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ये गलियां, ये चौबारा: जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और बदहाल स्मारक से जूझ रहा डेढ़ सौ साल पुराना गोलबाजार

शहर के सबसे पुराने बाजार में प्रसाधन की कमी, ई-रिक्शा-आटो की धमाचौकड़ी और अतिक्रमण बनी बड़ी समस्या, फिर भी खरीदारी का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है गोलबाजार

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 27, 2026

Serious Problems in Golbazar Katni

Serious Problems in Golbazar Katni

कटनी. दिनभर लगने वाला जाम, अव्यवस्थित पार्किंग, सडक़ तक फैला सामान, रात में स्मारक परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और प्रसाधन की गंभीर कमी। शहर के हृदय स्थल पर बसे डेढ़ सौ साल पुराने गोलबाजार की यही तस्वीर आज व्यापारियों और ग्राहकों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। बावजूद इसके गोलबाजार आज भी कटनी का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त बाजार बना हुआ है, जहां कपड़े से लेकर किराना, अनाज, फल-सब्जी और घरेलू जरूरत का लगभग हर सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाता है। अद्र्ध चंद्राकार स्वरूप में बना यह ऐतिहासिक बाजार अंग्रेजी शासनकाल की पहचान माना जाता है। शहर के पुराने व्यापारिक केंद्रों में शामिल गोलबाजार में सुबह सबसे पहले दुकानें खुलती हैं और देर रात तक खरीदारों की भीड़ बनी रहती है। त्योहारों और विवाह सीजन में यहां पैर रखने तक की जगह नहीं बचती।

1872 में अंग्रेजों ने कराया था बाजार स्थापित

इतिहास के जानकारों के अनुसार वर्ष 1872 में अंग्रेजों ने गोलबाजार की स्थापना कराई थी। उस समय स्टेशन के नजदीक होने के कारण व्यापारियों को आने-जाने में सुविधा मिलती थी। पर्याप्त खुला क्षेत्र होने से अनाज, कपड़ा और किराना व्यापार तेजी से बढ़ा। धीरे-धीरे यह बाजार कटनी ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों के व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी लोग दूर-दराज क्षेत्रों से यहां थोक और फुटकर खरीदी करने पहुंचते हैं। विशेष रूप से कपड़ा बाजार पूरे साल ग्राहकों से गुलजार रहता है।

त्योहारों के साथ बढ़ जाती है रौनक

त्योहारों गोलबाजार की रौनक कई गुना बढ़ जाती है। कपड़ा, पूजन सामग्री, व्रत का सामान, किराना और सजावटी वस्तुओं की खरीदी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। दीपावली और विवाह सीजन तक बाजार पूरी तरह व्यस्त रहता है। व्यापारियों ने भी त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त स्टाक मंगाना शुरू कर दिया है।

आटो और ई-रिक्शा से दिनभर जाम

व्यापारियों का कहना है कि बाजार की सबसे बड़ी समस्या अनियंत्रित यातायात है। मुख्य मार्ग से आटो और ई-रिक्शा बाजार के भीतर प्रवेश कर दिनभर जाम की स्थिति बनाते हैं। सवारी बैठाने और सामान उतारने-चढ़ाने के कारण ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होती है। इसके साथ ही अव्यवस्थित पार्किंग ने समस्या और बढ़ा दी है। बाजार के बीचोंबीच रखा नगर निगम का बड़ा टपरा भी आवाजाही में बाधा बन रहा है।

एक सुलभ काम्पलेक्स पर पूरा बाजार निर्भर

इतने बड़े बाजार में प्रसाधन के नाम पर केवल एक पुराना सुलभ काम्पलेक्स है। गोलबाजार के साथ आसपास के बाजारों के लोग भी उसी पर निर्भर हैं। भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम ने शापिंग काम्पलेक्स तो बनाया, लेकिन उसकी सीढिय़ों की छपाई तक पूरी नहीं कराई गई। रखरखाव के अभाव में भवन धीरे-धीरे जर्जर हो रहा है।

स्मारक और पार्क में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा

गोलबाजार को सुंदर बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने यहां छोटा पार्क और राष्ट्रीय स्मारक विकसित कराया था। समाजसेवी स्व. लल्लू भैया की प्रतिमा भी स्थापित की गई, लेकिन देखरेख के अभाव में अब यह क्षेत्र असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। व्यापारियों के अनुसार रात में यहां नशाखोरी होती है। पार्क के चारों ओर ठेले लगने से उसकी सुंदरता खत्म हो गई है। स्मारक का हिस्सा टूटकर गिर चुका है, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं कराई गई।

व्यापारियों ने बताई बाजार की पीड़ा

स्थानीय व्यापारी राम जोधवानी ने कहा कि गोलबाजार शहर का सबसे महत्वपूर्ण बाजार है, जहां लोगों को एक ही स्थान पर हर सामग्री मिल जाती है। उन्होंने कहा कि पार्किंग व्यवस्था सुधारने और बीच में रखे टपरे को हटाने की जरूरत है। व्यापारी शरद विश्वकर्मा के अनुसार अंग्रेजी शासनकाल में स्थापित यह बाजार ऐतिहासिक महत्व रखता है, लेकिन पार्क और स्मारक की हालत लगातार खराब हो रही है। रात में असामाजिक तत्वों के जमावड़े पर रोक लगाना जरूरी है। वहीं व्यापारी अजय आहूजा ने कहा कि इतने बड़े बाजार में प्रसाधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। साथ ही सडक़ तक सामान रखने वालों पर नियंत्रण, व्यवस्थित पार्किंग और आटो-ई-रिक्शा के प्रवेश पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।