
water problem
बालमीक पांडेय @ कटनी. हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई जल जीवन मिशन जिले में कागजों से पानी पहुंचा रही है। गांवों में करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपए खर्च होने के बावजूद हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आज भी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कहीं नल सूखे पड़े हैं तो कहीं टंकियां शोपीस बनकर खड़ी हैं। गर्मी बढ़ते ही योजना की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आने लगी है और लोक स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खुलकर सामने आ गई है।
वर्ष 2020 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य तीन वर्षों के भीतर हर गांव और हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था। जिले के 893 गांवों में से 687 गांवों में एकल ग्राम नलजल योजनाएं स्वीकृत हुईं, जबकि 185 गांव जल निगम परियोजना में शामिल किए गए। आंकड़ों में 681 योजनाएं स्वीकृत बताई जा रही हैं, लेकिन इनमें से 165 योजनाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं। स्थिति यह है कि जिले के 2.12 लाख परिवारों में से 19 हजार से अधिक घर आज भी नल कनेक्शन से वंचित हैं। 482 गांवों में कार्य पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हर घर जल प्रमाणित गांवों की संख्या केवल 291 है। यानी आधे से अधिक गांवों में अब भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों की परेशानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में लोग दोपहर की तपती धूप में पानी भरने के लिए लाइन लगा रहे हैं। कहीं महिलाएं मटके और बाल्टियां लेकर घंटों खड़ी रहती हैं, तो कहीं रातभर पानी आने का इंतजार करना पड़ता है। जिले में 593 हैंडपंप बंद या अनुपयोगी पड़े हैं, जिससे संकट और गहरा गया है। मार्च माह में बिजली बिल जमा नहीं होने पर 40 गांवों की जलापूर्ति लाइनें तक काट दी गई थीं। बाद में जिला और जनपद पंचायत के हस्तक्षेप के बाद सप्लाई बहाल कराई गई। कई गांवों में ग्रामीणों को अत्यधिक बिजली बिल आने की शिकायत भी है।
इस पूरी योजना में जिलेभर में करीब 80 ठेकेदार कार्य कर रहे हैं। आरोप है कि कई ठेकेदारों ने क्षमता से अधिक काम ले लिया, लेकिन समय पर पूरा नहीं कर पाए। गुणवत्ता और गति दोनों सवालों के घेरे में हैं। शिवम इंजीनियरिंग और एनपीएस कंस्ट्रक्शन का अनुबंध निरस्त किया गया है, जबकि नेटलिंक, अध्या कंस्ट्रक्शन, आरएन कंस्ट्रक्शन सहित अन्य कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भेजा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग केवल बैठकों और समीक्षा तक सीमित है। जब कलेक्टर, मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी समीक्षा करते हैं, तभी कुछ हलचल दिखाई देती है। बाकी समय गांवों में लोग सिर्फ आश्वासनों के सहारे प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
पूर्व के वर्षों के अनुसार विभाग ने गर्मी में समस्या ग्रसित सिर्फ 78 बसाहटों का चयन किया है। वहां पर राइजर पाइप हैंडपंप में बढ़ा रहे हैं। 1 अप्रेल से एक मार्च तक 2 हजार हैंडपंप में सुधार कार्य कराया गया है। 17 स्थानों पर सिंगलफेस पंप भी डाले जा रहे हैं। स्रोत सूख जाने पर 7 नवीन नलकूप खनन किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है। तीनों सब डिवीजन में लैब में जांच कराई जा रही है, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके। क्लोरीनेशन भी कराया जा रहा है।
बहोरीबंद क्षेत्र के ग्राम बसेहड़ी में योजना दम तोड़ चुकी है। आदिवासी मोहल्ला में अधिक समस्या है। योजना अबतक पंचायत के हैंडोवर नहीं हुई। 60 हजार रुपए बिल आया था, ग्राम पंचायत ने बिल भी जमा कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि 15 दिन योजना चलती है तो 15 दिन बंद रहती है। हैंडपंप से पानी भरने रतजगा करना पड़ता है। जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
ढीमरखेड़ा क्षेत्र का ग्राम आदिवासी बाहुल्य गांव दादर सिंहुडी के कई परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र में बसे इस गांव में हर घर नल-जल योजना लागू होने के बावजूद करीब आधा दर्जन परिवारों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे ग्रामीण कुएं से पानी भरने को मजबूर हैं। वर्ष 2016-17 में मूरीखेड़ा गांव से बोर कर नल-जल योजना शुरू की गई थी, लेकिन अब भी समस्या बनी हुई है। काशीराम मरावी ने बताया कि छह परिवारों तक पानी सप्लाई प्रभावित है। तेज हवा और बिजली बाधित होने से टंकी नहीं भर पा रही।
ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत शुक्ल पिपरिया में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। करीब दो वर्ष पहले शुरू हुई पानी टंकी योजना आज भी अधूरी पड़ी है। निर्माण स्थल पर केवल चार पिलर खड़े हैं, जबकि काम बंद पड़ा हुआ है। गांव की 1650 आबादी में आधे से अधिक लोग एक बोर के सहारे पानी भरने को मजबूर हैं। गांव में 17 हैंडपंपों में से 10 खराब पड़े हैं, जिससे परेशानी और बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सप्लाई का पानी गंदा और मटमैला आ रहा है, जिसमें कीड़े तक निकल रहे हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।
बहोरीबंद विकासखंड क्षेत्र में नल-जल योजना के तहत 74 योजनाएं पूर्ण, 80 प्रगतिरत और 26 अब भी अप्रारंभ हैं, लेकिन जमीनी हालात योजनाओं के दावों की पोल खोल रहे हैं। करीब 500 आबादी वाले हथियागढ़ गांव में आज तक नल-जल योजना के माध्यम से एक बूंद पानी तक नहीं पहुंच सका है। ग्रामीण आज भी हैंडपंप और अन्य अस्थायी स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मी बढऩे के साथ जल संकट और गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
बहोरीबंद क्षेत्र का ग्राम डूंगरिया में नल-जल योजना पूरी होने के बावजूद ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है। करीब एक वर्ष पहले गांव में पानी की टंकी और पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। लगभग 600 आबादी वाले इस पूर्ण आदिवासी गांव में लोग पेयजल के लिए एक किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। गर्मी के मौसम में स्थिति और गंभीर हो गई है।
जानकारी ताज्जुब होगा कि जिलेभर में 500 अधिक शिकायतें वर्तमान में सीएम हेल्पलाइन में लंबित हैं। 224 शिकायतें ऐसी हैं जिनमें बताया गया है कि नलजल योजना के कार्य पूर्ण होने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा। इसी प्रकार 289 शिकायतें ऐसी हैं जिनमें शिकायत की गई है कि हैंडपंप के रखरखाव, मरम्मत, विशेष खराबी का निराकरण नहीं हो रहा।
जिले में 2020 से लेकर 23 तक जल जीवन मिशन की योजनाओं में चरणबद्ध तरीके से स्वीकृति मिली है। 681 में से 516 में काम हो गया है, 374 योजनाएं पंचायतों को भी हस्तांतरित हो गई हैं। कुछ गांवों में बिजली न होने के कारण समस्या थी। कुछ योजनाओं में ठेकेदार समय पर काम नहीं कर रहे। उनके अनुबंध निरस्त करने व ब्लैकलिस्टेड करने की कार्रवाई की जा रही है। जहां भी समस्या होती है समाधान कराया जा रहा है। गर्मी के लिए भी विशेष योजना बनी है।
Updated on:
11 May 2026 08:38 pm
Published on:
12 May 2026 07:23 am
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