कर दिया।


दारोगा ने महेंद्र की बाहों में देख लिया था किरन को

पच्चालाल की हत्या की पड़ताल में जुटी पुलिस ने किरन और पच्चालाल के मोबाइल की सीडीआर को निकालकर मोबाइल नंबरों की गणित को सुलझाया तो मालूम हुआ कि पच्चालाल की हत्या के दिन महेंद्र से बात हुई थी। इसके साथ ही महेंद्र की किरन से लगातार कई महीनों से लंबी बातें होती रही हैं। इसी आधार पर पुलिस ने महेंद्र और किरन को हिरासत में लेकर सख्ती के साथ पूछताछ की तो जिस्मानी रिश्तों के साथ-साथ किरन की कहानी सामने थी। किरन ने बताया कि एक दिन पच्चालाल ने महेंद्र के साथ छेड़छाड़ करते देखा तो हंगामा कर दिया था। इसी के बाद पच्चालाल की मौजूदगी में महेंद्र का आना-जाना बंद हो गया, लेकिन चोरी-चुपके दोनों मिलते रहते थे। अलबत्ता डर था कि किसी दिन पच्चालाल फिर पकड़ लेगा। इसी खौफ ने कत्ल की कहानी को रच दिया।


पेंशन और नौकरी के साथ दूसरे मर्द के जिस्म की चाहत

किरन के इरादे खौफनाक थे। पहली बीवी की कुछ साल पहले मौत होने के बाद किरन ने पच्चालाल के साथ कानूनन ब्याह रचा लिया था। फिलहाल, पच्चालाल 58 बरस के थे, ऐसे में डेढ़ साल बाद उन्हें रिटायर होना था। किरन ने साजिश रची कि पच्चालाल को मार दिया जाए तो उनकी पेंशन मिलती रहेगी, इसके साथ मृतक आश्रित में नौकरी। साथ ही महेंद्र यादव के साथ इश्क करने में कोई रोड़ा नहीं रहेगा। इसी साजिश को अंजाम देने के लिए उसने महेंद्र को राजदार बनाया। 02 जुलाई की रात को जितेंद्र ने औरैया निवासी निजाम अली और राघवेंद्र के साथ मिलकर 2 जुलाई को पच्चालाल को मौत के घाट उतार दिया। कानपुर के एसएसपी अखिलेश कुमार ने घटना का खुलासा करने के लिए रेलबाजार थाने के इंस्पेक्टर मनोज कुमार रघुवंशी और घाटमपुर थाने के इंस्पेक्टर दिलीप कुमार बिंद और उनकी टीम को 25 हजार का इनाम दिया है।

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