
Protest over Drinking Water Shortage
कटनी. सरकार भले ही हर घर नल से जल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन ढाई सौ से अधिक गांव भीषण गर्मी में पानी के लिए त्राहिमाम कर रहे हैं। बहोरीबंद सहित जिले के कई गांवों में जल जीवन मिशन की हकीकत पूरी तरह बदहाल नजर आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा। हालात इतने खराब हैं कि लोग अब पानी के लिए सडक़ पर उतरने और चक्काजाम करने को मजबूर हो चुके हैं।
ऐसा ही मामला शनिवार को विकासखंड क्षेत्र के ग्राम बरतरी-बरतरा में सामने आया, जहां भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत से परेशान महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सुबह करीब 11 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण खाली गुम्मे लेकर बरतरा स्थित जबलपुर-हटा राज्यीय राजमार्ग पर पहुंच गए और सडक़ जाम कर दी। आक्रोशित लोगों ने बीच सडक़ पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर दी और रस्सियों में खाली गुम्मे लटकाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब आधे घंटे तक मार्ग बंद रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बता दें कि जिले में पेयजल समस्या व जल जीवन मिशन की हकीकता को पत्रिका ने सिलसिलेवार उजागर किया है। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला पंचायत सीइओ हरसिमरन प्रीत कौर ने समीक्षा भी की है, इसके बाद भी कई ग्रामीणों को योजना होने के बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में नल-जल योजना का काम पूरा होने के बाद उसे ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया, लेकिन पिछले 22 दिनों से पानी सप्लाई बंद पड़ी है। महिलाएं एक-एक बूंद पानी के लिए दर-दर भटक रही हैं, जबकि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौन बैठे हैं। लोगों का कहना है कि जिले के कई गांवों में यही स्थिति बनी हुई है, लेकिन पीएचई विभाग केवल कागजी दावे कर रहा है। ग्रामीणों ने पीएचई विभाग पर ठेकेदारों को संरक्षण देने और घटिया कार्यों पर आंख मूंदने के आरोप लगाए। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल रहा? यदि योजनाएं सही तरीके से संचालित हैं तो लोग सडक़ पर उतरकर प्रदर्शन करने को क्यों मजबूर हैं।
सूचना मिलते ही दिनेश तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाइश दी और पीएचई अधिकारियों से मोबाइल पर चर्चा कराई। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने चक्कजाम समाप्त किया। प्रदर्शन के दौरान ऋषिराज पटेल, मथुरा चौधरी, जगन्नाथ चौधरी, गोपाल चौधरी, गोपाल पटेल, अमर सिंह पटेल, अनार सिंह पटेल, पूर्व जनपद सदस्य अर्चना मेहरा, क्रांति चौधरी, ललिता चौधरी, उर्मिला चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्राम बरतरा में पेयजल संकट को लेकर हुए चक्काजाम के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब मौके पर पहुंचे सरपंच प्रमोद सिंह को ग्रामीणों ने घेर लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने नल-जल योजना ग्राम पंचायत के अधीन होने के बावजूद गांव में पानी सप्लाई बंद रहने पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना था कि जब योजना पंचायत को सौंप दी गई है तो लोगों को उसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। सवालों के बीच सरपंच असहज नजर आए और कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद ग्रामीणों को शांत कराया गया।
बड़वारा जनपद क्षेत्र के ग्राम लखाखेरा में योजना पूरी बता दी गई है, जबकि हकीकत में अधूरी है। ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने का दावा थोथा है। नेशनल हाइवे मोड़ से लेकर गांव तक दाहिने तरफ जितने भी मकान हैं, उन हितग्राहियों के यहां अबतक कनेक्शन नहीं हुए। ग्रामीणों द्वारा कई साल पहले राशि जमा करा ली गई है, लेकिन पानी के कनेक्शन नहीं दिए जा रहे। दो साल से फसल कटने के बाद ठेकेदार द्वारा कनेक्शन करवा देने की बात कही जा रही थी, लेकिन आजतक योजना को पूरा नहीं किया गया, जिससे कई परिवार के लोग पेयजल के लिए परेशान हैं।
Updated on:
16 May 2026 08:00 pm
Published on:
17 May 2026 07:00 am
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