हादसों का गढ़ बना कटनी, जान से हो रहा खिलवाड़, सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित, मूकदर्शक बने जिम्मेदार
कटनी. जिले में मजदूरों की सुरक्षा और संरक्षा के नियम कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। खदानों, फैक्ट्रियों, दुकानों और गोदामों में मजदूरों से बिना सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा है। नतीजतन आए दिन हादसे हो रहे हैं। कभी मार्बल खदान में दबकर, कभी क्रेशर मशीन में फंसकर तो कभी कंस्ट्रक्शन साइट में हादसे तो कभी लिफ्ट से फंसकर मजदूर काल के गाल में समा रहे हैं। खदान और दाल मिल, राइस मिल में घटनाएं आम हो गई हैं। हाल ही में बिचुआ क्रेशर प्लांट में महिला की मौत से मजदूरों में आक्रोश पनप रहा है।
जिम्मेदार विभागों के रिकॉर्ड की बात करें तो संस्थानों में मजदूरों को हेलमेट, दस्ताने, मास्क और सुरक्षा बेल्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपाय के ही खतरनाक काम करते दिखाई देते हैं। सुरक्षा की इस अनदेखी का खामियाज़ा उन्हें अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। हादसों की बाद कलई खुलकर सामने आ रही हैं। एफआइआर कर फिर विभाग भूल जाते हैं और हादसा होने पर चेतते हैं।
उद्योग विभाग, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग, प्रदूषण विभाग, पुलिस, श्रम विभाग, नगर निगम, प्रशासन से लेकर केंद्र और राज्य सरकार तक किसी ने भी इस दिशा में गंभीर पहल नहीं की है। हादसे लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट और कार्रवाई सिर्फ कागजों में सिमटकर रह जाती है। खदान और फैक्ट्री अधिनियम के तहत मजदूरों को हेलमेट, सेफ्टी शूज़, मास्क और बेल्ट उपलब्ध कराना अनिवार्य है। फैक्ट्रियों में मशीनों पर सेफ्टी गार्ड लगाना जरूरी है। कंस्ट्रक्शन साइट पर लिफ्ट और ऊंचाई वाले कार्यों के लिए फुल बॉडी हार्नेस और सुरक्षा जाल होना चाहिए। खदानों और क्रेशरों में धूल नियंत्रण और सांस सुरक्षा उपकरण आवश्यक हैं। हर मजदूर का चिकित्सा परीक्षण और आपात स्थिति के लिए फस्र्ट एड बॉक्स व एम्बुलेंस उपलब्ध होना चाहिए।
मजदूर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर फैक्ट्री/खदान प्रबंधन पर जुर्माना और संचालन बंद करने की कार्रवाई हो सकती है। श्रम विभाग के नियमों के तहत मजदूर की मौत या गंभीर घायल होने पर प्रबंधन को मुआवजा देना अनिवार्य है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अधिनियम में लापरवाही पर जिम्मेदार अधिकारियों को कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है। मजदूरों को सुरक्षा न देने पर फैक्ट्री मालिक की जिम्मेदारी तय की जाती है, लेकिन कटनी जिले में अब तक सख्त कार्रवाई के उदाहरण नगण्य हैं। लगातार हो रहे हादसों से मजदूर वर्ग और उनके परिवारों में आक्रोश है। उनका कहना है कि जब तक विभाग मौके पर जाकर नियमों के सख्त पालन और दोषियों पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक मजदूर असुरक्षित ही रहेंगे।
अप्रेल माह में बड़वारा क्षेत्र के ग्राम भादावर स्थित छुही खदान धसकने से महिला मजदूर की मौत हो चुकी है। हादसे में सुनीता बाई गौड़ पत तीरथ प्रसाद गौड़ निवासी भादावर की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे में सुरक्षा नियमों की कलई खुलकर सामने आई, फिर भी जिम्मेदार नहीं चेते।
स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र की कृष्णा मार्बल माइंस में 14-15 सितंबर 2024 की रात मार्बल का टुकड़ा गिरने से मशीन ऑपरेटर के चपेट में आने से मौत हो गई थी। इस हादसे में बुद्धिमान कोल की मौत हो गई थी। इस गंभीर हादसे के बाद भी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया।
जून 2023 में स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र के त्रिवेणी मार्बल माइंस में घटना सामने आई थी। यहां पर मार्बल की चट्टान गिरने के कारण कछारगांव के लल्लू उर्फ दुलारे की चट्टान में दबने के कारण मौत हो गई थी। लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी सुरक्षा पर फोकस नहीं है।
6 दिसंबर 2020 को लमतरा इंडस्ट्रियल एरिया में बड़ा हादसे सामने आया था। यहां पर तेज धमाके के साथ नारायणी दाल मिल में आग लग गई थी। हादसे में कई मजदूर फंस गए थे और मजदूर ओमगौड़ जिंदा जल गया था। इसके बाद क्षेत्र में कई हादसे हुए, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था नजरअंदाज की जा रही है।
कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सुभाष चौक में बर्तन गोदाम की लिफ्ट में गर्दन फंस जाने के कारण 6 मार्च 2024 को एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो चुकी है। सोनू निषाद नामक युवक काल कलवित हो चुका है। इसके साथ ही 3 मार्च 25 को धपई गांव में संचालित आटा मिल में संचालित लिफ्ट में फंसने से महिला मजदूर की मौत हो चुकी है। पूजा पति प्रदीप केवट की मौत हो चुकी है। मजदूर की सुरक्षा में लापरवाही सामने आई, फिर भी सुरक्षा पर ध्यान नहीं है।
माधवनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत शारदा रिफैक्ट्री में 29 अगस्त को ऊंचाई से काम करते वक्त गिरने के करण मजदूर की मौत हो गई है। इसमें अमन बर्मन पिता मुन्ना बर्मन प्रोफाइल सीट में वैल्डिंग करने के दौरान काल कलवित हो चुका है। घर का चिराग बुझ गया है, फिर भी फैक्ट्रियों में सुरक्षा की अनदेखी हो रही है व फैक्ट्री संचालक बचाए जा रहे हैं।
माधवनगर थाना अंतर्गत पुलिस चौकी निवार क्षेत्र के ग्राम बिचुआ-भानपुरा न. 2 में 11 सितंबर को क्रेशर प्लांट में दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में एक महिला की हापड़ टूटकर गिरने से भारी मलमे में दबकर मौत हो गई। रश्मी बाई पति शिवकुमार राजभर निवासी ग्राम खिरवा क्रेशर प्लांट में दबकर काल कलवित हो गई है। सुरक्षा मानक तार-तार हुए हैं।
माधवनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित होने वाली अनिल इंडस्ट्रीज में 4 जुलाई को करंट लगने से श्रमिक की मौत हो गई थी। राजेंद्र पटेल पिता जीवनलाल पटेल (50) निवासी देवसरी इंदौर थाना विजयराघवगढ़ अनिल इंडस्ट्रीज में काम करते थे। मशीन चालू करते समय करंट लगने से मौत हो गई थी।
ये भी हो चुके हैं हादसे
वर्जन
फैक्ट्री, खदान सहित सभी संस्थानों में मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए, इसके लिए संबंधित विभागों को नियमित रूप से जांच करने और लापरवाही पाए जान पर कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
शिशिर गेमावत, प्रभारी कलेक्टर।