इंडियन आर्मी सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस में हुआ चयन, मां की प्रेरणा ने दिलाई मंजिल, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया कटनी का मान
कटनी. जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पे पड़ा तो, ऑटो रिक्शा ट्रेन को चलाने लगी बेटियां..., साहस के साथ अंतरिक्ष तक भेद डाला सुना वायुना उड़ाने लगी बेटिया और कितने उदाहरण ढूंढ कर लाऊ हर क्षेत्र शक्ति आजमाने लगी बेटिया वीर की शहदात को अर्थी को कांधा देकर अब शमशान तक जाने लगीं बेटियां, घर में बंटा के हाथ, रहती हैं मां के साथ, पिता की समस्त बाधा हरती हैं बेटियां, कटु वाक्य बोलने से पूर्व सोचती हैं खूब, मन में सहमती हैं डरती हैं बेटियां, बेटे हो उदंड भले आपका दुखा दें, कष्ट सहके भी धैर्य धरती हैं बेटियां प्रश्न ये ज्वलनशील यह है सबके लिए है आज, नित्य प्रति पल कोख में क्यों मरती हैं बेटियां...। स्कूली परीक्षा में हमेशा टॉप करके उसने बारडोली और कटनी का नाम रोशन किया। कॉलेज में पहुंची तो तो वहां भी सफलता के झंडे गाड़ दिए और पूरे महाकौशल अंचल को गौरवान्वित किया। इसी गौरव ने जब उसके लिए भारतीय सेना के दरवाजे खोले तो वहां भी शानदार प्रदर्शन करके उसने सभी को प्रभावित और मुग्ध कर दिया। बारडोली की यही बेटी अब दुश्मन की छाती पर रडार से मिसाइल दागकर दुश्मनों को धूल चटाते हुए देश का मान बढ़ाएगी। बात हो रही एयर फोर्स की फ्लाइंग ऑफिसर मानसी गेंडा की। उनका चयन ओसाका (सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस) के लिए हुआ है। बेटी के इस कामयामी से राष्ट्रीय स्तर पर बारडोली का मान बढ़ा है।
हमेशा रही टॉपर
आजाद चौक निवासी राजाराम ऊषा गेंडा की बेटी हैं मानसी गेंडा। जिन्होंने हमेशा से ही माता-पिता के उम्मीदों पर न सिर्फ खरी उतरी हैं बल्कि शहर को शोहरत प्रदान की है। २००८ में कक्षा १०वीं में 94.8 प्रतिशत अंकों के साथ प्रदेश में 8वें रैक, 2010 में कक्षा 12वीं में 15 प्रतिशत अंकों के साथ पास होकर प्रदेश में ५वीं रैंक हासिल कर गौरव बढ़ाया था। इसके बाद २०१४ जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रानिक से बीइ करके महाकौशल का नाम रोशन किया। इसके बाद शुरू किया कुछ अलग कर गुजरने का सफर।
दो बार मिली बढिय़ा नौकरी
कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद मानसी ने दिल्ली से कॉम्पीटेटिव एग्जाम देने शुरू किए। कई बार असफलता हाथ लगी लेकिन हार नहीं मानी। इसी बीच मेडिजी कोचिंग सेंटर दिल्ली से नेवी की तैयारी शुरू की। इस दौरान मानसी ने बीएसएनएल एवं इसरो (इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) में ऑफिसर रैंक की नौकी पाई। लेकिन मानसी को ये नौकरी रास नहीं आई साथ में एयरफोर्स के एफकेट एग्जाम को फाइट किया। इस दौरान मानसी को एक चुनौती का भी सामना करना पड़ा वह थी अंग्रेजी। मानसी ने सरस्वती स्कूल हिंदी माध्यम से शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन कमजोरी को ताकत बनाया और तरुण ट्यूटोरियल कोचिंग सेंटर से जितेद्र दुबे के नेतृत्व में फर्राटेदार अंग्रेजी सीखा और रिलेक्सेशन के लिए विवेक विश्वकर्मा के नेतृत्व में सिंगिंग व मौसी हीरामणि बरसैंया के नेतृत्व में मेडीटेशन और योग की शिक्षा प्राप्त की है।
मानसी बनीं फ्लाइग ऑफिसर
इंडियन एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के लिए चयन हुआ। 5 दिन की एसएसबी (सर्विस सिलेक्शन बोर्ड) की फिजिकल एवं मेंटल ट्रेनिंग में पास हुई। 5 दिन का मेडिकल चेकअप राउंड भी हुआ और यहां पर भी परचम लहराया और टॉप लिस्ट में शामिल हुई। १ जनवरी 2017 को ज्वाइन करने के बाद 6 माह तक हैदराबाद में कड़ी ट्रेनिंग प्राप्त की। यहां पर प्रतिदिन 35 किलोमीटर की दौड़, एक्सरसाइज सहित ऑफिसर लाइफ स्टाइल की ट्रेनिंग में ट्रेंड हुईं। एक साल की टैक्निकल ट्रेनिंग के बाद अलग-अलग तरह के विमानों के उड़ाने व उनके काम करने के तरीके सीखे और अब देश के दुश्मनों को सबक सिखाने एकदम बेटी तैयार है।
ओशाका में दिखाएंगी हुनर
बारडोली की बेटी का 2 जून को चयन ओशाका (सेकंड लाइन ऑफ डिफेंस) में हुआ है। इंडियन फोर्स की वह एजेंसी है जो देश के दुश्मनों को नेस्तानाबूत करने का काम करती है। राडार के माध्यम से बेटी देश के दुश्मनों पर मिसाइल दागेगी। मानसी इसकी टेनिंग बड़ोरदा में प्राप्त करेगी।
अपने आप पर होना चाहिए भरोसा
पत्रिका से खास बातचीत में मानसी ने कहा कि मां बचपन से हमेशा ऐसे संस्कार दिए हैं, जिससे आज वह इस मुकाम तक पहुंची है। हमेशा मां ने एक अफसर बनने के लिए क्या बात जरुरी हैं उस पर फोकस करतीं थीं। मानसी ने कहा कि बेटियों बेटों से कम नहीं होतीं कभी भी लोगों को फर्क नहीं करना चाहिए। बेटों से ज्यादा बेटियों में कैपेबिल्टी होती है, बस जरुरत है तो अपने आप में भरोसा रखने की।