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शहर व जिले में 59 हजार स्मार्ट मीटर इंस्टॉल, रुकी बिजली चोरी, खत्म हुई एवरेज बिलिंग की परेशानी

97 हजार से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य, उपभोक्ताओं और विभाग दोनों को फायदा, सरकारी विभागों में 95 फीसदी से अधिक मीटर लगे, 1600 घरों में लगाए क्रॉस चेक के लिए पुराने मीटर, विरोध का भी करना पड़ रहा कंपनी को सामना

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 27, 2026

Fifty-nine thousand smart meters installed in Katni district

Fifty-nine thousand smart meters installed in Katni district

कटनी. बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू की गई स्मार्ट मीटर योजना अब कटनी जिले में असर दिखाने लगी है। शुरुआती दौर में भारी विरोध और भ्रम के बावजूद अब उपभोक्ताओं के साथ-साथ बिजली विभाग को भी इसका लाभ मिल रहा है। स्मार्ट मीटर लगने से बिजली चोरी पर रोक लग रही है, वहीं उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के अनुसार बिल मिल रहे हैं।
बिजली कंपनी के अनुसार पहले चरण में जिले में 39 हजार 192 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 36 हजार 586 मीटर लगाए जा चुके हैं। वहीं दूसरे चरण का कार्य भी शुरू हो चुका है। दूसरे फेज में 61 हजार 851 मीटर लगाए जाने हैं, जिनमें से अब तक 22 हजार 440 मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

चेक मीटर से मिट रहा संदेह

स्मार्ट मीटर लगाए जाने के दौरान शुरुआत में कई क्षेत्रों में विरोध देखने को मिला था। कई उपभोक्ताओं ने मीटर बदलने से इनकार कर दिया था और कुछ स्थानों पर प्रदर्शन भी किए गए। लोगों के मन में यह डर था कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिल मनमाने तरीके से बढ़ जाएंगे। हालांकि अब धीरे-धीरे यह भ्रांति दूर हो रही है। बिजली विभाग ने ऐसे लगभग 1600 उपभोक्ताओं के यहां पुराने मीटर और स्मार्ट मीटर दोनों को समानांतर रूप से लगाकर बिजली खपत का परीक्षण किया। जांच में दोनों मीटरों की रीडिंग लगभग बराबर पाई गई, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है। उपभोक्ता पंकज दुबे, जतिन मूलचंदानी आदि का कहना है कि अब उन्हें एवरेज बिल की समस्या से राहत मिली है। पहले मीटर रीडर द्वारा अनुमानित रीडिंग के आधार पर बिल दिए जाते थे, लेकिन अब जितनी बिजली उपयोग हो रही है, उतना ही बिल आ रहा है। इससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है।

उपभोक्ताओं को मिल रही विशेष छूट और सुविधाएं

स्मार्ट मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी कई तरह की सुविधाएं भी दे रही है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली उपयोग करने पर 20 प्रतिशत तक टीओडी (टाइम ऑफ डे) छूट दी जा रही है। इसके अलावा पॉवर फैक्टर रिबेट का लाभ भी उपभोक्ताओं को मिल रहा है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत की जानकारी मोबाइल एप और ऑनलाइन माध्यम से भी देख पा रहे हैं। इससे बिजली बचत की आदत भी बढ़ रही है।

विभाग को भी मिल रहा फायदा

बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिन क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां बिजली खपत का सटीक विश्लेषण संभव हो पा रहा है। इससे यह पता चल रहा है कि किस क्षेत्र में बिजली की अधिक खपत हो रही है और कहां लोड बढ़ाने की जरूरत है। खपत बढऩे वाले क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है ताकि ओवरलोड की समस्या कम हो सके। स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी की घटनाओं में भी कमी आई है, क्योंकि अब रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है।

सोलर पैनल उपभोक्ताओं के लिए भी फायदेमंद

स्मार्ट मीटर सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं। पहले सोलर कनेक्शन के लिए अलग से मीटर लगवाना पड़ता था, लेकिन अब स्मार्ट मीटर सीधे सोलर सिस्टम से कनेक्ट हो रहे हैं। यह मीटर सोलर ऊर्जा की खरीद और बिक्री दोनों में मदद कर रहे हैं। उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज सकते हैं और उसका लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।

शासकीय भवनों में इंस्टॉल

बिजली कंपनी ने शासकीय भवनों में शत-प्रतिशत स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक 95.44 प्रतिशत सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इससे शासकीय भवनों में त्रुटिरहित बिलिंग हो रही है और बिजली खपत की निगरानी आसान हुई है। हालांकि अभी भी कई क्षेत्रों में लोगों के मन में स्मार्ट मीटर को लेकर शंकाएं बनी हुई हैं। ठेका कंपनी के कर्मचारी जब किसी मोहल्ले में मीटर बदलने पहुंचते हैं तो कहीं-कहीं विरोध की स्थिति बन जाती है। विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर भ्रांतियां दूर करने का प्रयास कर रहा है।

वर्जन

स्मार्ट मीटर पूरी तरह पारदर्शी तकनीक पर आधारित हैं। इससे उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के अनुसार बिल मिल रहा है और बिजली चोरी पर भी प्रभावी नियंत्रण हो रहा है। जिन उपभोक्ताओं को संदेह था, वहां पुराने और नए मीटर की रीडिंग मिलान कराई गई, जिसमें समान परिणाम मिले हैं। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से जोड़ा जाए ताकि बिजली व्यवस्था और बेहतर बनाई जा सके।

मुकेश मोहबे, डीई शहर।