
Rehabilitation leases expire two years from now
बालमीक पांडेय @ कटनी. शहर के माधवनगर क्षेत्र में रहने वाले सिंधी समाज के सैकड़ों परिवार आज प्रशासनिक लापरवाही के कारण असमंजस और असुरक्षा के दौर से गुजर रहे हैं। 1993-94 में पुनर्वास के तहत दिए गए आवासीय पट्टों की मियाद समाप्त हुए 2-3 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि करीब 1734 परिवारों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि कुछ माह पहले प्रशासन ने नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू भी की थी। लगभग 250 लोगों ने निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से करीब ढाई करोड़ रुपए शासन के खजाने में जमा कर दिए, लेकिन इसके बाद पूरी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अब तक महज 3 पट्टों का ही नवीनीकरण किया गया है, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बता दें कि धारणा अधिकारी के तहत भी 3200 आवेदन हुए थे, जिनमें से सिर्फ 400 लोगों को ही पट्टे मिले हैं। 500 से अधिक प्रकरण कलेक्ट्रेट में फाइलों में कैद हैं।
पट्टों की लीज समाप्त होने के कारण अब रहवासियों को कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जमीन का वैधानिक स्वामित्व समाप्त होने की स्थिति में लोग न तो बैंक से लोन ले पा रहे हैं और न ही अपनी संपत्ति के संबंध में अन्य कोई निर्णय। धारणा अधिकारी के तहत जारी आदेशों में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद नवीनीकरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही। इसमें आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रीमियम तय कर वारिसानों को अधिकार देने की व्यवस्था है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस दिशा में सक्रियता नहीं दिखा रहा। स्थिति यह है कि लोग पिछले 2-3 वर्षों से बिना वैध पट्टे के रह रहे हैं, जिससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।
जहां एक ओर प्रदेश के अन्य जिलों में पट्टा नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, वहीं कटनी में राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालय, एडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में फाइलें धूल फांक रही हैं। प्रशासन की इस लापरवाही से न सिर्फ हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सिंधी समाज के लोग लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है माधवनगर का यह मामला प्रशासनिक ढिलाई का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है, जहां जनता अपने अधिकार के लिए दर-दर भटक रही है और जिम्मेदार तंत्र मौन साधे बैठा है। जनप्रतिनिधि भी सिर्फ चुनाव के समय राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं।
नंदलाल टहलरामानी पूज्य पंचायत सिंधी समाज हाउसिंग बोर्ड वैदिक कॉलोनी अध्यक्ष का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लोगों से करोड़ों रुपए की राशि वसूल ली गई, तो फिर पट्टा जारी करने में इतनी देरी क्यों? पड़ोसी जिलों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन कटनी में जिम्मेदार अधिकारी फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक घुमाने में व्यस्त हैं। हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता कितनी कम हो गई है।
इस पूरे मामले में वीरेंद्र तीर्थानी अध्यक्ष पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत का कहना है कि 1994 में सिंधी समाज के लोगों को पट्टे मिले थे। दो साल से लीज खत्म है। लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया नहीं हो रही। अपनी तरफ से हम लोग लगातार मांग कर रहे हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को समस्या बता चुके हैं। सैकड़ों लोगों ने चालान भी जमा कर दिया है, लेकिन शासन-प्रशासन ढीला है। मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। धारणा अधिकार में भी सिर्फ 27 पट्टे ही बटे हैं। हालांकि इसके पक्ष में हम लोग नहीं हैं। क्योंकि यह नियम पुनर्वास के लिए लागू नहीं है। यह झुग्गी-झोपणी के लिए है। हमारे पूर्वजों ने जो पाकिस्तान में जमीन छोडकऱ आए थे, इसके एवज में यहां पर केंद्र सरकार ने हमें जमीन दी थी। इसलिए हमें इसका मालिकाना हक मिलना चाहिए।
1731 पुनर्वास पट्टों नवीनीकरण के लिए आवश्यक प्रक्रिया कराई जा रही है। शीघ्र ही पट्टे जारी कराए जाएंगे। धारणा अधिकारी के तहतभी पट्टे जारी करने आवेदन हुए हैं, जिनका सत्यापन कराया गया है। उनमें भी आवश्यक कार्रवाई चल रही है।
Updated on:
15 Apr 2026 08:52 am
Published on:
15 Apr 2026 08:51 am
