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मदर्स-डे विशेष: मां केवल जन्म नहीं देती, गढ़ती हैं भविष्य, मां बनना आसान, अच्छी मां बनना चुनौती

महिला चिकित्सक डॉ. श्रद्धा द्विवेदी ने साझा किए सफल मातृत्व के सूत्र, उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को यह सोचकर पीछे नहीं हटना चाहिए कि नौकरी और बच्चों की परवरिश साथ नहीं हो सकती।

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कटनी

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Balmeek Pandey

May 10, 2026

mothers day

कटनी. मां केवल एक रिश्ता नहीं बल्कि जीवन की पहली शिक्षक, पहली मित्र और सबसे बड़ी मार्गदर्शक होती है। एक बच्चे के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को संवारने में मां की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। मदर्स-डे के अवसर पर शहर की वरिष्ठ महिला चिकित्सक डॉ. श्रद्धा द्विवेदी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में मातृत्व, बच्चों की परवरिश और महिलाओं की जिम्मेदारियों को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. श्रद्धा द्विवेदी ने कहा कि मां बनना प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार है, लेकिन एक अच्छी मां बनना धैर्य, समर्पण और समझदारी की मांग करता है। उन्होंने कहा कि बच्चे केवल शब्द नहीं, बल्कि मां का व्यवहार और भावनाएं भी समझते हैं। इसलिए बच्चों को प्यार, सुरक्षा और अच्छे संस्कार देना सबसे जरूरी है। उन्होंने बताया कि एक कामकाजी महिला के लिए घर और पेशे दोनों की जिम्मेदारियां निभाना आसान नहीं होता। चिकित्सक होने के साथ-साथ मां की भूमिका निभाना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही प्लानिंग और समय प्रबंधन से दोनों जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाया जा सकता है।

स्वस्थ मां से बनता है स्वस्थ समाज

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर जांच, संतुलित खान-पान और नियमित दवाइयों का सेवन जरूरी है, ताकि स्वस्थ शिशु का जन्म हो सके। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव होते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को यह सोचकर पीछे नहीं हटना चाहिए कि नौकरी और बच्चों की परवरिश साथ नहीं हो सकती। यदि महिला मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत रहे तो वह परिवार और करियर दोनों में संतुलन बना सकती है।

बच्चों की परवरिश में संस्कार सबसे जरूरी

डॉ. श्रद्धा द्विवेदी ने कहा कि मां को बच्चे की पढ़ाई के साथ-साथ उसके व्यवहार, दोस्ती और आदतों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। छोटे बच्चों को अच्छे संस्कार, अनुशासन और समाज में रहने की समझ देना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब बच्चा अच्छा काम करता है तो परिवार गौरवान्वित होता है, लेकिन गलत व्यवहार होने पर सबसे पहले मां के संस्कारों पर सवाल उठते हैं। इसलिए मां की जिम्मेदारी केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं, बल्कि उसे अच्छा इंसान बनाने तक होती है।

बेटियों को मजबूत बनाना जरूरी

उन्होंने कहा कि परिवारों को बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जब बेटियां शिक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो वे बेहतर निर्णय ले सकेंगी और समाज को नई दिशा देंगी। महिलाओं को मजबूरी में नहीं बल्कि मजबूती के साथ जीवन जीना सीखना होगा।

माँ के सम्मान और प्रेम का प्रतीक है मदर्स डे

हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। यह दिन मां के त्याग, समर्पण, प्रेम और परिवार के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है। मां को जीवन की पहली गुरु माना जाता है, जो अपने बच्चों की परवरिश और संस्कारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मदर्स डे मनाने की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। इसे पहली बार सामाजिक कार्यकर्ता एना जार्विस ने अपनी मां की स्मृति में मनाया था। बाद में यह परंपरा दुनिया के कई देशों में फैल गई। इस दिन लोग अपनी मां को उपहार, शुभकामनाएं और धन्यवाद देकर उनके प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं। स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मदर्स डे हमें मां के महत्व को समझने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर देता है।