
Katni Leads in Maternal and Child Safety
कटनी. मातृ एवं शिशु सुरक्षा के क्षेत्र में जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले में संस्थागत प्रसव ने लगभग शत-प्रतिशत आंकड़ा छू लिया है। एचएमआईएस के अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 23 हजार 234 प्रसव दर्ज किए गए, जिनमें से 23 हजार 223 प्रसव अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कराए गए। घर पर प्रसव के केवल 11 मामले सामने आए हैं।
जिले में संस्थागत प्रसव की दर लगभग 100 प्रतिशत रही, जबकि घर पर प्रसव का प्रतिशत महज 0.06 दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग इसे ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता और लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों का परिणाम मान रहा है।
कुछ वर्षों पहले तक ग्रामीण इलाकों में घर पर प्रसव आम बात थी। परिवहन सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और स्वास्थ्य केंद्रों तक दूरी बड़ी चुनौती थी। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदली है। जननी एक्सप्रेस, निशुल्क प्रसव सुविधाएं, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी ने महिलाओं को अस्पतालों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। गर्भवती महिलाओं का पंजीयन होते ही आशा और एएनएम कार्यकर्ता लगातार संपर्क में रहती हैं। प्रसव की संभावित तिथि नजदीक आने पर स्वास्थ्य अमला विशेष निगरानी रखता है और जरूरत पडऩे पर एम्बुलेंस के जरिए महिलाओं को अस्पताल पहुंचाया जाता है।
आंकड़ों के अनुसार कटनी विकासखंड में सबसे अधिक 9 हजार 970 प्रसव दर्ज किए गए, जिनमें केवल एक प्रसव घर पर हुआ। विजयराघवगढ़ विकासखंड ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जहां पूरे वर्ष में एक भी घर पर प्रसव नहीं हुआ। बड़वारा में 3974 में से केवल एक, ढीमरखेड़ा में 2408 में से दो तथा रीठी में 1735 में से केवल एक प्रसव घर पर दर्ज किया गया। बहोरीबंद में घर पर प्रसव के छह मामले सामने आए, जो जिले में सबसे अधिक हैं, फिर भी यहां संस्थागत प्रसव दर 99 प्रतिशत रही।
विकासखंड संस्थागत घर पर कुल प्रसव
कटनी 9969 01 9970
बड़वारा 3973 01 3974
बहोरीबंद 2864 06 2870
ढीमरखेड़ा 2406 02 2408
रीठी 1734 01 1735
विजयराघवगढ़ 2277 00 2277
कुल प्रसव 23,234 11 23,223
विशेषज्ञों के अनुसार संस्थागत प्रसव बढऩे से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं का समय पर इलाज संभव हो पाता है। इससे मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी आती है। अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्टाफ की मौजूदगी से प्रसव सुरक्षित होता है, वहीं जन्म के तुरंत बाद नवजात को आवश्यक देखभाल और टीकाकरण भी मिल जाता है।
जिले में आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर पहुंचकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बैठकें, स्वास्थ्य शिविर और परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए गए। अब लक्ष्य केवल संस्थागत प्रसव तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसव के बाद मां और बच्चे की बेहतर निगरानी, पोषण और नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता में शामिल है।
Updated on:
14 May 2026 08:15 pm
Published on:
14 May 2026 08:06 pm
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