23 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस जिले से विदेश जाने के लिए जबलपुर-सतना व सागर के काट रहे चक्कर, समय और पैसे की दोहरी मार

हवाई पट्टी तो दूर की कौड़ी, नसीब नहीं हो पा रहा पासपोर्ट कार्यालय, विकास की दौड़ में पीछे शहर, सांसद का पत्राचार भी बेअसर, व्यापारिक हब होने के बावजूद मूलभूत सुविधा का अभाव

3 min read
Google source verification

कटनी

image

Balmeek Pandey

Apr 23, 2026

Planes and helicopters will fly over more than 50 locations in MP

Planes and helicopters will fly over more than 50 locations in MP (Photo-ANI)

कटनी. औद्योगिक, खनिज और व्यापारिक गतिविधियों के लिए प्रदेश में पहचान रखने वाला कटनी जिला आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। जिले को अब तक न तो हवाई पट्टी की सौगात मिल सकी है और न ही पासपोर्ट सेवा केंद्र जैसी आवश्यक सुविधा। इससे न केवल आम नागरिक बल्कि व्यवसायिक वर्ग भी खासा परेशान है।
कटनी को रेलवे का बड़ा जंक्शन होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन हवाई कनेक्टिविटी के मामले में यह जिला पूरी तरह पिछड़ा हुआ है। हालात यह हैं कि यहां के लोगों को पासपोर्ट बनवाने के लिए भी दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है। विदेश यात्रा या व्यवसाय के लिए पासपोर्ट बनवाना अब जरूरत बन चुका है, लेकिन जिले में सुविधा न होने से लोगों को जबलपुर, सतना, भोपाल या सागर तक जाना पड़ता है।

जटिल प्रक्रिया ने बढ़ाई परेशानी

पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया पहले से ही जटिल मानी जाती है, लेकिन कटनीवासियों के लिए यह और भी कठिन हो गई है। आवेदक को पहले ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, इसके बाद दस्तावेज सत्यापन के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता है। सत्यापन के लगभग एक सप्ताह बाद पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू होती है, जो थाना और एसपी कार्यालय से होकर गुजरती है। इस पूरी प्रक्रिया में समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। जानकारी के अनुसार जिले से रोजाना 8 से 10 लोग पासपोर्ट प्रक्रिया के लिए बाहर जाते हैं। स्लॉट मिलने की अनिश्चितता के कारण कई बार लोगों को बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं।

व्यापारिक शहर होने के बावजूद उपेक्षा

कटनी को प्रदेश का प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। यहां का व्यवसायिक नेटवर्क देश ही नहीं, विदेशों तक फैला हुआ है। ऐसे में पासपोर्ट सेवा केंद्र की जरूरत और भी बढ़ जाती है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं। प्रदेश में पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, खजुराहो और सिंगरौली जैसे शहर आपस में जुड़ चुके हैं, लेकिन कटनी अब भी इस सुविधा से वंचित है।

सांसद का पत्र भी नहीं दिला सका राहत

कटनी में पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने के लिए सांसद वीडी शर्मा ने 31 जनवरी 2024 को विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर को पत्र लिखा था। पत्र में जिले की व्यापारिक और औद्योगिक महत्ता का हवाला देते हुए केंद्र खोलने की मांग की गई थी, लेकिन नियम-कानून की पेचीदगियां बताते हुए असंभव बता दिया गया है।

जनता की मांग-अब और इंतजार नहीं

कटनी के नागरिक लंबे समय से पासपोर्ट सेवा केंद्र और हवाई पट्टी की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जिले में यह सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और पर्यटन के नए रास्ते भी खुलेंगे। सरकार और जनप्रतिनिधि इस दिशा में कब ठोस पहल करते नहीं दिख रहे। लोगों को यूं ही दूसरे जिलों के चक्कर काटते रहना पड़ेगा।

सुविधा न होने पर शहरवासियों की प्रतिक्रिया

विदेशी कारोबार, पढ़ाई करने वालों व घूमने वालों के लिए पासपोर्ट जरूरी है, लेकिन हर बार लोगों जबलपुर व अन्य शहर जाना पड़ता है। एक काम के लिए दो-दो दिन खराब हो जाते हैं। अगर कटनी में केंद्र खुल जाए तो बड़ा फायदा होगा।

कैलाश पाठक, समाजसेवी।

कोई पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहता है तो कोई व्यवसायिक प्रयोजन के लिए, लेकिन पासपोर्ट बनवाने में ही इतनी परेशानी होती है कि कई बार लोगों को प्रक्रिया टालनी पड़ती है। शहर में यह सुविधा अवश्य होनी चाहिए।

रमाकांत दीक्षित, शहरवासी।

ऑनलाइन आवेदन के बाद भी बार-बार दूसरे शहर जाना पड़ता है। किराया, समय और परेशानी अलग। आम आदमी के लिए यह बहुत मुश्किल है। जिम्मेदारों को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

रमेश सोनी, कांग्रेस नेता।

कटनी जैसे बड़े जिले में पासपोर्ट कार्यालय न होना गंभीर विषय है। यहां उद्योग और व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में यह सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए। बच्चे-युवा विदेश जाने की चाहत खूब रखते हैं, इसलिए यह सुविधा आवश्यक है।

महेंद्र शर्मा, सेवानिवृत्त अधिकारी।