26 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मिलर्स नहीं कर रहे धान की मिलिंग, गोदाम हैं फुल, एक लाख 8 हजार मीट्रिक टन गेहूं के लिए नहीं वेयरहाउस

खुले में भी धान रखे होने से हो रही बर्बाद, चोरी का भी बढ़ा हुआ है खतरा, गेहूं खरीदी शुरू होने से भंडारण में होगी समस्या, नागरिक आपूर्ति निगम व प्रशासन ने समय पर नहीं दिया ध्यान, अब गोदामों की हो रही है समस्या

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Apr 24, 2026

Wheat procurement affected due to the lack of paddy milling

Wheat procurement affected due to the lack of paddy milling

कटनी. जिले में 15 अपे्रल से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी जारी है। केंद्रों में बंपर आवक शुरू हो गई है। वहीं दूसरी ओर गेहूं के भंडारण को लेकर जल्द ही गंभीर समस्या निर्मित होने वाली है, इसकी मुख्य समस्या समय पर समर्थन मूल्य में किसानों से खरीदी गई धाना की मिलिंग न हो पाना है। धान की मिलिंग न होने से गोदाम खाली नहीं हो पाए और अब गेहूं को सुरक्षित करने में खाद्य विभाग, विपणन विभाग व प्रशासन के समक्ष गंभीर समस्या होगी। बता दें कि जिले में 4 लाख 95 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। अभी तक सिर्फ 50 हजार मीट्रिक टन धान की मिलिंग हो पाई है। 8 लाख क्विंटल धान की मिलिंग के लिए अनुबंध हो गए हैं। जिले में 65 मिलर्स ही अनुबंधित हैं। मिलर्स ने अपग्रेडेशन राशि जारी करने, ट्रायल मिलिंग के आधार पर वास्तविक मिलिंग करवाने, बारदाना उपयोगिता व्यय के राज्यांश का लंबित भुगतान और परिवहन व्यय में संशोधन जैसी मांगों पर अड़े हुए हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

यह है वेयर हाउसों की स्थिति

बता दें कि जिले में किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदकर सुरक्षित भंडारित कराने के लिए बड़ी चुनौती है। एक लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूं भंडारित कराने के लिए गोदाम की आवश्यकता है, लेकिन मध्यप्रदेश वेयर हाउस प्रबंधन के पास सिर्फ 32 हजार मीट्रिक टन की जगह ही उपलब्ध कराई गई है।

करना पड़ेगा अंतरजिला परिवहन

यदि मिलर्स द्वारा समय पर धाना का उठाव कर मिलिंग नहीं की जाती तो फिर समस्या जिले में गंभीर होगी। गेहंू रखने के लिए प्रशासन के पास जगह ही नहीं है। ऐसे में प्रशासन के पास विकल्स के तौर पर अंतरजिला परिवहन की प्रक्रिया अपनानी होगी। इस प्रक्रिया में परिवहन में करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ेंगी।

54 हजार से अधिक किसानों ने कराया है पंजीयन

सरकार को समर्थन मूल्य में गेहूं सहित चना, मसूर, सरसों बेचने के लिए 54 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। कुल 54 हजार 28 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। बहोरीबंद में 11046, ढीमरखेड़ा में 9842, विजयराघवगढ़ मं 6871, रीठी में 5659, स्लीमनाबाद में 5386, बड़वारा में 5223, बरही में 4210, कटनी नगर में 2998 कटनी तहसील में 27 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है।

कई जिलों में जाता है कटनी से चावल

कटनी का चावल कई जिलों में जाता है। जानकारी के अनुसार इंदौर, भोपाल, शिवपुरी, डबरा, भिंड, मुरैना, धार, टीकमगढ़, निमाड़ी, छतरपुर, रायसेन, पन्ना, दमोह, सागर, सिवनी, अलीराजपुर सहित अन्य जिलों में डिमांड अनुसार चावल की सप्लाई रैक के माध्यम से की जाती है। ऐसे में अन्य जिलों की भी सप्लाई प्रभावित होगी।

मिलर्स की ये हैं शर्तें

राइल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक आसरानी ने बताया कि मिलर्स ने अपनी बात खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अपर मुख्य सचिव (खाद्य) से मुलाकात कर बताई है। उन्होंने कहा कि पल्लेदारी के नाम पर मात्र 4.76 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान किया जा रहा है, जबकि वास्तविक खर्च 24 से 25 रुपए प्रति क्विंटल तक आता है। परिवहन भाड़े को लेकर भी असंतोष है। 15 किलोमीटर का परिवहन खर्च लगभग 1800 रुपये पड़ता है, लेकिन भुगतान केवल 8 किलोमीटर के हिसाब से किया जा रहा है। ऊपर से ट्रकों की दो-दो दिन की हॉल्टिंग से अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। सबसे गंभीर मुद्दा चावल रिकवरी का है। मिलर्स के अनुसार एक क्विंटल धान से औसतन 50 किलो चावल निकल रहा है, जबकि सरकार 67 किलो चावल जमा कराने की शर्त रख रही है।

फैक्ट फाइल

  • 52991 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए कराया है पंजीयन।
  • 2 लाख मीट्रिक टन गेहूं के खरीदी का है अनुमानित लक्ष्य।
  • 20 हजार क्विंटल चावल की हर माह पीडीएस दुकानों में है खपत।
  • 09 लाख हैं जिलेभर में गेहूं और चावल के पीडीएस दुकानों में हितग्राही।
  • 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का हो रहा है उपार्जन।

वर्जन

जिले में धान की तेज मिलिंग न होने के कारण समस्या तो है। धान की मिलिंग के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गेहूं भंडारण के लिए 45 हजार मीट्रिक टन तक साइलों में भंडारण होगा। कुछ वेयर हाउस खाली हैं। लगभग 65 मीट्रिक टन की जगह उपलब्ध हो पाएगी। एफसीआई की पांच रैक खाली हो रही हैं तो कुछ जगह खाली होगी। जरुरत पडऩे पर अंतरजिला भंडारण कराया जाएगा।

आशीष तिवारी, कलेक्टर।