
कटनी. गौवंश की सुरक्षा और संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई गौशाला की पहल से अब खेती भी संवरेगी। आधुनिक युग में किसान मशीनों से ही खेती कर रहे हैं, लेकिन अब सरकार उपकरणों के स्थान पर खेती में बैल व नाटों के प्रयोग को भी बढ़ावा देने के लिए पहल कर रही है। गौशाला में जो भी बैल और नाटा पहुंचेंगे उन्हें किसानों के बतौर अनुबंध दिया जाएगा। खास बात यह है कि किसानों को बैल और नाटा मुफ्त में मिलेंगे, जिससे वे आसानी से खेत तैयार कर सकेंगे। इसके लिए संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा आयुक्त व नगर परिषद अधिकारियों को गौशाला स्थापना के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। इसको लेकर नगर निगम व परिषदों द्वारा तैयारी शुरू कर दी गई है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र के नगर मुख्यालयों व गांवों में आवारा पशुओं की काफी समस्या है। आवारा मवेशी शहर की सड़कों पर विचरण कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ हादसे हो रहे हैं बल्कि कई प्रकार की समस्याएं निर्मित हो रही हैं। घुमंतु और निराश्रित गौवंश के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू हो रही है। खास बात यह है कि केंद्रों में गोबर से लकड़ी का निर्माण मशीनों के माध्यम से होगा। इसकी सप्लाई श्मशान में शवदाह के लिए होगी। केंद्रों में तैयार जैविक खाद का उपयोग नगर के उद्यानों व वृक्षारोपण में होगा।
होगी यह खास पहल
नगरीय निकाय अपने क्षेत्र में कांजी हाउस सह गौशाला की स्थापना स्वयं के स्त्रोतों से करेंगे, साथ ही नगर में ऐसे शासकीय संस्थान जहां शेड, जल तथा बाउंड्री का व्यवस्था है उसका गौशाला के लिए प्रयोग होगा। जहां कांजीहाउस संचालित हैं उनका गौशाला के रूप में विस्तार किया जाएगा। कांजी हाउस सह गौशाला में एक कक्ष ऐसा होगा जहां पर बीमार व घायल मवेशियों का उपचार होगा। प्रत्येक गौशाला में 100 से अधिक गौवंश रखने के लिए व्यवस्था होगी।
इनका कहना है
नगर निगम व नगर परिषद क्षेत्र में गौशाला की स्थापना के लिए निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस दिशा में पहल शुरू कर दी गई है। गौवंश की सुरक्षा सहित गोबर से लकड़ी तैयार होगी। बैल व नाटों को खेती के लिए किसानों को दिया जाएगा।
आरपी सिंह, आयुक्त नगर निगम।