
Kanpur News :कानपुर के केशवपुरम में 58 वर्षीय उमा कुशवाहा की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। करीब 25 लाख रुपये के जेवर और नकदी लूटकर हत्या किए जाने की आशंका के बीच पुलिस ने चार दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की। आसपास के दो किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली, लेकिन जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची। इसी बीच परिवार के सदस्यों पर संदेह के आधार पर पुलिस मृतका के बड़े बेटे का नार्को टेस्ट कराना चाहती थी। इसके लिए न्यायालय से अनुमति मांगी गई, लेकिन बेटे के स्पष्ट इन्कार के बाद अदालत ने पुलिस का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। अब पुलिस के सामने उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर हत्याकांड का पर्दाफाश करने की चुनौती है।
रावतपुर थाना क्षेत्र के केशवपुरम स्थित हसनपुर निवासी उमा कुशवाहा (58) का शव एक सितंबर की शाम घर के अंदर कुर्सी पर मिला था। घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच तेज की। परिजनों ने घर से करीब 25 लाख रुपये के जेवर और नकदी गायब होने की जानकारी दी थी। इससे हत्या के पीछे लूट की आशंका भी जताई गई।
हत्याकांड का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने घटनास्थल के आसपास करीब दो किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। रिश्तेदारों, परिचितों और पड़ोसियों समेत चार दर्जन से अधिक लोगों से कई दौर में पूछताछ की गई। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों और वारदात के समय इलाके में आने-जाने वाले लोगों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन कोई ऐसा ठोस साक्ष्य हाथ नहीं लगा, जिससे हत्यारों तक पहुंचा जा सके। लूटे गए जेवर और नकदी भी बरामद नहीं हो सके।
जांच के दौरान पुलिस का संदेह परिवार के कुछ सदस्यों पर केंद्रित हुआ। खासतौर पर मृतका के बड़े बेटे से कई बार पूछताछ की गई। विवेचक ने बेटे का नार्को टेस्ट कराने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। पुलिस की ओर से इसमें बेटे की मौखिक सहमति का भी हवाला दिया गया था।हालांकि, न्यायालय में सुनवाई के दौरान मृतका के बड़े बेटे ने नार्को टेस्ट कराने से साफ इन्कार कर दिया। उसने अदालत में कहा कि उसने अपनी मां की हत्या नहीं की है और वह अपना नार्को टेस्ट भी नहीं कराना चाहता। इसके बाद न्यायालय ने पुलिस की ओर से दाखिल अनुमति संबंधी प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इससे पुलिस की नार्को टेस्ट कराने की कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी।
न्यायालय से अनुमति नहीं मिलने के बाद अब पुलिस को दूसरे साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ानी होगी। दो महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो हत्यारों की पहचान हो सकी है और न ही लूटे गए करीब 25 लाख रुपये के जेवर और नकदी का पता चला है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि घर के अंदर वारदात को किसने अंजाम दिया और हत्या के पीछे लूट ही वजह थी या कोई दूसरी रंजिश।
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि मृतका के बेटे का नार्को टेस्ट कराने के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया है।