भयभीत न हों, रखें विशेष सावधानी, सोशल मीडिया में भेजें सकारात्मक संदेश, शहर के सेवानिवृत्त चिकित्सक, विशेषज्ञ ने रखी अपनी बात, कहा कि समझदारी व सुरक्षा अपनाकर ही हरा पाएंगे महामारी
कटनी. वैश्विक महामारी की दूसरी लहर से समाज में भय का माहौल निर्मित हो गया है। इसकी मुख्य वजह है लोगों के चारो तरफ कोविड के कारण मिल रहे खराब संदेश हैं। लोग भयभीत हो गए हैं। यह वक्त डरने, भयभीत होने का नहीं बल्कि पूरी सकारात्मक ताकत के साथ महामारी से लडऩे का है। शासन-प्रशासन द्वारा तय गाइड लाइन का पालन करते हुए हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी है, क्योंकि अब लोगों की सुरक्षा व्यवस्था महकमा व प्रशासन के बूते की बात नहीं रहे गई है। संपूर्ण लॉकउाउन के बाद भी महामारी की चैन जिले में नहीं टूट रही। हर दिन रिकॉर्ड मरीज सामने आ रहे हैं। गौर करने वाली बात तो यह है कि स्वास्थ सुविधाओं और व्यवस्थाओं में इजाफा जैसा कुछ भी नजर नहीं आ रही। सोशल मीडिया में चलने वाले संदेशों से लोग और डर रहे हैं। ऐसे में वक्त है लोगों को सकारात्मक संबल देने का और लोगों को संक्रमण से बचाने का। जिला चिकित्सालय से सेवानिवृत्त सीएस डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि इस बार कोरोना संक्रमण से कोई कोना नहीं बचा है। इस लिए सावधानी बहुत जरूरी है। युवाओं में सजगता बेहद जरूरी है, सावधानी और समझदारी बेहद आवश्यक है। पिछली बार 60 प्लस ज्यादा थे, इस बार युवाओं को भी संक्रमित तेजी से कर रहा है। लोग बहुत आवश्क होने पर ही निकलें, मास्क लगाए, सामाजिक दूरी का पालन करें। लोग सोशल मीडिया में सकारात्क संदेश जारी करें। घर पर लोग गर्म पानी से कुल्ला व हल्दी-नमक के गरारे करते रहें। मल्टीविटामिन, जिंक, बी-काम्पलेक्स, विटामिन सी एम्युनिटी के लिए लेते रहें। सुबह-शाम भांप आवश्य रूप से लेकि, ताकि वायरस घातक न हो। बुखार तेजी से आ रहा है। अब 10 दिनों तक असर रह रहा है। तीसरे-चौथे दिन सीटी स्कैन में कम संक्रमण दिखता है, बाद में बढ़ जाता है। ऑक्सीजन लेवल 95 से कम होने पर ही अस्पताल जाएं। शासन द्वारा तय उपचार का प्रोटोकाल अवश्य पालन करें।
एकसाल बाद भी बेपरवाही
तिलक कॉलेज की प्रोफेसर चित्रा प्रभात ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि जब महामारी आई हो। इस फेज से निपटने के लिए मेडीटेशन और अध्यात्म की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। जरुरत से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग न करें। लोगों को खुद को संयमित रखना होगा। इस देश को अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। सरकार ने एक साल तक लोगों को सिखाया, इसके बाद भी बेपरवाही हो रही है। अपने ही घरों में रहकर समाज को बचाने प्रयास करें। बहुत ज्यादा घृणा न करें, संक्रमित से दूरी न बनाएं। तनाव को कम करने के लिए प्रयास करना होगा। सुबह प्राणायाम करें। धैर्य बनाकर रखना है। जो समय आया है वह जाएगा, पीड़ादायक समय है, इसमें सभी को अंतरमन को शुद्ध करना होगा। सोशल मीडिया, अच्छी डाक्यूमेंट्री देखें, पुस्तकें पढ़ें, बेवजह के संदेशों से बचें। खुद को नियमित करें। अवसाद तभी आते हैं जब समाज में घटना व विपरीत स्थिति निर्मित होती हैं, संयम बेहद आवश्यक है। अस्पताल जाने की नौबत कम आए इसमें घर के मुखियों को बदलाव लाना होगा। अब एकबार फिर घर-घर टेस्टिंग होना आवश्यक है।